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DBT के संबंध में भारतीय रिज़र्व बैंक के दिशा-निर्देश

  • 16 Jul 2018
  • 5 min read

चर्चा में क्यों?

तीन केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा खाद्य सब्सिडी के लिये प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के कार्यान्वयन में उत्पन्न हुई समस्याओं को देखते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने राज्यों को DBT को लागू करने के संबंध में सावधान रहने की सलाह दी है।

प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण
Direct Benefit Transfer (DBT)

  • मूल रूप से यह योजना उस धन का दुरुपयोग रोकने के लिये है, जिसे किसी भी सरकारी योजना के लाभार्थी तक पहुँचने से पहले ही बिचौलिये तथा अन्य भ्रष्टाचारी हड़पने की जुगत में रहते हैं।  
  • प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण से जुड़ी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें किसी बिचौलिये का कोई काम नहीं है और यह योजना सरकार तथा लाभार्थियों के बीच सीधे चलाई जा रही है।  
  • इस योजना के तहत केंद्र सरकार लाभार्थियों को विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत दी जाने वाली सब्सिडी का भुगतान सीधे उनके बैंक खाते में कर देती है। साथ ही लाभार्थियों को भुगतान उनके आधार कार्ड के ज़रिये किया जा रहा है।

DBT के क्रियान्वयन में समस्याएँ

  • रिज़र्व बैंक द्वारा राज्यों की वित्तीय स्थिति पर एक रिपोर्ट जारी की गई थी जिसमें पूर्व-DBT खपत के स्तर को बनाए रखने के लिये अपर्याप्त हस्तांतरण, अंतिम दूरी तक वितरण तंत्र की अपर्याप्तता और कमज़ोर शिकायत निवारण प्रणाली जैसी समस्याओं का उल्लेख किया गया था।
  • DBT के तहत गरीबों को चावल मिलने में हो रही शिकायतों को ध्यान में रखते हुए  पुद्दुचेरी सरकार ने इस साल की शुरुआत में चावल आपूर्ति की पुरानी प्रणाली को फिर से लागू करने की अनुमति देने के लिये केंद्र से संपर्क किया था। केंद्र सरकार ने पुद्दुचेरी राज्य सरकार के अनुरोध को सैद्धांतिक मंज़ूरी दे दी है।

DBT की वर्तमान स्थिति

  • वर्तमान में तीन केंद्रशासित प्रदेश- पुद्दुचेरी, चंडीगढ़ तथा दादरा और नगर हवेली के शहरी इलाके, नकदी हस्तांतरण के तरीके को कार्यान्वित कर रहे हैं, केंद्र सरकार के खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग द्वारा जारी एक घोषणा के अनुसार, 9.31 लाख लाभार्थियों को उनके बैंक खातों के माध्यम से हर महीने 12.82 करोड़ रुपए की राशि आवंटित की जाती है। लाभार्थियों के पास खुले बाज़ार से अनाज खरीदने का विकल्प भी उपलब्ध है।

DBT से होने वाले लाभ

  • रिज़र्व बैंक का मानना है कि नकद हस्तांतरण की प्रक्रिया ने बड़े पैमाने पर खाद्यान्नों को लाने एवं ले जाने की आवश्यकता को कम कर दिया है। इसके अलावा, खाद्यान्नों की खपत भिन्नताओं को देखते हुए, DBT में आहार विविधता को बढ़ाने के अलावा लाभार्थियों को अपनी उपभोग की वस्तुएँ चुनने के लिये "अधिक स्वायत्तता" प्रदान करता है।
  • DBT की अवधारणा को बढ़ावा देने का एक अन्य कारण सार्वजनिक वितरण प्रणाली में हो रही गड़बड़ियों को कम करना है, क्योंकि केंद्र सरकार को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के प्रावधानों की पूर्ति में अनाज के वितरण की मौजूदा प्रणाली के तहत एक विशाल खाद्य सब्सिडी बिल को समाहित करना है।
  • उल्लेखनीय है कि 2017-18 के दौरान केंद्र ने सब्सिडी वाले खाद्य अनाजों के वितरण के लिये भारतीय खाद्य निगम तथा राज्यों के खाद्य निगमों को 1.42 लाख करोड़ रुपए प्रदान किये।

DBT के निष्पादन से पहले RBI ने कुछ नियमों को किया संदर्भित

  • DBT के निष्पादन से पहले राज्यों द्वारा प्रक्रियाओं का पालन किये जाने के संबंध में भारतीय रिज़र्व बैंक ने केंद्र सरकार के 2015 के खाद्य सब्सिडी नियमों में उल्लिखित कुछ पूर्व स्थितियों को संदर्भित किया है।
  • पूर्व स्थितियों में लाभार्थी डेटाबेस का पूर्ण डिजिटलीकरण और डी-डुप्लिकेशन शामिल है और डिजिटलीकृत डेटाबेस में बैंक खाता विवरण और आधार संख्याओं की सीडिंग शामिल है।

प्रत्यक्ष हस्तांतरण के बारे में अधिक जानकारी के लिये क्लिक करें :

देश-देशांतर : सार्वजनिक वितरण प्रणाली में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण की संभावनाएं और चुनौतियाँ 
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