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भारतीय विरासत और संस्कृति

बालीयात्रा

  • 18 Nov 2022
  • 6 min read

प्रिलिम्स के लिये:

बालीयात्रा, महानदी, बंगाल की खाड़ी, कालिदास

मेन्स के लिये:

कलिंग साम्राज्य का दक्षिण पूर्व एशिया के साथ संबंध

चर्चा में क्यों?

हाल ही में, प्रधानमंत्री ने G20 शिखर सम्मेलन के मौके पर बाली में भारतीय प्रवासियों को अपने संबोधन में प्राचीन कलिंग और दक्षिण पूर्व एशिया के बीच सदियों पुराने संबंधों की स्मृति में कटक में महानदी के तट पर आयोजित वार्षिक बालीयात्रा का उल्लेख किया ।

  • वर्ष 2022 की बालीयात्रा को कागज की सुंदर मूर्तियों के निर्माण हेतु ओरिगेमी की प्रभावशाली उपलब्धि हासिल करने के लिये गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में शामिल किया गया।

बालीयात्रा:

  • परिचय:
    • बालीयात्रा, शाब्दिक रूप से 'बाली की यात्रा' देश के सबसे बड़े उत्सवों में से एक है।
    • बालीयात्रा एक सप्ताह तक चलती है जो कार्तिक पूर्णिमा (कार्तिक के महीने में पूर्णिमा की रात) से शुरू होती है।
  • ऐतिहासिक/सांस्कृतिक महत्त्व:
    • यह प्रतिवर्ष प्राचीन कलिंग (आज का ओडिशा), बाली तथा अन्य दक्षिणी और दक्षिण पूर्व एशियाई क्षेत्रों जैसे जावा, सुमात्रा, बोर्नियो, बर्मा (म्याँमार) और सीलोन (श्रीलंका) के बीच 2,000 साल पुराने समुद्री और सांस्कृतिक संबंधों की स्मृति के उपलक्ष्य में आयोजित किया जाता है। .
    • इतिहासकारों के अनुसार, कलिंग और दक्षिण पूर्व एशिया के बीच व्यापार की लोकप्रिय वस्तुओं में काली मिर्च, दालचीनी, इलायची, रेशम, कपूर, सोना और आभूषण शामिल थे।
    • बालीयात्रा उन विशेषज्ञ नाविकों की सरलता और कौशल का जश्न मनाती है जिन्होंने कलिंग को अपने समय के सबसे समृद्ध साम्राज्यों में से एक बनाया।
  • व्यावसायिक महत्त्व:
    • बालीयात्रा का अपने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक तत्त्वों के अलावा एक महत्त्वपूर्ण व्यावसायिक आयाम है।
      • यह एक ऐसा समय है जब लोग ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से लेकर स्थानीय कारीगर उत्पादों तक सब कुछ तुलनात्मक रूप से कम कीमतों पर खरीदते हैं।
      • ज़िला प्रशासन नीलामी के माध्यम से व्यापारियों को 1,500 से अधिक स्टालों का आवंटन करता है और मेले में 100 करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार होने का अनुमान है।

कलिंग का दक्षिण-पूर्व एशिया से जुड़ाव:

  • उत्पत्ति-बंदरगाहों का विकास: कलिंग साम्राज्य (वर्तमान ओडिशा) अपने गौरवशाली समुद्री इतिहास के लिये जाना जाता है। कलिंग की भौगोलिक स्थिति के कारण इस क्षेत्र में 4वीं और 5वीं शताब्दी ईसा पूर्व में बंदरगाहों का विकास देखा गया था।
    • कुछ प्रसिद्ध बंदरगाहों, ताम्रलिपती, माणिकपटना, चेलितालो, पालूर और पिथुंडा ने भारत को समुद्र के माध्यम से अन्य देशों के साथ जुड़ने की अनुमति दी। जल्द ही कलिंग के श्रीलंका, जावा, बोर्नियो, सुमात्रा, बाली और बर्मा के साथ व्यापार संबंध स्थापित हुए।
      • बाली ने चार द्वीपों का एक हिस्सा बनाया, जिन्हें सामूहिक रूप से सुवर्णद्वीप कहा जाता था, इसे आज इंडोनेशिया के नाम से जाना जाता है।
  • कलिंग के जहाज़: कलिंग ने 'बोइता' नामक बड़ी नौकाओं का निर्माण किया और इनकी मदद से उसने इंडोनेशियाई द्वीपों के साथ व्यापार किया।
    • बंगाल की खाड़ी को कभी कलिंग सागर के रूप में जाना जाता था क्योंकि यह इन जहाज़ों से घिरा हुआ था।
  • समुद्री मार्गों पर कलिंगं के प्रभुत्व को इस तथ्य से समझा जा सकता है कि कालिदास ने अपने रघुवंश में कलिंग के राजा को 'समुद्र के भगवान' के रूप में संदर्भित किया था
  • इंडोनेशिया के साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान: कलिंग के लोग अक्सर बाली द्वीप के साथ व्यापार करते थे। वस्तुओं के व्यापार ने विचारों और विश्वासों के आदान-प्रदान को भी जन्म दिया।
  • ओडिया व्यापारियों ने बाली में बस्तियों का गठन किया और इसकी संस्कृति एवं नैतिकता को प्रभावित किया जिससे इस क्षेत्र में हिंदू धर्म का विकास हुआ।
    • हिंदू धर्म बाली अवधारणाओं के साथ अच्छी तरह से मिश्रित है और आज भी, 'बाली हिंदू धर्म' की अधिकांश आबादी में प्रचलित है।
      • वे शिव, विष्णु, गणेश और ब्रह्मा जैसे विभिन्न हिंदू देवताओं की पूजा करते हैं।
      • शिव को पीठासीन देवता माना जाता था और बुद्ध के बड़े भाई माने जाते थे।
    • बाली के लोग शिवरात्रि, दुर्गा पूजा और सरस्वती पूजा जैसे हिंदू त्योहार भी मनाते हैं।
      • बाली में मनाया जाने वाला 'मसकापन के तुकड़' उत्सव ओडिशा में बालीयात्रा उत्सव के समान है। दोनों को उनके पूर्वजों की याद में मनाया जाता है।

BURMA

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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