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असम सरकार द्वारा NRC के पुनर्सत्यापन की मांग

  • 02 Sep 2020
  • 5 min read

प्रिलिम्स के लिये: 

राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर, डी-वोटर

मेन्स के लिये:

राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर और विदेशी अधिकरण से जुड़े मुद्दे 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में असम सरकार ने वर्ष 2019 में जारी ‘राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर’ (National Register of Citizens- NRC) में शामिल 10-20% नामों के पुनः सत्यापन की अपनी मांग को दोहराया है। 

प्रमुख बिंदु:

  • जुलाई, 2019 में असम सरकार ने उच्चतम न्यायलय में एक हलफनामा (Affidavit) दायर किया था, जिसमें राज्य सरकार ने बांग्लादेश सीमा से सटे ज़िलों से NRC में शामिल 20% नामों और शेष ज़िलों से 10% नामों के पुनः सत्यापन किये जाने की मांग की थी। 
  • हालाँकि असम के एनआरसी समन्वयक (NRC Coordinator) द्वारा 27% नामों के पुनर्सत्यापन की बात कहे जाने के बाद सर्वोच्च न्यायलय ने राज्य सरकार की मांग को खारिज कर दिया था।
  • ध्यातव्य है कि वर्ष 2018 के एक निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने पुन: सत्यापन की संभावना का उल्लेख करते हुए कहा था कि वह NRC में शामिल 10% नामों को पुनः सत्यापित करने पर विचार कर सकता है।
  • गौरतलब है कि अगस्त 2019 में प्रकाशित NRC में 19 लाख लोगों को इस रजिस्टर से बाहर कर दिया गया था। 

NRC की प्रक्रिया का प्रभाव:

  • असम सरकार द्वारा विधान सभा में प्रस्तुत किये गए आँकड़ों के अनुसार,  वर्तमान में राज्य में सक्रिय विदेशी अधिकरणों (Foreigners’ Tribunals) द्वारा अब तक 1,36,149 लोगों को विदेशी नागरिक घोषित किया जा चुका है।  
  • साथ ही 13 मार्च, 2013 से लेकर 31 जुलाई 2020 के बीच केवल 227 विदेशी नागरिकों को निर्वासित किया गया है।  
  • गौरतलब है कि वर्तमान में असम राज्य में 100 विदेशी अधिकरण सक्रिय हैं।  
  • वर्तमान में कुल 425 लोगों को राज्य के 6 अलग-अलग निरोध केंद्र अथवा डिटेंशन सेंटर (Detention Centre) में रखा गया है।

पुनर्सत्यापन की आवश्यकता: 

  • राज्य सरकार ने लोगों द्वारा सही NRC की मांग को पुनर्सत्यापन का प्रमुख आधार बताया है।
  • वर्तमान में NRC से बाहर 19 लाख लोगों को ‘अस्वीकृति आदेश’ (Rejection Order) भी नहीं जारी किया जा सका है।  
    • गौरतलब है कि यह आदेश लोगों को अपने बहिष्कार के खिलाफ विदेशी अधिकरण में अपील की अनुमति प्रदान करेगा।     
  • सरकार के अनुसार, COVID-19 और राज्य में बाढ़ की चुनौतियों के कारण लोगों को ‘अस्वीकृति आदेश’ जारी करने की प्रक्रिया बाधित हुई है।  

डी-वोटर की समस्या:

  • असम सरकार के अनुसार, राज्य के विभिन्न विदेशी अधिकरणों के समक्ष ‘संदिग्ध’ (Doubtful) या  ‘डी-वोटर’ (D-Voter) के 83,008 मामले लंबित हैं। 
  • डी-वोटर ऐसे लोगों की सूची है जिन्हें निर्वाचन आयोग द्वारा विदेशी नागरिक होने के संदेह के आधार पर असम की मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया है। 
  • ऐसे मामलों को विदेशी अधिकरणों के पास भेजा जाता है जो उनकी नागरिकता के संदर्भ में निर्णय लेती है। 

राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर’

(National Register of Citizens- NRC):

  • राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर या एनआरसी एक ऐसा रजिस्टर है जिसमें भारतीय नागरिकों के विवरण को शामिल किया गया है। 
  • राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर को सबसे पहले वर्ष 1951 में तैयार किया गया था। 
  • NRC को अद्यतन या अपडेट (Update) करने की प्रक्रिया वर्ष 2013 में सर्वोच्च न्यायालय के एक निर्णय के बाद शुरू की गई। 
  • असम में NRC में ऐसे लोगों को शामिल किया जाएगा जो ये प्रमाणित कर सकें कि वे 24 मार्च, 1971 से पहले भारत के नागरिक रहें हों। 

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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