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आंतरिक सुरक्षा

आकाश मिसाइल और MPATGM: DRDO

  • 22 Jul 2021
  • 7 min read

प्रिलिम्स के लिये 

आकाश मिसाइल, मैन पोर्टेबल एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन

मेन्स के लिये

रक्षा प्रोद्योगिकी के स्वदेशीकरण में DRDO की भूमिका

चर्चा में क्यों?

हाल ही में ‘रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन’ (DRDO) ने नई पीढ़ी की ‘आकाश मिसाइल’ (Akash-NG) और ‘मैन पोर्टेबल एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल’ (MPATGM) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है।

  • जून 2021 में ‘रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन’ द्वारा नई पीढ़ी की परमाणु सक्षम बैलिस्टिक मिसाइल ‘अग्नि-पी’ (प्राइम) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया था।
  • फरवरी 2021 में भारत ने स्वदेशी रूप से विकसित एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम 'हेलिना' और 'ध्रुवस्त्र' का भी सफलतापूर्वक परीक्षण किया था।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO)

  • यह भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय का अनुसंधान एवं विकास विंग है, जिसका लक्ष्य भारत को अत्याधुनिक रक्षा प्रौद्योगिकियों के साथ सशक्त बनाना है।
  • इसकी स्थापना वर्ष 1958 में रक्षा विज्ञान संगठन (Defence Science Organisation- DSO) के साथ भारतीय सेना के तकनीकी विकास प्रतिष्ठान (Technical Development Establishment- TDEs) तथा तकनीकी विकास और उत्पादन निदेशालय (Directorate of Technical Development & Production- DTDP) के संयोजन के बाद की गई थी।

प्रमुख बिंदु

नई पीढ़ी की ‘आकाश मिसाइल’ (Akash-NG):

Akash-NG

  • परिचय
    • यह सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है। यह आकाश मिसाइल का एक नवीनतम  संस्करण है जो लगभग 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित लक्ष्य पर हमला कर सकती है और 2.5 मैक तक की गति से उड़ान भर सकती है।
    • एक बार तैनात होने के पश्चात् नई पीढ़ी की ‘आकाश मिसाइल’ हथियार प्रणाली भारतीय वायु सेना की वायु रक्षा क्षमता के लिये एक महत्त्वपूर्ण गुणक साबित होगी।
  • विकास और उत्पादन:
    • इस मिसाइल प्रणाली को हैदराबाद स्थित ‘रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला’ (DRDL) द्वारा अन्य DRDO प्रयोगशालाओं के सहयोग से विकसित किया गया है।
    • इसका निर्माण ‘भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड’ (BEL) और ‘भारत डायनेमिक्स लिमिटेड’ (BDL) द्वारा किया जा रहा है।
  • आकाश मिसाइल:
    • आकाश भारत की पहली स्वदेश निर्मित मध्यम श्रेणी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है जो कई दिशाओं, कई लक्ष्यों को निशाना बना सकती है।
      • इस मिसाइल को मोबाइल प्लेटफाॅर्मों के माध्यम से युद्धक टैंकों या ट्रकों से लॉन्च किया जा सकता है। इसमें लगभग 90% तक लक्ष्य को भेदने की सटीकता की संभावना है।
      • इस मिसाइल का संचालन स्वदेशी रूप से विकसित रडार 'राजेंद्र' द्वारा किया जाता है।
      • यह मिसाइल ठोस ईंधन तकनीक और उच्च तकनीकी रडार प्रणाली के कारण अमेरिकी पैट्रियट मिसाइलों (US’ Patriot Missiles) की तुलना में सस्ती और अधिक सटीक है।
      • यह मिसाइल ध्वनि की गति से 2.5 गुना तीव्र गति से लक्ष्य को भेद सकती है तथा निम्न, मध्यम और उच्च ऊँचाई पर लक्ष्यों का पता लगाकर उन्हें नष्ट कर सकती है।
    • आकाश मिसाइल प्रणाली को भारत के 30 वर्षीय एकीकृत निर्देशित-मिसाइल विकास कार्यक्रम (Integrated Guided-Missile Development Programme- IGMDP) के हिस्से के रूप में डिज़ाइन और विकसित किया गया है।

मैन पोर्टेबल एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल:

Missile

  • यह एक स्वदेश निर्मित एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल है।
    • एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल एक मध्यम या लंबी दूरी की मिसाइल है जिसका प्राथमिक उद्देश्य टैंक और अन्य बख्तरबंद वाहनों को नष्ट करना है।
  • यह कम वज़न वाली दागो और भूल जाओ (Fire and Forget) प्रणाली पर काम करने वाली मिसाइल है।
  • इसे 15 किग्रा. से कम वज़न के साथ 2.5 किमी. की अधिकतम रेंज में लॉन्च किया गया है।
  • इसके सफल परीक्षण ने सरकार के आत्मनिर्भर भारत अभियान को बढ़ावा दिया और भारतीय सेना को मज़बूती प्रदान की।

एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम (IGMDP)

  • इसकी स्थापना का विचार प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वारा दिया गया था। इसका उद्देश्य मिसाइल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना था। इसे भारत सरकार द्वारा वर्ष 1983 में अनुमोदित किया गया था और मार्च 2012 में पूरा किया गया था।
  • इस कार्यक्रम के तहत विकसित 5 मिसाइलें (P-A-T-N-A) हैं:
    • पृथ्वी: सतह-से-सतह पर मार करने में सक्षम कम दूरी वाली बैलिस्टिक मिसाइल।
    • अग्नि: सतह-से-सतह पर मार करने में सक्षम मध्यम दूरी वाली बैलिस्टिक मिसाइल, यानी अग्नि (1,2,3,4,5)।
    • त्रिशूल: सतह-से-आकाश में मार करने में सक्षम कम दूरी वाली मिसाइल।
    • नाग: तीसरी पीढ़ी की टैंक भेदी मिसाइल।
    • आकाश: सतह-से-आकाश में मार करने में सक्षम मध्यम दूरी वाली मिसाइल।

स्रोत: पी.आई.बी.

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