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अफ्रीका की रिफ्ट वैली और एक नए महासागर बेसिन का निर्माण

  • 17 Mar 2023
  • 8 min read

प्रिलिम्स के लिये:

लाल सागर, रिफ्ट वैली, न्युबियन अफ्रीकी प्लेट, अरेबियन प्लेट, अदन की खाड़ी।

मेन्स के लिये:

टेक्टोनिक प्लेट्स, अफ्रीकी प्लेट्स में दरार के लिये ज़िम्मेदार कारक।

चर्चा में क्यों?   

वर्ष 2020 में एक अध्ययन से पता चला है कि अफ्रीकी महाद्वीप के धीरे-धीरे अलग होने से एक नए महासागर बेसिन का निर्माण हो रहा है।

  • यह पूर्वी अफ्रीकी रिफ्ट घाटी के कारण है, जो 56 किलोमीटर तक फैली हुई है और वर्ष 2005 में इथियोपियाई रेगिस्तान में दिखाई दी थी

अफ्रीका की प्लेटों के खिसकने के लिये ज़िम्मेदार कारक:

  • कारक:  
    • तीन प्लेटें- न्युबियन अफ्रीकी प्लेट, सोमालियाई अफ्रीकी प्लेट और अरेबियन प्लेट अलग-अलग गति से विभाजित हो रही हैं।
    • अरेबियन प्लेट प्रतिवर्ष लगभग एक इंच की दर से अफ्रीका से दूर जा रही है, जबकि दो अफ्रीकी प्लेटें प्रतिवर्ष आधा इंच से 0.2 इंच के मध्य या और भी धीमी गति से अलग हो रही हैं।
      • पिछले 30 मिलियन वर्षों में अरेबियन प्लेट धीरे-धीरे अफ्रीका से दूर हो रही है, जिसके कारण पहले से ही लाल सागर और अदन की खाड़ी का निर्माण हुआ है।
  • संभावित परिणाम:
    • चूँकि सोमाली और नूबियन टेक्टोनिक प्लेटें एक-दूसरे से अलग हो रही हैं, इसलिये इस दरार से एक छोटे महाद्वीप का निर्माण हो जाएगा, जिसमें वर्तमान सोमालिया, केन्या, इथियोपिया एवं तंजानिया के कुछ हिस्से शामिल होंगे। 
    • अदन की खाड़ी और लाल सागर अंतत: इथियोपिया के अफार क्षेत्र और पूर्वी अफ्रीकी भ्रंश घाटी में बाढ़ लाकर एक नए महासागर का निर्माण करेंगे।
      • इस नए महासागर के परिणामस्वरूप पूर्वी अफ्रीका अपनी अद्वितीय भौगोलिक और पारिस्थितिक विशेषताओं के साथ एक अलग छोटा महाद्वीप बन जाएगा।
    • सोमाली और न्युबियन विवर्तनिक प्लेटों के अलग होने से नया महासागर बेसिन बनाने में 5 से 10 मिलियन वर्ष लगेंगे।
  • वर्तमान स्थिति: 
    • हालाँकि कुछ समय से भ्रंशन की प्रक्रिया हो रही है, संभावित विखंडन वर्ष 2018 में दुनिया भर में तब चर्चा में आया जब केन्याई भ्रंश घाटी में बड़ी दरार देखी गई। 

इस भ्रंशन के अवसर और चुनौतियाँ:  

