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GER में वृद्धि का महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य

  • 11 Jul 2019
  • 3 min read

चर्चा में क्यों?

भारत सरकार ने वर्ष 2024 तक सकल नामांकन अनुपात (Gross Enrolment Ratio - GER) को 40 प्रतिशत तक बढ़ाने का महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।

मुख्य बिंदु:

  • विशेषज्ञों के अनुसार, इसे प्राप्त करने का एकमात्र तरीका पिछड़े ज़िलों में कॉलेज खोलना और सामाजिक तथा आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग के लोगों को अध्ययन के लिये वहाँ दाख़िला देना ही है।
  • जहाँ एक ओर वर्तमान में देश का GER लगभग 25.8 प्रतिशत है, वहीं दूसरी ओर जातिगत आँकड़ों कि बात करें तो SC के लिये यह 21.8 प्रतिशत और ST के लिये यह 15.9 प्रतिशत है।
  • यदि भारत की तुलना वैश्विक स्तर पर की जाए तो भारत का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा है।
  • ब्रिक्स राष्ट्रों की बात करें तो रूस में GER 81.8 प्रतिशत, ब्राज़ील में 50.5 प्रतिशत और चीन में 50.0 प्रतिशत है।
  • मानव संसाधन विकास मंत्रालय (MHRD) ने अगले पाँच वर्षों में इस महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य की प्राप्ति के लिये 30,338 करोड़ रुपए का निवेश करने का प्रस्ताव किया है।
  • इस संदर्भ में मंत्रालय द्वारा जारी किये गए दस्तावेज़ में GER को 40 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिये एक चहुँमुखी रणनीति का सुझाव दिया गया है।

सरकार की चहुंमुखी रणनीति :

  • आर्थिक रूप से कमज़ोर 16 लाख युवाओं को शिक्षा से जोड़ने और आवासीय सुविधा प्रदान करने के लिये 8000 समरस हॉस्टलों (Samras Hostels) का निर्माण किया जाएगा।
  • अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के छात्रों को सहायता करने के लिये 1000 करोड़ रुपए के निवेश से फिनिशिंग स्कूलों (Finishing Schools) का निर्माण किया जाएगा।
  • मंत्रालय द्वारा पिछड़े ब्लॉकों के 500 डिग्री कॉलेजों को व्यावसायिक डिग्री कॉलेज (Vocational Degree Colleges - VCD) में बदलने का भी प्रस्ताव रखा गया है।
  • बिना डिजिटल पहुँच वाले ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुँचाना एक और बड़ी चुनौती है, जिससे निपटने के लिये सरकार वहाँ पर ‘कन्वेंशनल स्टडी सेंटर’ (Conventional Study Centres) स्थापित करेगी।

प्रस्तुत दस्तावेज़ से संबंधी महत्त्वपूर्ण पहलू :

  • यह दस्तावेज़ 10 विशेषज्ञों द्वारा विचार विमर्श के बाद तैयार किया गया है।
  • विशेषज्ञों के इस समूह की अध्यक्षता गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय के चांसलर हसमुख अधिया ने की थी।

स्रोत: टाइम्स ऑफ़ इंडिया

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