इंदौर शाखा: IAS और MPPSC फाउंडेशन बैच-शुरुआत क्रमशः 6 मई और 13 मई   अभी कॉल करें
ध्यान दें:

डेली न्यूज़


जैव विविधता और पर्यावरण

कोसी नदी प्रणाली में अस्थिरता

  • 02 Jun 2022
  • 9 min read

प्रिलिम्स के लिये:

कोसी नदी प्रणाली, अस्थिरता, जलवायु परिवर्तन, ब्रह्मपुत्र नदी। 

मेन्स के लिये:

नदी की अस्थिरता के कारण और परिणाम तथा आगे की राह। 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में एक शोध अध्ययन में बताया गया है कि कोसी नदी के दोनों ओर तटबंधों के निर्माण के बाद से अस्थिरता देखी गई है। 

नदी प्रणाली अस्थिरता: 

  • परिचय: 
    • नदी प्रणाली अस्थिरता नदी के प्रवाह के दौरान परिवर्तन की घटना को संदर्भित करती है जिसके अंतर्गत पुरानी स्थापित नदी प्रणाली के स्थान पर एक नई नदी प्रणाली का निर्माण होता है। 
  • घटना: 
    • उष्णकटिबंधीय और मरुस्थलीय क्षेत्रों की नदियाँ के अस्थिर होने की अधिक संभावना रहती है। 
    • ऐसी घटना बहुत ही कम होती है, एक दशक या एक सदी में एक बार, या उससे भी कम। 
    • बार-बार होने वाली चरम मौसम की घटनाओं और समुद्र के स्तर में वृद्धि के निरंतर प्रभाव की तुलना में उनके विनाशकारी प्रभावों के बावजूद अस्थिरता की घटना दुर्लभ है। 

शोध के प्रमुख निष्कर्ष: 

  • वैश्विक परिदृश्य: 
    • 1973-2020 के सैटेलाइट चित्रों और ऐतिहासिक नक्शों के अनुसार, दुनिया भर में 113 नदी प्रणाली अस्थिरता की घटनाएँ दर्ज की गई हैं। 
    • 33 उदाहरणों में अपुष्ट घाटियों या खुले समुद्रों पर प्रवाहित होते समय नदियाँ पर्वतीय आधारों में अपना मार्ग बदल देती हैं। 
      • कोसी नदी भी इसी श्रेणी में आती है। 
    • यह परिवर्तन डेल्टा क्षेत्रों में भी हो सकता है। एक पश्चजल क्षेत्र के साथ नदी का यह हिस्सा नीचे की ओर समुद्र के प्रभाव के कारण अलग तरह से प्रवाहित होता है। 
    • दुनिया के कुछ सबसे बड़े जलमार्गों, जैसे कि ओरिनोको, येलो, नील और मिसिसिपी नदी इसके उदाहरण हैं। 
    • 30 मामलों में अत्यधिक तलछट भार वाली नदियों में उफान आया। नदी के तल तलछट से भरे होने के कारण बाढ़ के दौरान नदियाँ नए चैनलों की तलाश करती हैं। 
  • कोसी नदी  केस-स्टडी: 
    • कोसी जैसी प्रणालियाँ हिमालय से बहुत अधिक तलछट लाती हैं। 1950 के दशक में नदी के दोनों ओर तटबंध बनाए जाने के बाद यह और अधिक अस्थिर हो गई। 
    • वर्ष 2008 में एक बड़ी बाढ़ ने कोसी नदी को अपने स्थापित पुराने मार्ग को छोड़ने के लिये मजबूर कर दिया। इसके कारण 3 मिलियन लोग विस्थापित हुए तथा 250 से अधिक लोगों की मृत्यु हो गई। 
    • कोसी नदी का उफान प्राकृतिक नहीं है। तटबंध-निर्माण से पहले नदी जिस 200 किमी क्षेत्र में तलछट वितरित करती थी, उसे अब घटाकर 10 किमी कर दिया गया है। 
    • हालांँकि तलछट-प्रवाह के मार्ग में कोई बदलाव नहीं आया है, लेकिन इसके संचलन के लिये उपलब्ध क्षेत्र संकुचित हो गया है। 
    • तटबंधों जैसे अस्थायी समाधान के कारण ही सुरक्षा की झूठी धारणा पैदा होती है। क्योंकि ये सुरक्षा के बजाय प्राकृतिक तलछट फैलाव को सीमित करके नदी प्रणाली को  नकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं। 

