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जीव विज्ञान और पर्यावरण

चीन ने हटाया वन्यजीवों के व्यापार से प्रतिबंध (China Lifts Ban on Trade of Tiger Bones and Rhino Horns)

  • 03 Nov 2018
  • 6 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में चीन ने बाघ की हड्डियों और गैंडे के सींग के वैज्ञानिक और चिकित्सा उपयोग पर लगाए गए 25 वर्षीय प्रतिबंध को हटा लिया है।

प्रमुख बिंदु

  • संरक्षणवादियों के मुताबिक, इस प्रतिबंध को हटाने का परिणाम लुप्तप्राय प्रजातियों के लिये विश्व स्तर पर विनाशकारी होगा।
  • उल्लेखनीय है कि पारंपरिक चीनी दवा (TCM) में बाघ की हड्डी और गैंडे के सींग का उपयोग किया जाता है और इस दवा को अनिद्रा तथा गठिया के इलाज के लिये उपयोग किया जाता है।

पृष्ठभूमि

  • बाघ के हिस्सों को आधिकारिक TCM फार्माकोपिया, जो कि चीन के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा नियंत्रित एक सूची है, से हटा दिया गया,जब देश ने पहली बार वर्ष 1993 में बाघ के शरीर के विभिन्न हिस्सों के व्यापार पर प्रतिबंध लगा दिया था।
  • वर्ष 2010 में बीजिंग में स्थापित एक अंतर्राष्ट्रीय गैर-लाभकारी चीनी चिकित्सा सोसाइटीज के विश्व फेडरेशन ने अपने सदस्यों से बाघ के हिस्सों या अन्य लुप्तप्राय वन्यजीवों के हिस्सों का उपयोग रोकने आग्रह किया।
  • चीन ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शासन के दौरान, वन्यजीवन और प्राकृतिक संसाधनों के लिये कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू करने और स्वयं को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के रूप में प्रदर्शित करने की मांग की।
  • वर्ष 2016 में, चीन ने हाथीदाँत की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था क्योंकि गले के कैंसर के इलाज के लिये हाथी के शिकार किये जाने की घटनाएँ शिकार बढ़ गई थीं।
  • हालाँकि, इस अधिक कठोर नियम से चीनी सरकार दवा निर्माता कम्पनियाँ के बीच संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
  • इसके अलावा, उच्च जीवन स्तर हेतु पशु भागों की चीनी मांग में वृद्धि हुई है, जो उनकी जीवन-विस्तारित शक्तियों के लिये मूल्यवान है।

भारत की चिंता

  • असम में अधिकारी और वन्यजीव संरक्षणवादी राज्य के एक सींग वाले गैंडों पर हानिकारक प्रभाव को लेकर चिंतित हैं क्योंकि चीन ने गैंडे के सींग और बाघ की हड्डी के उत्पादों के उपयोग और व्यापार पर 25 वर्षीय प्रतिबंध हटा लिया है।
  • नवीनतम आँकड़ों के मुताबिक, असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में एक सींग वाले गैंडों की संख्या 2,413 हैं और इनमें से पाँच गैंडे वर्ष 2018 में शिकारियों के हाथों मारे गए। चिंता की मुख्य वज़ह यह है कि यहाँ से शिकार किये गए से गैंडे के सींग चीन के बाज़ारों में 'कानूनी' उत्पादों के रूप में बदल जाएंगे और यह ऐसे उत्पादों के लिये बाज़ार खोलने का अप्रत्यक्ष तरीका है।
  • इससे गैंडे के शिकारियों और तस्करी करने वालों को बढ़ावा मिलेगा, जो कि अपने अवैध उत्पादों को चीन में कानूनी रूप से स्वीकार्य उत्पादों के तौर पर भेजने की आशा के साथ अपनी गतिविधियों में वृद्धि का प्रयास कर सकते हैं।
  • कई शोध और अध्ययन पत्रों ने उल्लेख किया है कि असम से शिकार किये गए गैंडों के सींग म्याँमार के माध्यम से चीन भेजे जाते हैं। वर्ष 2017 में आईयूसीएन की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि म्याँमार का शान राज्य एक कुख्यात वन्यजीव तस्करी केंद्र है जिसके माध्यम से चीन में गैंडे के सींग ले जाए जाते हैं।
  • वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड ने चीन से प्रतिबंध बनाए रखने को कहा है क्योंकि ऐसा व्यापार वैश्विक स्तर पर विनाशकारी परिणाम देगा।

प्रकृति संरक्षण हेतु विश्वव्यापी कोष (Worldwide Fund for Nature-WWF)

  • WWF का गठन वर्ष 1961 में हुआ तथा यह पर्यावरण के संरक्षण, अनुसंधान एवं रख-रखाव संबंधी विषयों पर कार्य करता है।
  • इससे पूर्व, इसका नाम विश्व वन्यजीव कोष (World Wildlife fund) था।

उद्देश्य

  • आनुवंशिक जीवों और पारिस्थितिक विभिन्नताओं का संरक्षण करना।
  • यह सुनिश्चित करना कि नवीकरण योग्य प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग पृथ्वी के सभी जीवों के वर्तमान और भावी हितों के अनुरूप हो रहा है।
  • प्रदूषण, संसाधनों और उर्जा के अपव्ययी दोहन और खपत को न्यूनतम स्तर पर लाना।
  • हमारे ग्रह पर प्राकृतिक पर्यावरण के बढ़ते अवक्रमण को रोकना और अंततः इस प्रक्रिया को पलट देना तथा एक ऐसे भविष्य के निर्माण में सहायता करना जिसमें मानव प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित कर रह सके।

 

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