प्रारंभिक परीक्षा
भारत के उपराष्ट्रपति की श्रीलंका यात्रा
चर्चा में क्यों?
भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने श्रीलंका की दो दिवसीय यात्रा पर गए, जो किसी भारतीय उपराष्ट्रपति की द्वीपीय देश की पहली यात्रा है।
- भारत ने प्रवासी भारतीय नागरिकता (OCI) के विस्तार की घोषणा की, साथ ही ऊर्जा सहयोग, व्यापार और मछुआरों की चिंताओं जैसे प्रमुख द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की।
भारत के उपराष्ट्रपति की श्रीलंका यात्रा के मुख्य बिंदु क्या हैं?
- OCI कार्ड पात्रता का विस्तार: भारत ने श्रीलंका में भारतीय प्रवासियों की पाँचवीं और छठी पीढ़ी के लिये OCI योजना का विस्तार किया है।
- पूर्व में OCI कार्ड पात्रता का विस्तार चौथी पीढ़ी तक सीमित था, यह कदम विशेष रूप से भारतीय मूल के तमिल (मलैयाहा तमिल) समुदाय को लाभान्वित करेगा।
- प्रशासनिक बाधाओं को कम करने के लिये आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा। OCI कार्ड अब श्रीलंकाई सरकार द्वारा प्रदान किये गए दस्तावेज़ों और प्रमाण-पत्रों के आधार पर जारी किये जाएंगे।
- विकास सहायता और आवास: चर्चाओं में भारतीय आवास परियोजना के तृतीय चरण के तहत घरों की अंतिम किस्त के हस्तांतरण पर प्रकाश डाला गया, जो श्रीलंका में 50,000 घरों के निर्माण के लिये 2010 में भारत द्वारा की गई प्रतिबद्धता का हिस्सा है।
- त्रिंकोमाली ऊर्जा केंद्र: दोनों देशों ने त्रिंकोमाली ज़िले में 'ऊर्जा केंद्र' विकसित करने की तात्कालिकता पर बल दिया, जिसमें द्वितीय विश्वयुद्ध-युग के तेल टैंक फार्मों के विकास के साथ-साथ दक्षिण भारत और श्रीलंका को जोड़ने वाली एक प्रस्तावित ईंधन पाइपलाइन शामिल है।
- यह पहल अप्रैल 2025 में भारत, श्रीलंका और UAE के बीच त्रिंकोमाली विकास के लिये हस्ताक्षरित त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन के बाद हुई है।
- मछुआरा विवाद: नेताओं ने पाक जलडमरूमध्य में मछली पकड़ने वाले समुदायों की आजीविका को संतुलित करते हुए विवादास्पद मछुआरों के मुद्दे को मानवीय दृष्टिकोण के माध्यम से संबोधित करने पर सहमति व्यक्त की।
- चक्रवात दितवा राहत: श्रीलंका ने चक्रवात दितवा के बाद प्रदान किये गए 450 मिलियन अमेरिकी डॉलर के पुनर्वास और राहत पैकेज, विशेष रूप से भारत की त्वरित सहायता के लिये गहरी कृतज्ञता व्यक्त की और क्षेत्रीय संकटों के दौरान एक विश्वसनीय "प्रथम उत्तरदाता" के रूप में भारत के उभरने की प्रशंसा की।
ओवरसीज़ सिटिज़न ऑफ़ इंडिया (OCI) योजना क्या है?
