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असंगठित क्षेत्र पर COVID-19 का प्रभाव

  • 30 Apr 2020
  • 7 min read

प्रीलिम्स के लिये:

अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक संघ, COVID-19

मेन्स के लिये:

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर COVID-19 के प्रभाव, असंगठित क्षेत्र और भारतीय अर्थव्यवस्था  

चर्चा में क्यों?

हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक संघ (International Labour Organization-ILO) द्वारा जारी की गई एक रिपोर्ट के अनुसार, COVID-19 के कारण वर्तमान में विश्व की आधी श्रमिक आबादी के लिये अपनी आजीविका खोने का खतरा बन गया है।

मुख्य बिंदु:   

  • वर्तमान में विश्व की कुल श्रमिक आबादी (लगभग 3.3 बिलियन) में से लगभग 2 बिलियन श्रमिक असंगठित क्षेत्र (Informal Sector) में कार्य करते हैं। 
  • COVID-19 की शुरुआत के पहले महीने में ही इन श्रमिकों की मज़दूरी में 60% तक की गिरावट देखी गई थी और वर्ष 2020 की दूसरी तिमाही में लगभग 1.6 बिलियन श्रमिकों के लिये अपनी आजीविका खोने की स्थिति बन गई है।
  • ILO प्रमुख के अनुसार, यह आँकड़े दर्शाते हैं कि वर्तमान में वैश्विक बेरोज़गारी संकट और इसके दुष्परिणाम ILO द्वारा तीन सप्ताह पहले जारी किये गए अनुमान से भी अधिक गहराते जा रहे हैं।

अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक संघ

(International Labour Organization-ILO): 

  • अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक संघ की स्थापना वर्ष 1919 में प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति के पश्चात ‘वर्साय संधि’ (Treaty of Versailles) के तहत की गई थी 
  • यह संस्था वैश्विक स्तर पर श्रमिकों के अधिकारों को प्रोत्साहित करने और श्रम तथा रोज़गार से जुड़े मूद्दों पर संवाद स्थापित करने एवं सामाजिक संरक्षण आदि क्षेत्रों में कार्य करती है।
  • ILO का मुख्यालय जेनेवा (स्विट्ज़रलैंड) में स्थित है और वर्तमान में विश्व के 187 देश इस संगठन के सदस्य है।     

वैश्विक बेरोज़गारी:

  • COVID-19 के तीव्र प्रसार के कारण उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका बुरी तरह प्रभावित हुए है परंतु इस महामारी से यूरोप में भी अनुबंधित श्रमिकों और स्वरोज़गार से जुड़े लोगों की आजीविका प्रभावित हुई है।
  • ILO के अनुमान के अनुसार, वर्ष 2020 की दूसरी तिमाही में अमेरिकी महाद्वीप और विश्व के अन्य हिस्सों में भी श्रमिकों के काम के घंटों/समय (Working Hours) में भारी गिरावट देखी जा सकती है।
  • इसके परिणामस्वरूप अमेरिकी महाद्वीप और अफ्रीका के देशों में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की आय में 81% तक की गिरावट हो सकती है, साथ ही एशिया-प्रशांत क्षेत्र के देशों में 21.6% और यूरोप तथा मध्य एशिया में यह गिरावट 70% तक हो सकती है।

कारण: 

  • ILO के अनुसार, COVID-19 की महामारी के कारण विश्व के विभिन्न भागों में 43.6 करोड़ से अधिक व्यवसाय गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं। 
  • इनमें से लगभग 23.2 करोड़ थोक/होलसेल (Whole Sale) और खुदरा व्यवसाय, 11.1 विनिर्माण क्षेत्र, 5.1 करोड़ आवास तथा खाद्य सेवाओं एवं 4.2 करोड़ रियल स्टेट (Real State) व अन्य व्यवसायों से जुड़े हैं।
  • COVID-19 की महामारी को रोकने के लिये विश्व के अधिकांश देशों में लागू लॉकडाउन के कारण यातायात और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े रोज़गार गंभीर रूप से प्रभावित हुए है।  

भारत पर प्रभाव: 

  • वर्ष 2018 के आँकड़ों के अनुसार, भारतीय श्रमिकों में लगभग 81% असंगठित क्षेत्र से जुड़े हुए थे और इनमें से एक बड़ी आबादी उन अकुशल श्रमिकों की है जो दैनिक मज़दूरी पर काम करते हैं। 
  • हालाँकि वर्तमान में भारत में COVID-19 की महामारी के प्रभाव पश्चिमी देशों की तुलना में काफी कम रहे हैं, परंतु देशभर में लागू लॉकडाउन के कारण सभी क्षेत्रों में कामगारों की आय प्रभावित हुई है।
  • देश में विभिन्न क्षेत्रों के उद्योगों का मुनाफा स्थानीय व्यवसाय के साथ अन्य देशों में होने वाले निर्यात पर निर्भर करता है परंतु वैश्विक अर्थव्यवस्था पर COVID-19 के प्रभाव के कारण बाज़ार में मांग की कमी से निर्यात पर आश्रित व्यवसायों को काफी क्षति हुई है।  
  • COVID-19 के कारण शहरों में काम करने वाले प्रवासी मज़दूरों को रोज़गार न मिलने और  यातायात तथा मंडियों के पूर्ण रूप से सक्रिय न रहने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गंभीर क्षति होने का अनुमान है।  

समाधान: 

  • ILO के अनुसार, सरकारों को वर्तमान रोज़गार संकट को देखते हुए तात्कालिक रूप से सहायता उपलब्ध करनी चाहिये। 
  • इसके तहत सरकारों द्वारा विशेष रूप से छोटे उद्यमों, असंगठित क्षेत्र और अन्य कमज़ोर क्षेत्रों के श्रमिकों तथा व्यवसायों को सहयोग प्रदान करने के लिये लक्षित एवं आवश्यकता अनुरूप उपयुक्त प्रयास किये जाने चाहिये। 
  • इस आर्थिक चुनौती से सीख लेते हुए सरकारों को बदलते समय और श्रमिकों की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए औद्योगिक गतिविधियों और अर्थव्यवस्था में आवश्यक परिवर्तन करने चाहिये।

स्रोत: द हिंदू

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