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आंतरिक सुरक्षा

ब्रू शरणार्थी संकट और समझौते का विरोध

  • 04 May 2020
  • 9 min read

प्रीलिम्स के लिये

ब्रू शरणार्थी संकट, ब्रू समुदाय की भौगोलिक स्थिति

मेन्स के लिये 

नृजातीय संघर्ष से उत्पन्न आतंरिक सुरक्षा की समस्या

चर्चा में क्यों?

त्रिपुरा के कुछ समूहों ने उत्तर त्रिपुरा ज़िले के कंचनपुर उपखंड में विस्थापित ब्रू जनजाति के लोगों को स्थाई रूप से बसाने के निर्णय पर आपत्ति जताई जताते हुए उन्हें त्रिपुरा से बाहर करने की मांग की है। 

प्रमुख बिंदु

  • इस संबंध में क्षेत्र के दो प्रमुख संगठनों नागरिक सुरक्षा मंच (Nagarik Suraksha Mancha) और मिज़ो कन्वेंशन (Mizo Convention) ने त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लव कुमार देब को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें कंचनपुर उपखंड में विस्थापितों को स्थाई रूप से बसाने का विरोध किया गया है।
    • नागरिक सुरक्षा मंच वर्ष 1947 में विभाजन के पश्चात् पूर्वी-पाकिस्तान से विस्थापित बंगालियों का प्रतिनिधित्व करता है और मिज़ो कन्वेंशन उत्तरी त्रिपुरा की जामपुई पहाड़ी में रहने वाली मिज़ो आबादी का प्रतिनिधित्व करता है।
  • ध्यातव्य है कि लगभग 40,000 से अधिक ब्रू जनजाति के लोग उत्तरी त्रिपुरा के कंचनपुर और पनीसागर उपखंडों में रह रहे थे। हालाँकि 30 नवंबर, 2019 तक प्रत्यावर्तन (Repatriation) के नौ चरणों के बाद लगभग 7,000 ब्रू शरणार्थी मिज़ोरम लौट गए, किंतु शेष ब्रू शरणार्थी अभी भी त्रिपुरा में मौजूदा हैं।
  • 16 जनवरी, 2020 को केंद्र सरकार ने ब्रू शरणार्थी संकट (Bru Refugee Crisis) को सदैव के लिये समाप्त करने के उद्देश्य से त्रिपुरा सरकार, मिज़ोरम सरकार तथा ब्रू जनजाति के प्रतिनिधियों के साथ एक चतुर्पक्षीय समझौता किया, जिसमें मिज़ोरम वापस न जाने वाले ब्रू शरणार्थियों को त्रिपुरा में ही बसाने की बात की गई थी।

संगठनों की मांग

  • संगठनों द्वारा दिये गए ज्ञापन के अनुसार, कंचनपुर उपखंड में ब्रू जनजाति के लोगों के आगमन के बाद से इस क्षेत्र विशिष्ट में असामाजिक गतिविधियों में काफी तेज़ी से वृद्धि हुई है, जिसके कारण इस उपखंड में उनकी स्थाई बसावट उनकी चिंता का विषय है।
  • संगठनों के अनुसार, यदि सरकार अपनी पुनर्वास योजना के साथ आगे बढ़ती है तो उपखंड में लॉकडाउन ख़त्म होते ही अनिश्चितकालीन हड़ताल का आयोजन किया जाएगा।
  • हालाँकि, दोनों संगठनों ने स्पष्ट किया कि उन्हें त्रिपुरा के 22 अन्य उपखंडों में ब्रू लोगों के पुनर्वास पर कोई आपत्ति नहीं है। 
  • संगठन का कहना है कि वे केवल कंचनपुर उपखंड के तहत पाँच स्थानों पर बड़ी संख्या में ब्रू लोगों को बसाने का विरोध कर रहे हैं, क्योंकि इन क्षेत्रों में भूमि और वन संसाधनों की कमी है।

कैसे उत्पन्न हुआ ब्रू शरणार्थी संकट?

