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प्रसार भारती का संकट

  • 24 Feb 2018
  • 9 min read

चर्चा में क्यों?
पिछले काफी समय से सरकारी नियंत्रण वाली प्रसारण संस्था प्रसार भारती संकट के दौर से गुज़र रही है। हाल की कुछ घटनाओं से स्पष्ट होता है कि प्रसार भारती बोर्ड और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के बीच सत्ता संघर्ष का मुद्दा दिनोंदिन तूल पकड़ता जा रहा है। प्रसार भारती बोर्ड एवं उसकी निगरानी में संचालित चैनल तकनीकी तौर पर केंद्र सरकार से पूरी तरह स्वतंत्र हैं। इसके बावजूद सत्ता-संघर्ष का मुद्दा बेहद गंभीर स्थति की ओर इशारा करता है।
कुछ समय पहले ही प्रसार भारती बोर्ड द्वारा यह दावा किया गया कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से बोर्ड को दूरदर्शन और आकाशवाणी के अनुबंधित कर्मचारियों को सेवा से मुक्त करने का आदेश दिया गया। इस आदेश के अनुपालन पर बोर्ड द्वारा आपत्ति जताई गई है।  

  • इसके अतिरिक्त, बोर्ड के अंतर्गत एक नए सदस्य की नियुक्ति का मुद्दा भी विवाद का कारण बना हुआ है। दरअसल, बोर्ड में एक नए सदस्य को नियुक्त जाना था, परंतु सदस्य के रूप में एक भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी को नामित कर दिया गया। 
  • विवाद यह है कि जिस पद के लिये उक्त प्रशासनिक अधिकारी को नामित किया गया, नियमानुसार उस पद पर प्रसार भारती के कर्मचारी को नियुक्त किया जाना चाहिये था। स्पष्ट रूप से बोर्ड द्वारा इस निर्णय के संबंध में विरोध प्रकट किया गया है।
  • दरअसल, उस सदस्य का चयन प्रसार भारती के उपाध्यक्ष के नेतृत्व वाली एक समिति की खोज प्रक्रिया के बाद किया जाना था। ऐसे में बोर्ड का कहना है कि एक पदस्थ नौकरशाह की नियुक्ति करना प्रसार भारती अधिनियम का उल्लंघन है।

चैनलों की नीलामी का मामला 

  • सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा दिये गए एक आदेश के अनुसार, दूरदर्शन की नि:शुल्क डिश सेवा में दिखाए जाने वाले चैनलों की आगे नीलामी नहीं की जानी चाहिये। आपको बता दें कि इस प्रकार की नीलामी से तकरीबन 300 करोड़ रुपए आते हैं।
  • बोर्ड का मानना था कि यह नीलामी बंद करने से प्रसार भारती की वित्त व्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। 
  • इसके अतिरिक्त, बोर्ड एवं सरकार के मध्य विवाद का एक अन्य मुद्दा मंत्रालय द्वारा दो पत्रकारों को ऐसे वेतन पर नियुक्त करने का प्रस्ताव देना है, जो कि अन्य पत्रकारों के वेतन की तुलना में बहुत ज़्यादा था।