- पृष्ठभूमि: भारत ने भारतीय प्रवासियों के लिये उच्च-स्तरीय समिति की सिफारिशों के आधार पर नागरिकता अधिनियम, 1955 में संशोधन के माध्यम से दिसंबर 2005 में प्रवासी भारतीय नागरिकता (OCI) योजना शुरू की और इसे औपचारिक रूप वर्ष 2006 में प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन के दौरान दिया गया था।
- यह योजना विदेशी नागरिकता रखने वाले भारतीय मूल के व्यक्तियों (PIO) को दीर्घकालिक निवास और यात्रा विशेषाधिकार प्रदान करती है।
- बाद में, प्रवासी जुड़ाव को सुव्यवस्थित करने के लिये PIO योजना को वर्ष 2015 में OCI के साथ मिला दिया गया।
- पात्रता: भारत सरकार किसी व्यक्ति को प्रवासी भारतीय नागरिक (OCI) के रूप में पंजीकृत कर सकती है यदि वह एक विदेशी नागरिक है जो 26 जनवरी, 1950 को या उसके बाद भारतीय नागरिक था या उस क्षेत्र से संबंधित था जो 15 अगस्त, 1947 के बाद भारत का हिस्सा बन गया या उस समय भारतीय नागरिकता के लिये पात्र था।
- पात्रता में उनके बच्चे, पोते-पोतियाँ और परपोते/परपोतियाँ भी शामिल हैं, साथ ही ऐसे नाबालिग बच्चे भी जिनके कम-से-कम एक माता-पिता भारतीय हैं। इसके अलावा भारतीय नागरिकों या OCI धारकों (बशर्ते विवाह कम-से-कम दो वर्षों से पंजीकृत हो) के जीवनसाथी भी पात्र हैं।
- महत्त्वपूर्ण अपवाद: कोई व्यक्ति, जिसके माता-पिता, दादा-दादी या परदादा-परदादी में से कोई भी वर्तमान में या पहले पाकिस्तान या बांग्लादेश का नागरिक रहा हो, वह OCI पंजीकरण के लिये पूर्णतः अपात्र है।
- मुख्य लाभ: OCI कार्डधारकों को भारत की यात्रा के लिये आजीवन वैध, बहु-प्रवेश और बहु-उद्देशीय वीज़ा प्राप्त होता है।
- उन्हें अपनी भारत में रहने की अवधि की परवाह किये बिना फॉरेन रीज़नल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (FRRO) के पास पंजीकरण कराने से कानूनी छूट प्राप्त होती है।
- NRI के साथ समानता: उन्हें आर्थिक, वित्तीय और शैक्षिक क्षेत्रों में अनिवासी भारतीयों (NRIs) के समान अधिकार और सुविधाएँ प्राप्त होती हैं।
- हालाँकि वे कृषि भूमि, फार्महाउस या बागान संपत्ति का अधिग्रहण नहीं कर सकते।
- OCI की सीमाएँ:
- दोहरी नागरिकता नहीं: OCI को दोहरी नागरिकता नहीं माना जाता, यह किसी भी प्रकार के राजनीतिक अधिकार प्रदान नहीं करता।
- सार्वजनिक रोज़गार: उन्हें सार्वजनिक रोज़गार के मामलों में समान अवसर (अनुच्छेद 16) का अधिकार प्राप्त नहीं होता।
- निर्वाचन राजनीति: OCI धारक जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत मतदाता के रूप में पंजीकरण नहीं करा सकते और वे संसद या राज्य विधानसभाओं के चुनाव लड़ने के लिये भी पात्र नहीं होते।
- संवैधानिक पद: वे राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित होने के लिये अयोग्य होते हैं तथा उन्हें सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त नहीं किया जा सकता।
- OCI रद्दीकरण: यदि OCI पंजीकरण धोखाधड़ी, गलत प्रस्तुति या तथ्यों को छिपाकर प्राप्त किया गया हो, या यदि व्यक्ति भारत के संविधान के प्रति असंतोष प्रदर्शित करता है, तो उसका OCI पंजीकरण रद्द किया जा सकता है।
- इसे युद्ध के दौरान शत्रु के साथ अवैध संचार या व्यापार के मामलों में भी रद्द किया जा सकता है या यदि पंजीकरण के पाँच वर्षों के भीतर व्यक्ति को दोषी ठहराकर दो वर्ष या उससे अधिक की कारावास की सज़ा सुनाई गई हो।
- इसके अलावा भारत की संप्रभुता, अखंडता, सुरक्षा या अन्य देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों के हित में भी OCI रद्द किया जा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. OCI योजना क्या है?
