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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

सीईपीए: भारत-यूएई

  • 23 Sep 2021
  • 6 min read

प्रिलिम्स के लिये:

व्यापक आर्थिक सहयोग तथा भागीदारी समझौते, बौद्धिक संपदा अधिकार

मेन्स के लिये:

भारत-यूएई आर्थिक एवं अन्य संबंध

चर्चा में क्यों?   

हाल ही में भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने औपचारिक रूप से भारत-यूएई व्यापक आर्थिक सहयोग तथा भागीदारी समझौते (CEPA) पर वार्ता शुरू की।

  • वर्ष 2017 में हस्ताक्षरित व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत दोनों देशों द्वारा की गई प्रगति को आगे बढ़ाने के लिये दोनों देशों ने पारस्परिक रूप से लाभप्रद आर्थिक समझौते तक पहुंँचने की इच्छा व्यक्त की।

UAE

प्रमुख बिंदु 

  • व्यापक आर्थिक सहयोग तथा भागीदारी समझौता (CEPA):
    • यह एक प्रकार का मुक्त व्यापार समझौता है जिसमें सेवाओं एवं निवेश के संबंध में व्यापार और आर्थिक साझेदारी के अन्य क्षेत्रों पर बातचीत करना शामिल है। यह व्यापार सुविधा और सीमा शुल्क सहयोग, प्रतिस्पर्द्धा  तथा बौद्धिक संपदा अधिकारों जैसे क्षेत्रों पर बातचीत किये जाने पर भी विचार कर सकता है।
    • साझेदारी या सहयोग समझौते मुक्त व्यापार समझौतों की तुलना में अधिक व्यापक हैं।
    • CEPA व्यापार के नियामक पहलू को भी देखता है और नियामक मुद्दों को कवर करने वाले एक समझौते को शामिल करता है।
    • भारत ने दक्षिण कोरिया और जापान के साथ CEPA पर हस्ताक्षर किये हैं।
  • भारत-यूएई आर्थिक संबंध:
    • वर्ष 2019-2020 में संयुक्त अरब अमीरात द्विपक्षीय व्यापार के साथ भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार रहा है, जिसका मूल्य 59 बिलियन अमेरिकी डाॅलर है।
    • संयुक्त अरब अमीरात अमेरिका के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य भी है, जिसका निर्यात वर्ष 2019-2020 में लगभग 29 बिलियन अमेरिकी डाॅलर था।
    • यूएई भारत में आठवांँ सबसे बड़ा निवेशक है, जिसने अप्रैल 2000 और मार्च 2021 के बीच 11 बिलियन अमेरिकी डाॅलर का निवेश किया है, जबकि यूएई में भारतीय कंपनियों द्वारा 85 बिलियन अमेरिकी डाॅलर से अधिक का निवेश किये जाने का अनुमान है।
    • प्रमुख निर्यात: पेट्रोलियम उत्पाद, कीमती धातुएंँ, पत्थर, रत्न और आभूषण, खनिज आदि।
    • प्रमुख आयात: पेट्रोलियम और पेट्रोलियम उत्पाद, कीमती धातु, पत्थर, रत्न और आभूषण, खनिज आदि।
  • भारत-यूएई सीईपीए का महत्त्व:
    • यह हस्ताक्षरित समझौते के पाँच वर्षों के भीतर वस्तुओं में द्विपक्षीय व्यापार को 100 बिलियन अमेरिकी डाॅलर तक बढ़ाने तथा सेवाओं के क्षेत्र में व्यापार को बढ़ाकर 15 बिलियन अमेरिकी डाॅलर करने की संभावना व्यक्त करता है, जिससे दोनों देशों में व्यापक सामाजिक और आर्थिक अवसर सृजित होंगे।

अन्य प्रकार के व्यापारिक समझौते

  • मुक्त व्यापार समझौता (FTA):
    • यह एक ऐसा समझौता है जिसे दो या दो से अधिक देशों द्वारा भागीदार देश को तरजीही व्यापार समझौतों, टैरिफ रियायत या सीमा शुल्क में छूट आदि प्रदान करने के उद्देश्य से किया जाता है।
    • भारत ने कई देशों के साथ FTA पर बातचीत की है जैसे श्रीलंका और विभिन्न व्यापारिक ब्लॉकों से आसियान के मुद्दे पर।
  • अधिमान्य या तरजीही व्यापार समझौता (PTA):
    • इस प्रकार के समझौते में दो या दो से अधिक भागीदार कुछ उत्पादों के संबंध में प्रवेश का अधिमान्य या तरजीही अधिकार देते हैं। यह टैरिफ लाइनों की एक सहमत संख्या पर शुल्क को कम करके किया जाता है।
    • यहाँ तक कि PTA में भी कुछ उत्पादों के लिये शुल्क को घटाकर शून्य किया जा सकता है। भारत ने अफगानिस्तान के साथ एक PTA पर हस्ताक्षर किये हैं।
  • व्यापक आर्थिक सहयोग समझौता (CECA):
    • व्यापक आर्थिक सहयोग समझौता (CECA ) आमतौर पर केवल व्यापार शुल्क और टैरिफ-रेट कोटा (TRQ) दरों को  बातचीत के माध्यम से तय करता है। यह CECA जितना व्यापक नहीं है। भारत ने मलेशिया के साथ CECA पर हस्ताक्षर किये हैं।
  • द्विपक्षीय निवेश संधियाँ (BIT):
    • यह एक द्विपक्षीय समझौता है जिसमें दो देश एक संयुक्त बैठक करते हैं तथा दोनों देशों के नागरिकों और फर्मों/कंपनियों द्वारा निजी निवेश के लिये नियमों एवं शर्तों को तय किया जाता है।
  • व्यापार और निवेश फ्रेमवर्क समझौता (TIFA):
    • यह दो या दो से अधिक देशों के बीच एक व्यापार समझौता है जो व्यापार के विस्तार और देशों के बीच मौजूदा विवादों को हल करने के लिये एक रूपरेखा तय करता है।

स्रोत: पीआईबी

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