प्रसार भारती का महत्त्व

  • प्रसार भारती के रूप में एक सरकारी प्रसारक की आवश्यकता इसलिये है ताकि इसके माध्यम से खबरों का सही रूप में प्रसारण किया जा सके और ऐसी विश्वसनीय जानकारी मुहैया कराई जा सके जो देश के तमाम हिस्सों तक पहुँचे।
  • परंतु वर्तमान समय में यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि प्रसार भारती मुख्य प्रसारक की इस भूमिका को सही रूप में निभा पा रहा है अथवा नहीं।
  • इसका कारण यह है कि वर्तमान में इसकी भूमिका सत्ता प्रतिष्ठान के हितों की रक्षा करने तक ही सिमट कर रह गई है। ऐसे में उत्तरदायित्वों का सटीक निर्वाह कर पाना संभव है या नहीं, इस पर अभी तक संशय बना हुआ है।
  • इस समस्त प्रकरण में सवाल यह उठता है कि क्या सरकार को वाकई सरकारी स्वामित्व वाले किसी चैनल की आवश्यकता है?
  • चूँकि भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (Telecom Regulatory Authority of India - TRAI) का यह कहना है कि राज्य सरकारों के स्वयं के चैनल नहीं हो सकते हैं क्योंकि इससे कई प्रकार की बाधाएँ उत्पन्न होने की संभावनाएँ हैं।
  • जैसा कि हम सभी जानते हैं कि सरकार में रहते हुए कॉन्ग्रेस और जनता दल दोनों को स्वायत्त निगम के दर्ज़े को कायम रखने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा था क्योंकि वे नहीं जानते थे कि इसकी सीमा क्या होनी चाहिये।
  • दोनों दलों की सरकारों ने वरिष्ठ भारतीय सूचना अधिकारियों की नियुक्ति समाचारों और अन्य सेवाओं की निगरानी करने के लिये की, जबकि प्रसार भारती को पहले ही स्वायत्त घोषित किया जा चुका था।
  • विदित हो कि इसके सी.ई.ओ. भी एक प्रशासनिक अधिकारी ही हैं। स्पष्ट है कि यह समय निजी अथवा सरकारी के विवाद में पड़ने का नहीं है बल्कि यह स्वायत्तता के दिखावे की समाप्ति करने तथा आधिकारिक प्रसारक की ख्याति को बचाए रखने का समय है।

प्रसार भारती अधिनियम, 1990

  • प्रसार भारती अधिनियम, 1990 के अनुसार रेडियो एवं दूरदर्शन का प्रबंधन एक निगम द्वारा किया जाएगा, जिसे एक 15 सदस्यीय बोर्ड द्वारा संचालित किया जाएगा।
  • बोर्ड में एक अध्यक्ष, एक कार्यकारी सदस्य, एक कार्मिक सदस्य, छह अंशकालिक सदस्य, एक-एक पदेन महानिदेशक (आकाशवाणी एवं दूरदर्शन के लिये), सूचना और प्रसारण मंत्रालय का एक प्रतिनिधि तथा दो अन्य प्रतिनिधियों का प्रावधान किया गया।
  • इसके अध्यक्ष एवं अन्य सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाएगी।
  • अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, प्रसार भारती बोर्ड सीधे संसद के प्रति उत्तरदायी होगा और वर्ष में एक बार अपनी वार्षिक रिपोर्ट को संसद के समक्ष प्रस्तुत करेगा।

दो समितियों का गठन

  • अधिनियम के अंतर्गत प्रसार भारती बोर्ड की स्वायत्तता हेतु दो समितियों- ‘संसद समिति’ और ‘प्रसार भारती परिषद समिति’ के गठन का भी प्रावधान किया गया।
  • ‘संसदीय समिति’ के अंतर्गत लोसभा के 15 एवं राज्सभा के 7 सदस्य शामिल होंगे, जबकि ‘प्रसार भारती परिषद समिति’ के अंतर्गत राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त 11 सदस्यों को शामिल किया जाएगा।

प्रसार भारती के उद्देश्य

  • देश की एकता एवं अखंडता तथा संविधान में वर्णित लोकतंत्रात्मक मूल्यों को बनाए रखना।
  • सार्वजनिक हित के सभी मामलों की उचित एवं संतुलित रूप में सत्य तथा निष्पक्ष जानकारी जनता को उपलब्ध कराना।
  • शिक्षा एवं साक्षरता की भावना का प्रचार-प्रसार करना।
  • विभिन्न भारतीय संस्कृतियों एवं भाषाओं में समाचारों का प्रसारण सुनिश्चित करना।
  • महिलाओं की वास्तविक स्थिति एवं समस्याओं पर प्रकाश डालना ताकि समाज को इस विषय में अधिक-से-अधिक जागरूक बनाया जा सके।
  • युवा वर्ग की आवश्यकताओं के संबंध में ध्यानाकर्षित करना।
  • छुआछूत, असमानता एवं शोषण जैसी सामाजिक बुराइयों का विरोध करना तथा सामाजिक न्याय को प्रोत्साहन प्रदान करना।
  • बच्चों एवं श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करना।
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