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भारत के हवाई क्षेत्र का मानचित्र

  • 29 Sep 2021
  • 7 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में नागरिक उड्डयन मंत्रालय (Ministry of Civil Aviation) ने ड्रोन संचालन के लिये भारत के हवाई क्षेत्र का मानचित्र जारी किया है, जो पूरे देश में रेड ज़ोन, येलो ज़ोन और ग्रीन ज़ोन क्षेत्रों को दर्शाता है।

  • यह नागरिक ड्रोन ऑपरेटरों को सीमांकित प्रतिबंधित उड़ान ज़ोन (No-fly zones) की जाँच करने की अनुमति देगा या जहाँ उन्हें उड़ान भरने से पहले कुछ औपचारिकताओं से गुज़रना होगा।
  • इससे पहले ‘‘विश्वास, स्वप्रमाणन एवं बिना किसी हस्तक्षेप के निगरानी’’ पर आधारित 'उदारीकृत ड्रोन नियम, 2021' का अनावरण किया गया था और ड्रोन उद्योग के लिये उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना की भी घोषणा की गई थी।

प्रमुख बिंदु

  • परिचय:
    • ग्रीन ज़ोन: 
      • यह 400 फीट तक का हवाई क्षेत्र है जिसे लाल या पीले क्षेत्र के रूप में नामित नहीं किया गया है और एक हवाई अड्डे की परिचालन परिधि से 8-12 किमी के बीच स्थित क्षेत्र से 200 फीट ऊपर है।
      • 500 किलोग्राम तक वज़न वाले ड्रोन के संचालन के लिये किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है। 
    • येलो ज़ोन:
      • यह एक निर्दिष्ट ग्रीन ज़ोन में 400 फीट से ऊपर का हवाई क्षेत्र है और एक हवाई अड्डे की परिधि से 8-12 किमी. के बीच स्थित क्षेत्र में 200 फीट से ऊपर तथा एक हवाई अड्डे की परिधि सतह से 5-8 किमी. के बीच स्थित क्षेत्र है। 
      • संबंधित हवाई यातायात नियंत्रण प्राधिकरणों से अनुमति की आवश्यकता होती है जो या तो भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण, भारतीय वायु सेना, भारतीय नौसेना, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड आदि हो सकते हैं।
    • रेड ज़ोन:
      • यह 'नो-ड्रोन ज़ोन' है जिसके भीतर केंद्र सरकार की अनुमति के बाद ही ड्रोन का संचालन किया जा सकता है।
  • ड्रोन नियम, 2021:
    • इन नियमों का उद्देश्य एक 'डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म' निर्मित करना है जो एक व्यापार-अनुकूल सिंगल-विंडो ऑनलाइन सिस्टम है, जिसमें न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप के साथ अधिकांश अनुमतियांँ स्वयं ही प्राप्त की जा सकेंगी।
    • नियमों के अनुपालन की मांग ने प्रक्रिया में शामिल लालफीताशाही (Red-Tape) को कम कर दिया है:
      • शुल्क की मात्रा को नाममात्र के स्तर तक घटा दिया गया है और इसे ड्रोन के आकार से निर्धारित होने की प्रक्रिया से अलग कर दिया गया है।
      • डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म के माध्यम से ड्रोन के हस्तांतरण और पंजीकरण हेतु आसान प्रक्रिया निर्दिष्ट की गई है।
      • नैनो और मॉडल ड्रोन (अनुसंधान या मनोरंजन के उद्देश्य से बने) को टाइप सर्टिफिकेशन से छूट दी गई है।
    • ड्रोन नियम 2021 के तहत ड्रोन का कवरेज 300 किलोग्राम से बढ़ाकर 500 किलोग्राम कर दिया गया है। इसमें ड्रोन टैक्सियाँ भी शामिल होंगी।
    • टाइप सर्टिफिकेट की ज़रूरत तभी पड़ती है जब भारत में ड्रोन का संचालन किया जाना हो। पूरी तरह से निर्यात हेतु निर्माण ड्रोन को टाइप सर्टिफिकेट (Type Certification) और विशिष्ट पहचान संख्या (Unique Identification Number) से छूट दी गई है।
    • कार्गो डिलीवरी हेतु ड्रोन कॉरिडोर विकसित किये जाएंगे।

ड्रोन

  • ड्रोन के बारे में:
    • ड्रोन मानव रहित विमान (Unmanned Aircraft) के लिये प्रयुक्त एक आम शब्द है। मानव रहित विमान के तीन उप-सेट हैं- रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट (Remotely Piloted Aircraft), ऑटोनॉमस एयरक्राफ्ट (Autonomous Aircraft) और मॉडल एयरक्राफ्ट (Model Aircraft)।
      • रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट में रिमोट पायलट स्टेशन, आवश्यक कमांड और कंट्रोल लिंक तथा अन्य घटक होते हैं।
    • ड्रोन को उनके वज़न के आधार पर पाँच श्रेणियों में बाँटा गया है-
      • नैनो- 250 ग्राम से कम या उसके बराबर।
      • माइक्रो- 250 ग्राम से 2 किग्रा. तक।
      • स्माल- 2 किग्रा. से 25 किग्रा. तक।
      • मीडियम- 25 किग्रा. से 150 किग्रा. तक।
      • लार्ज- 150 किग्रा. से अधिक
  • महत्त्व:
    • ड्रोन, अर्थव्यवस्था के लगभग सभी क्षेत्रों में लाभ प्रदान करते हैं। 
    • इनमें शामिल हैं- कृषि, खनन, बुनियादी ढाँचा, निगरानी, ​​आपातकालीन प्रतिक्रिया, परिवहन, भू-स्थानिक मानचित्रण, रक्षा और कानून प्रवर्तन।
    • ड्रोन अपनी पहुँच, उच्च क्षमता और उपयोग में आसानी के कारण विशेष रूप से भारत के दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में रोज़गार एवं आर्थिक विकास के महत्त्वपूर्ण निर्माता हो सकते हैं।
      • हाल ही में तेलंगाना सरकार ने एक महत्त्वाकांक्षी यानी इस प्रकार की पहली पायलट परियोजना 'मेडिसिन फ्रॉम द स्काई' के परीक्षण के लिये 16 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) का चयन किया है। इस परियोजना में ड्रोन के ज़रिये दवाओं की डिलीवरी करना शामिल है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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