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परिसंपत्ति पुनर्निमाण कंपनी

  • 05 Feb 2021
  • 7 min read

चर्चा में क्यों?

बजट 2021-22 में परिसंपत्ति पुनर्निमाण कंपनी (Asset Reconstruction Company- ARC) को राज्य के स्वामित्व वाले और निजी क्षेत्र के बैंकों द्वारा स्थापित करने का प्रस्ताव किया गया है तथा कहा गया है कि सरकार इसमें कोई इक्विटी योगदान नहीं देगी।

  • ARC जो कि खराब परिसंपत्तियों के प्रबंधन और बिक्री के लिये परिसंपत्ति पुनर्निमाण कंपनी होगी, 70 बड़े खातों में 2-2.5 लाख करोड़ रुपए की परिसंपत्तियों का प्रबंधन करेगी।
  • इसे सरकार द्वारा स्थापित ‘बैड बैंक’ का संस्करण माना जा रहा है।

प्रमुख बिंदु:

परिसंपत्ति पुनर्निमाण कंपनी:

  • उद्देश्य:
    • यह एक विशेष वित्तीय संस्थान है जो बैंकों और वित्तीय संस्थानों से ‘नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स’ (Non Performing Assets- NPAs) खरीदता है ताकि वे अपनी बैलेंसशीट को स्वच्छ रख सकें।
    • यह बैंकों को सामान्य बैंकिंग गतिविधियों में ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है। बैंकों द्वारा बकाएदारों पर अपना समय और प्रयास बर्बाद करने के बजाय वे ARC को अपना NPAs पारस्परिक रूप से सहमत मूल्य पर बेच सकते हैं।
  • विधिक आधार: 
    • सरफेसी अधिनियम, 2002 (SARFAESI Act, 2002) भारत में ARCs की स्थापना के लिये कानूनी आधार प्रदान करता है।
    • सरफेसी अधिनियम न्यायालयों के हस्तक्षेप के बिना गैर-निष्पदनकारी संपत्ति के पुनर्निर्माण में मदद करता है। इस अधिनियम के तहत बड़ी संख्या में ARCs का गठन और उन्हें भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के साथ पंजीकृत किया गया, जिसे ARCs को विनियमित करने की शक्ति मिली है।
  • ARCs के लिये पूंजी आवश्यकताएँ:
    • वर्ष 2016 में सरफेसी अधिनियम में किये गए संशोधनों के अनुसार, एक ARC के पास न्यूनतम 2 करोड़ रुपए की स्वामित्व निधि होनी चाहिये। 
    • RBI ने वर्ष 2017 में यह राशि बढ़ाकर 100 करोड़ रुपए कर दी थी। ARC को अपनी जोखिम भारित परिसंपत्तियों के 15% का पूंजी पर्याप्तता अनुपात बनाए रखना होगा।
      • जोखिम-भारित परिसंपत्तियों का उपयोग पूंजी की न्यूनतम राशि निर्धारित करने हेतु किया जाता है जिसे दिवालिया होने के जोखिम को कम करने के लिये बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों द्वारा बनाए रखा जाना चाहिये।

नवीन ARC:

  • आवश्यकता:
    • मौजूदा ARCs में से केवल 3-4 पर्याप्त रूप से पूंजीकृत हैं, जबकि शेष एक दर्जन से अधिक अल्प पूंजीकृत हैं। तनावग्रस्त परिसंपत्तियों का तत्काल समाधान करने के लिये एक नई संरचना स्थापित करने की आवश्यकता है।
    • भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा जारी एक रिपोर्ट में कहा गया था कि बेसलाइन परिदृश्य के तहत सितंबर 2020 में बैंकों की सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियाँ सितंबर 2021 तक बढ़कर 13.5% हो सकती हैं, जो कि सितंबर 2020 में 7.5% थी।
  • कार्यशैली:
    • ARC को ‘स्ट्रेस्ड एसेट्स’ का स्थानांतरण ‘नेट बुक वैल्यू’ पर होगा, जो कि इन एसेट्स के खिलाफ बैंकों द्वारा की गई ‘एसेट माइनस प्रोविज़निंग’ के मान के बराबर है। यह बैंकों को NPA के माध्यम से होने वाले नुकसान को कम करने में सक्षम बनाता है।
    • ARC को बेचे जाने वाली गैर-निष्पादित संपत्तियों के लिये बैंकों को 15% नकद और 85% प्रतिभूति ‘रिसीप्ट्स’ प्राप्त होंगी।
      • जब वाणिज्यिक बैंकों या वित्तीय संस्थानों की गैर-निष्पादित संपत्तियों को वसूली के उद्देश्य से ARC द्वारा अधिग्रहीत किया जाता है तब ARCs द्वारा प्रतिभूति ‘रिसीप्ट्स’ जारी की जाती है।
      • मौजूदा निर्देशों के अनुसार, SARFAESI अधिनियम 2002 के तहत ‘ ‘क्वालिफाइड इंस्टीट्यूट बायर्स’ (Qualified Institutional Buyers-QIBs) द्वारा प्रतिभूति ‘रिसीप्ट्स’ में निवेश किया जाना प्रतिबंधित है।
  • केंद्र सरकार द्वारा सहायता:
    • हालाँकि सरकार ARC को कोई प्रत्यक्ष इक्विटी सहायता प्रदान नहीं करेगी, लेकिन यह संप्रभु गारंटी प्रदान कर सकती है जो नियामक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये आवश्यक हो सकती है।

संभावित लाभ:

  • ये संस्थाएँ बैंक बैलेंसशीट में गैर-निष्पादनकारी सपत्तियों के भार को कम करेंगी और बाज़ार आधारित तरीकों से इन ‘बैड लोन्स’ का प्रबंधन करेंगी।

अन्य प्रस्तावित सुधार:

  • विकास वित्तीय संस्थान:
    • सरकार द्वारा प्रस्तावित विकास वित्तीय संस्थान (DFI) में ‘इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी लिमिटेड’ (IIFCL) का विलय किया जा सकता है, जो कि 3 वर्ष की लंबी अवधि में 5 लाख करोड़ रुपए. की ‘इन्फ्रा फंडिंग’ के लिये स्थापित की जा रही है। ।
    • नेशनल बैंक फॉर फाइनेंसिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट (NaBFID), प्रस्तावित DFI, नेशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन (NIP) को सफल बनाने में सहायता प्रदान करेंगे।
    • भारतीय रिज़र्व बैंक प्रस्तावित DFI को विनियमित करेगा, जो अपने प्रारंभिक वर्षों में सरकार के पूर्ण स्वामित्व में रहेगा।
  • निजीकरण:
    • दो राज्य स्वामित्व वाले बैंकों और एक बीमा कंपनी के निजीकरण के संबंध में कंपनियों को सरकार द्वारा परिभाषित प्रक्रिया के माध्यम से पहचाना जाएगा।
    • पहले दौर में नीति आयोग द्वारा इसका चयन किया जाएगा, उसके बाद इसे सचिवों के मुख्य समूह के पास भेजा जाएगा और अंततः वैकल्पिक तंत्र द्वारा इसकी जाँच की जाएगी।

स्रोत-पीआईबी

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