  • अवसर: 
    • नई तटरेखाओं के उभरने से देशों में आर्थिक विकास के असंख्य अवसर (जैसे- युगांडा और जाम्बिया जैसे लैंडलॉक देश) उपलब्ध होंगे, क्योंकि इसके कारण इन देशों की व्यापार के लिये नए बंदरगाहों तक पहुँच होगी, साथ ही मत्स्यन क्षेत्र और इंटरनेट बुनियादी ढाँचा भी उपलब्ध हो पाएगा। 
  • चुनौतियाँ :  
    • विस्थापन और पर्यावास का नुकसान: समुदायों का विस्थापन, बस्तियों और विभिन्न वनस्पतियों एवं जीवों के निवास स्थान का नुकसान जैसी पर्यावरणीय क्षति का सामना करना पड़ेगा।
      • लोगों की निकासी और जीवन की संभावित हानि इस प्राकृतिक घटना का एक अनपेक्षित परिणाम होगा।
      • विस्थापन और पर्यावरण पर संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2015 तक अफ्रीका में 15 मिलियन से अधिक लोग आंतरिक रूप से विस्थापित हुए थे।  
    • प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव: तेज़ी से हो रहे शहरीकरण और बस्तियों में वृद्धि प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव डालती हैं जिससे जल, ऊर्जा और भोजन की उपलब्धता की समस्या उत्पन्न होती है।  
      • अनियंत्रित अपशिष्ट निपटान भी एक गंभीर चिंता का विषय है।
    • नए फाॅल्ट लाइन्स: न्युबियन और सोमाली प्लेटों के अलग होने से नए फाॅल्ट लाइन्स, दरारें बन सकती हैं अथवा पहले से मौजूद फाॅल्ट लाइनें पुनर्सक्रिय हो सकती हैं, जिससे भूकंपीय गतिविधियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।

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भ्रंश: 

  • पृथ्वी के लिथोस्फीयर को कई टेक्टाॅनिक प्लेटों में विभाजित किया गया है जो एक-दूसरे की तुलना में अलग-अलग गति से चलती हैं।
    • विवर्तनिक बल न केवल प्लेटों को गति प्रदान करता है बल्कि इस बल के कारण उनमें दरार पड़ने की भी संभावना होती है, जिससे संभावित रूप से नई प्लेट सीमाओं का निर्माण होता है।
  • भ्रंश एक भूगर्भीय प्रक्रिया है जिसमें एक एकल टेक्टाॅनिक प्लेट दो या दो से अधिक प्लेटों में विभक्त हो जाती है जो अपसारी प्लेट सीमाओं से अलग होती हैं।
    • इस प्रक्रिया के कारण समतल निचले भूमि  क्षेत्र (Lowland Region) का उद्भव होता है जिसे रिफ्ट घाटी के रूप में जाना जाता है।
    • उदाहरण: नर्मदा दरार घाटी (भारत), बैकाल दरार घाटी (रूस)।

ग्रेट रिफ्ट वैली:  

  • द ग्रेट रिफ्ट वैली एक विशाल भूवैज्ञानिक संरचना है जो उत्तरी सीरिया से लेकर पूर्वी अफ्रीका के मध्य मोज़ाम्बिक तक लगभग 6,400 किलोमीटर तक विस्तृत है।
  • जॉर्डन नदी इस घाटी से निकलती है और अंततः इज़रायल तथा जॉर्डन के बीच की सीमा पर मृत सागर में मिल जाती है।
  • अदन की खाड़ी दरार की पूर्व की ओर निरंतरता में है और इस बिंदु से दरार दक्षिण-पूर्व की ओर हिंद महासागर के मध्य-महासागरीय रिज के हिस्से के रूप में फैली हुई है।
  • पूर्वी अफ्रीका में घाटी पूर्वी दरार और पश्चिमी दरार में विभाजित होती है। पश्चिमी दरार, जिसे अल्बर्टीन दरार के रूप में भी जाना जाता है, में दुनिया की कुछ सबसे गहरी झीलें हैं।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, पिछले वर्ष के प्रश्न  

प्रश्न. नर्मदा नदी पश्चिम की ओर बहती है, जबकि अधिकांश अन्य बड़ी प्रायद्वीपीय नदियाँ पूर्व की ओर बहती हैं। क्यों? (2013)

  1. यह एक रेखीय दरार घाटी में स्थित है।
  2. यह विंध्य और सतपुड़ा के बीच बहती है।
  3. भूमि का ढाल मध्य भारत से पश्चिम की ओर है।

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1  
(b) केवल 2 और 3 
(c) केवल 1 और 3  
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं

उत्तर: (a) 

स्रोत: डाउन टू अर्थ  

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