  • ध्यातव्य है कि मिज़ो समुदाय के लोग ब्रू जनजाति के लोगों को बाहरी अथवा विदेशी मानते हैं, उनका मानना है कि ब्रू जनजाति के लोगों उनके क्षेत्र में आकर अवैध रूप से बस गए हैं। इन दोनों समुदायों के बीच संघर्ष का पुराना इतिहास रहा है।
  • वर्ष 1995 में मिज़ोरम राज्य में ब्रू समुदाय द्वारा स्वायत्त ज़िला परिषद की मांग और चुनावों में भागीदारी से संबंधित कुछ अन्य मुद्दों पर ब्रू और मिज़ो समुदाय के बीच तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई।
    • इस तनावपूर्ण स्थिति के पश्चात् ‘यंग मिज़ो एसोसिएशन’ (Young Mizo Association) और ‘मिज़ो स्टूडेंट्स एसोसिएशन’ (Mizo Students’ Association) जैसे संगठनों ने यह मांग की कि ब्रू लोगों के नाम राज्य की मतदाता सूची से हटाए जाए क्योंकि वे मूल रूप से मिज़ोरम के निवासी नहीं हैं।
  • इसके पश्चात् ब्रू समुदाय द्वारा समर्थित उग्रवादी समूह ‘ब्रू नेशनल लिबरेशन फ्रंट’ (Bru National Liberation Front-BNLF) तथा एक राजनीतिक संगठन ‘ब्रू नेशनल यूनियन’ (Bru National Union-BNU) के नेतृत्व में वर्ष 1997 में मिज़ो जनजातियों के समूह से हिंसक नृजातीय संघर्ष शुरू हुआ।
    • हिंसा तब और अधिक तेज़ हो गई जब ब्रू नेशनल लिबरेशन फ्रंट (Bru National Liberation Front) के सदस्यों ने एक मिज़ो अधिकारी की हत्या कर दी।
  • इस घटना के बाद दोनों समुदायों के बीच दंगे भड़क गए और अल्पसंख्यक होने के कारण ब्रू समुदाय को मिज़ोरम में अपना घर-बार छोड़कर त्रिपुरा के शरणार्थी शिविरों में आश्रय लेना पड़ा।

ब्रू समुदाय के लिये चतुर्पक्षीय समझौता

  • इसी वर्ष 16 जनवरी को केंद्र सरकार, त्रिपुरा सरकार, मिज़ोरम सरकार और ब्रू प्रतिनिधियों के मध्य ब्रू शरणार्थियों को लेकर एक चतुर्पक्षीय समझौता किया गया, जिसमें त्रिपुरा में रह रहे शेष ब्रू शरणार्थियों को त्रिपुरा में ही बसाने की बात की गई थी।
  • केंद्र सरकार ने इस संबंध में 600 करोड़ रुपए के पैकेज की घोषणा की थी।
  • इस समझौते के तहत विस्थापित ब्रू परिवारों के लिये निम्नलिखित व्यवस्था की गई है-
    • वे सभी ब्रू परिवार जो त्रिपुरा में ही बसना चाहते हैं, उनके लिये त्रिपुरा में स्थाई तौर पर रहने की व्यवस्था के साथ उन्हें त्रिपुरा राज्य के नागरिकों के सभी अधिकार दिये जाएंगे। और ये लोग केंद्र सरकार व त्रिपुरा राज्य की सभी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे।
    • समझौते के तहत विस्थापित परिवारों को 1200 वर्ग फीट (40X30 फीट) का आवासीय प्लाॅट दिया जाएगा। साथ ही प्रत्येक विस्थापित परिवार को घर बनाने के लिये 1.5 लाख रुपए की नकद सहायता भी जाएगी।
    • पुनर्वास सहायता के रूप में परिवारों को दो वर्षों तक प्रतिमाह 5 हज़ार रुपए और निःशुल्क राशन प्रदान किया जाएगा।
    • त्रिपुरा राज्य सरकार विस्थापित परिवारों के बैंक खाते, आधार कार्ड, जाति व निवास प्रमाण पत्र तथा मतदाता पहचान पत्र आदि जरूरी प्रमाण-पत्रों की व्यवस्था करेगी।

ब्रू जनजाति

  • ब्रू या रेयांग (Bru or Reang) समुदाय पूर्वोत्तर भारत के मूल निवासी हैं जो मुख्यतः त्रिपुरा, मिज़ोरम तथा असम में रहते हैं।
  • ब्रू जनजाति के लोग पूर्वोत्तर के कई राज्यों में रहते हैं परंतु इस समुदाय की सबसे बड़ी आबादी मिज़ोरम के मामित और कोलासिब ज़िलों में पाई जाती है। इस समुदाय के अंतर्गत लगभग 12 उपजातियाँ शामिल हैं।
  • इस समुदाय के लोग ब्रू भाषा बोलते हैं।

आगे की राह

  • ब्रू शरणार्थी संकट को हल करने हेतु विभिन्न पक्षों ने कई प्रयास किये हैं। केंद्र सरकार द्वारा किया गया यह चतुर्पक्षीय समझौता भी इन्हीं प्रयासों में से एक है।
  • हालाँकि इस समझौते की एक कमी यह है कि इसमें कंचनपुर उपखंड में रहने वाली अन्य जनजातियों (ब्रू के अतिरिक्त) को एक पक्ष के रूप में शामिल नहीं किया गया है, जिसके कारण समझौते के विरुद्ध विरोध के स्वर सुनाई दे रहे हैं।
  • आवश्यक है कि सरकार इस समझौते पर एक बार पुनः विचार करे और इसमें विभिन्न संगठनों द्वारा की जा रही मांगों को भी शामिल किया जाए।

स्रोत: द हिंदू

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