यह एक ऐसी योजना है जो नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत भारतीय मूल के व्यक्तियों को आजीवन वीज़ा और निवास संबंधी लाभ प्रदान करती है।
2. क्या OCI दोहरी नागरिकता के बराबर है?
नहीं, OCI राजनीतिक अधिकार या पूर्ण नागरिकता प्रदान नहीं करता, यह केवल सीमित आर्थिक और यात्रा संबंधी सुविधाएँ देता है।
3. OCI के लिये कौन पात्र नहीं है?
पाकिस्तान या बांग्लादेश से संबंध रखने वाले व्यक्ति OCI पंजीकरण के लिये पात्र नहीं हैं।
4. OCI के मुख्य लाभ क्या हैं?
आजीवन वीज़ा FRRO में पंजीकरण से छूट तथा आर्थिक और शैक्षिक क्षेत्रों में NRIs के समान सुविधाएँ।
5. OCI किस आधार पर रद्द किया जा सकता है?
इसे धोखाधड़ी, राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों, आपराधिक दोषसिद्धि या राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये खतरे की स्थिति में रद्द किया जा सकता है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
प्रिलिम्स
प्रश्न. भारत के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2021)
- भारत में केवल एक ही नागरिकता और एक ही अधिवास है।
- जो व्यक्ति जन्म से नागरिक हो, केवल वही राष्ट्राध्यक्ष बन सकता है।
- जिस विदेशी को एक बार नागरिकता दे दी गई है, किसी भी परिस्थिति में उसे इससे वंचित नहीं किया जा सकता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 3
(d) 2 और 3
उत्तर: (a)
रैपिड फायर
मलेरिया नियंत्रण के लिये जीन ड्राइव का उपयोग
हालिया एक शोध से यह ज्ञात हुआ है कि जीन ड्राइव तकनीक के माध्यम से विकसित, आनुवंशिकतः रूपांतरित, मच्छर वास्तविक परिस्थितियों में मलेरिया के संचरण को प्रभावी रूप से कम कर सकते हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर मलेरिया नियंत्रण के क्षेत्र में सफलता की संभावना उत्पन्न होती है।
- मलेरिया संबंधी चुनौती: मच्छरदानी और दवाओं जैसे हस्तक्षेपों के बावज़ूद, मलेरिया विश्व भर में प्रतिवर्ष 5 लाख से अधिक मौतों का कारण बनता है, जो दवा और कीटनाशक प्रतिरोध से और भी जटिल हो गया है।
- मलेरिया एक वेक्टर-जनित संक्रामक रोग है, जो प्लाज्मोडियम परजीवी के कारण होता है और संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छरों के काटने से मनुष्यों में फैलता है।
- परजीवी मच्छर के काटने से रक्तप्रवाह में प्रवेश करता है, परिपक्व होने के लिये यकृत तक जाता है और फिर लाल रक्त कोशिकाओं को संक्रमित करता है, जिससे संचरण चक्र जारी रहता है।
- जीन ड्राइव: जीन ड्राइव एक आनुवंशिक तकनीक है, जो CRISPR-Cas9 जीन-एडिटिंग टूल का उपयोग करते हुए पारंपरिक वंशानुगति नियमों को दरकिनार कर देती है। वैज्ञानिकों ने ऐसा तंत्र विकसित किया है जिसमें रूपांतरित जीन स्वयं को साझेदार गुणसूत्र पर प्रतिलिपित कर लेता है, जिससे यह 90% से अधिक संतानों को हस्तांतरित हो जाता है।
- यह विशेषता को पीढ़ियों में तेज़ी से फैलने की अनुमति देता है।
- दो प्राथमिक आनुवंशिक रणनीतियाँ:
