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हल्दी की नई किस्में

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  • 23 Sep 2021
  • 6 min read

प्रिलिम्स के लिये:

राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान, सीआईएम-पीताम्बर, केशरी किस्म, केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान

मेन्स के लिये:

हल्दी की नई किस्मों का महत्त्व

चर्चा में क्यों?   

हाल ही में ओडिशा के नबरंगपुर (आकांक्षी ज़िलों में से एक) में हल्दी की उच्च उपज देने वाली करक्यूमिनोइड-समृद्ध सीआईएम-पीताम्बर (CIM-Pitamber) और राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (National Botanical Research Institute- NBRI) द्वारा विकसित केशरी किस्म (Keshari Variety) पेश की गई है।

प्रमुख बिंदु 

  •  सीआईएम-पीताम्बर:
    •  सीआईएम-पीताम्बर के बारे में:
      • यह केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (CIMAP) द्वारा विकसित हल्दी की एक उच्च उपज देने वाली करक्यूमिनोइड-समृद्ध (Curcuminoid-Rich) किस्म है।
        • बीजों की उच्च उपज देने वाली किस्मों (High yielding varieties- HYV) में वे बीज आते हैं जो बड़ी मात्रा में फसलों विशेषकर गेहूंँ और चावल का उत्पादन करते हैं।
        • इन बीजों के उपयोग के लिये पानी की नियमित आपूर्ति, उर्वरकों का अधिकतम उपयोग और सही अनुपात में कीटनाशकों का उपयोग आवश्यक है।
      • इस किस्म में हल्दी के अन्य मौजूदा किस्मों की तुलना में करक्यूमिनोइड तत्त्व 12.5% अधिक होता है।
        • करक्यूमिनोइड हल्दी से प्राप्त होने वाला एक पदार्थ है जिसमें कैंसर-रोधी गुण, शरीर की सूजन को कम करने का गुण, एंटी-एजिंग, मधुमेह-रोधी और कई अन्य औषधीय गुण विद्यमान हैं।
    • लाभ:
      • यह हल्दी की मौजूदा किस्मों की तुलना में 50% अधिक उपज देने में सक्षम  है जो किसानों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने में मददगार साबित हो सकती है। यह हल्दी में पत्ती धब्बा रोग (Leaf Blotch Disease of Turmeric) के प्रति भी सहिष्णु है।
      • करक्यूमिनोइड (Curcuminoid) की उच्च मात्रा वाली हल्दी यूरोपीय देशों और उत्तरी अमेरिका द्वारा पसंद की जाती है। करक्यूमिन की अधिक मात्रा होने पर इसका निर्यात और बिक्री मूल्य अधिक होगा।
  • केशरी किस्म:
    • यह सर्दियों के दौरान कम तापमान और पाले के प्रति सहनशील है। अन्य किस्मों की तुलना में इसकी वृद्धि अवधि लंबी होती है, जो उच्च गुणवत्ता की उच्च ताज़ा प्रकंद उपज (Fresh Rhizome Yield) देती है।
    • मौजूदा अन्य किस्मों की तुलना में इस किस्म में सर्दियों के दौरान पत्तियों के पीले होने और गिरने की समस्या कम उत्पन्न होती है, जिससे इस किस्म की जीवन अवधि (Life Period) बढ़ जाती है।
    • इसमें करक्यूमिनोइड की कुल मात्रा लगभग 1.16% है, जो उत्तर भारत में की जाने वाली अन्य मौजूदा हल्दी की खेती की किस्मों से भी अधिक है।
  • हल्दी:
    • हल्दी एक पुष्पीय पौधा है, यह जिंजर फेमिली से संबंधित है जिसका वानस्पतिक नाम करकुमा लोंगा (Curcuma Longa ) है, इसका उपयोग धार्मिक समारोहों के अलावा मसाला, डाई, दवा और कॉस्मेटिक के रूप में भी किया जाता है।
    • इसका पीला रंग मुख्य रूप से करक्यूमिन (Curcumin) नामक एक चमकीले पीले फेनोलिक यौगिक (Phenolic Compound) के कारण होता है।
    • भारत विश्व में हल्दी का एक प्रमुख उत्पादक और निर्यातक देश है जो वैश्विक स्तर पर हल्दी का 80% उत्पादन करता है।
      • वर्ष 2018 में तेलंगाना, भारत में हल्दी का प्रमुख उत्पादक राज्य था। महाराष्ट्र और तमिलनाडु उस वर्ष रैंकिंग में दूसरे और तीसरे स्थान पर थे।
    • इसे समुद्र तल से 1500 मीटर की ऊँचाई, विभिन्न उष्णकटिबंधीय परिस्थितियाँ, 20-350 डिग्री  तापमान,1500 मिमी या उससे अधिक की वार्षिक वर्षा तथा बरसाती या सिंचित परिस्थितियों में उगाया जा सकता है।

केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (CIMAP)

  • CIMAP, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) की एक अग्रणी पादप अनुसंधान प्रयोगशाला है जिसे वर्ष 1959 में ‘केंद्रीय भारतीय औषधीय पादप संगठन’ (Central Indian Medicinal Plants Organisation- CIMPO) के रूप में स्थापित किया गया था।  
  • यह जैविक और रासायनिक विज्ञान में बहु-विषयक उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान का संचालन कर रहा है और औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती करने वाले किसानों और उद्यमियों तक प्रौद्योगिकियों और सेवाओं का विस्तार कर रहा है।
  • इसका मुख्यालय लखनऊ में है।

राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान

यह 1953 में स्थापित CSIR के घटक अनुसंधान संस्थानों में से एक है। इसका मुख्यालय लखनऊ में है।

यह वनस्पति विज्ञान के विभिन्न पहलुओं पर बुनियादी और अनुप्रयुक्त अनुसंधान करता है, जिसमें प्रलेखन, संरक्षण और आनुवंशिक सुधार शामिल है।

स्रोत: द हिंदू 

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