कोसी नदी प्रणाली: 

  • कोसी एक सीमा-पार नदी है जो तिब्बत, नेपाल और भारत से होकर प्रवाहित होती है। 
  • इसका स्रोत तिब्बत में है जिसमें दुनिया की सबसे ऊँचाई पर स्थित भू-भाग शामिल है; इसके बाद यह गंगा के मैदानों में उतरने से पहले नेपाल के एक बड़े भाग से प्रवाहित होती है। 
  • इसकी तीन प्रमुख सहायक नदियाँ- सूर्य कोसी, अरुण और तैमूर हिमालय की तलहटी से कटी हुई 10 किमी की घाटी के ठीक ऊपर एक बिंदु पर मिलती हैं। 
  • यह नदी भारत के उत्तरी बिहार में कटिहार ज़िले के कुर्सेला के पास गंगा में मिलने से पहले कई शाखाओं में बँट जाती है। 
  • भारत में ब्रह्मपुत्र के बाद कोसी में अधिकतम मात्रा में गाद और रेत पाई जाती है।  
  • इसे "बिहार का शोक" के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि वार्षिक बाढ़ लगभग 21,000 वर्ग किमी. क्षेत्र को प्रभावित करती है। उपजाऊ कृषि भूमि के कारण ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। 

Kosi-River

आगे की राह 

  • दुनिया भर में लगभग 330 मिलियन लोग नदी डेल्टा क्षेत्र में निवास करते हैं और इससे भी अधिक नदी के गलियारों में रहते हैं। इसलिये यह समझने का समय आ गया है कि जलवायु परिवर्तन और मानवजनित हस्तक्षेप नदी की गतिशीलता को कैसे प्रभावित कर रहे हैं।  
  • जलवायु परिवर्तन और नदी के उच्छेदन के बीच संबंध को समझने के लिये एक पूर्ण वैश्विक तस्वीर खींची जानी चाहिये।  
  • बाढ़ से बचाव के लिये नदियों के किनारे बनाए गए तटबंधों/बाधाओं की भूमिका को इसकी अस्थिरता के संबंध में समझा जाना चाहिये। 
  • नदियों के अतिरिक्त चैनल बनाने के लिये विभिन्न इंजीनियरिंग हस्तक्षेपों को नियोजित किया जा सकता है। यह चैनलों में जल और तलछट के प्रवाह को वितरित करके बाढ़ एवं  नदी मार्ग परिवर्तन को रोकेगा। 

विगत वर्ष के प्रश्न: 

प्रश्न. निम्नलिखित में से कौन-सी ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी/नदियाँ है/हैं? (2016) 

  1. दिबांग
  2. कामेंग
  3. लोहित

नीचे दिये गए कूट का उपयोग कर सही उत्तर का चयन कीजिये: 

(a) केवल 1  
(b) केवल 2 और 3 
(c) केवल 1 और 3 
(d) 1, 2 और 3 

उत्तर: (d)  

व्याख्या: 

  • ब्रह्मपुत्र बेसिन तिब्बत (चीन), भूटान, भारत और बांग्लादेश देशों में फैला हुआ है। भारत में यह अरुणाचल प्रदेश, असम, पश्चिम बंगाल, मेघालय, नगालैंड और सिक्किम राज्यों में फैला हुआ है। 
  • ब्रह्मपुत्र नदी उत्तर में हिमालय की कैलाश पर्वतमाला से कोंगगुत्शो झील के दक्षिण में 5,150 मीटर की ऊंँचाई से निकलती है और लगभग 2,900 किमी तक प्रवाहित होती है। यह नामचा बरवा (अरुणाचल प्रदेश) में भारत में प्रवेश करती है और 916 किमी तक प्रवाहित होती है। 
  • दाहिनी ओर से मिलने वाली प्रमुख सहायक नदियाँ कामेंग, सुबनसिरी, मानस, संकोश और तीस्ता हैं, जबकि लोहित, दिबांग, बूढ़ी दिहिंग, देसांग, दिखो, धनसिरी बाईं ओर से इसमें मिलती हैं। अत: 1, 2 और 3 सही हैं। 
  • अतः विकल्प (d) सही उत्तर है। 

स्रोत: डाउन टू अर्थ 

close
एसएमएस अलर्ट
Share Page
images-2
images-2
× Snow