- संख्या को कम करना: यह दृष्टिकोण मादा मच्छर के विकास या प्रजनन क्षमता के लिये आवश्यक जीन (जैसे– डबलसेक्स जीन) को बाधित करता है, जिससे अंततः स्थानीय मच्छरों की संख्या कम हो जाती है।
- संख्या में सुधार (प्रतिस्थापन): यह रणनीति मच्छरों को जीवित रखती है, किंतु उन्हें इस तरह इंजीनियर करती है कि वे अपने मध्यांत्र में अणु (जैसे– प्रतिसूक्ष्मजीवी पेप्टाइड्स) उत्पन्न करें। इससे मलेरिया परजीवी का विकास रुक जाता है और यह मनुष्यों तक संचरण नहीं कर पाता।
- 'ट्रांसमिशन ज़ीरो' सफलता: तंजानिया में हुए अध्ययनों से पता चला है कि आनुवंशिक रूप से संशोधित मच्छर केवल प्रयोगशाला में ही नहीं, बल्कि वास्तविक मानव संक्रमणों से मलेरिया परजीवियों को रोक सकते हैं।
- चुनौतियाँ और आगे की राह: जीन ड्राइव एक स्टैंडअलोन समाधान नहीं हैं और इन्हें मौजूदा स्वास्थ्य प्रणालियों (टीके, मच्छरदानी, निगरानी) के साथ एकीकृत किया जाना चाहिये।
- संभावित पारिस्थितिक जोखिमों के कारण, अब तक किसी भी जीन-ड्राइव मच्छर को जंगल में नहीं छोड़ा गया है।
- भविष्य में तैनात करने के लिये कठोर पारिस्थितिक जोखिम आकलन, मज़बूत नियामक समीक्षा और गहन सामुदायिक जुड़ाव की आवश्यकता होती है।
रैपिड फायर
आओलेआंग महोत्सव
हाल ही में कोहिमा (नगालैंड) में कोन्याक समुदाय ने आओलेआंग त्योहार मनाया, जिसमें जीवंत जनजातीय संस्कृति और परंपराओं का प्रदर्शन किया गया।
- परिचय: आओलेआंग (आओलियांग मोन्यू) कोन्याक जनजाति का प्रमुख त्योहार है, जो प्रतिवर्ष अप्रैल के पहले सप्ताह (1-6 अप्रैल) में मनाया जाता है।
- यह पुराने वर्ष के अंत और खेतों में बुवाई के पूरा होने के बाद वसंत के आगमन के साथ नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक है।
- यह संपूर्ण नगालैंड में मनाया जाता है, विशेष रूप से मोन ज़िले में, साथ ही कोहिमा में किसामा हेरिटेज विलेज में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किये जाते हैं।
- कृषि और आनुष्ठानिक महत्त्व: यह एक पूर्व-फसल त्योहार है, जहाँ समुदाय अच्छे स्वास्थ्य और भरपूर फसल के लिये सर्वशक्तिमान से आशीर्वाद मांगता है। उत्सव के दौरान झूम कृषि वाले खेतों में प्रसाद और प्रतीकात्मक प्रथाओं का पालन किया जाता है, जो कृषि और प्रकृति के साथ जनजातीय संबंध को दर्शाती हैं।
- त्योहार का प्रारूप: इस त्योहार को छह दिनों तक मनाया जाता है, प्रत्येक दिन का अलग सांस्कृतिक महत्त्व होता है। शुरुआती दिनों में शिकार, भोजन सामग्री का संग्रह और तैयारियाँ शामिल होती हैं। मुख्य उत्सवों में दावतें, लोक गीत, नृत्य और सामुदायिक समारोह शामिल होते हैं और बाद के दिनों में आनुष्ठानिक दावतें और पूर्वजों का स्मरण शामिल होता है। त्योहार के अंतिम दिन में घरों और गाँव में सफाई की जाती है, जो त्योहार के समापन को दर्शाता है।
- सांस्कृतिक तत्त्व और समुदाय की भूमिका: त्योहार में पारंपरिक परिधान, आभूषण, नृत्य और सामुदायिक दावत शामिल होती है। यह सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने, सामाजिक बंधनों को सुदृढ़ करने और परंपराओं को युवा पीढ़ी तक पहुँचाने के लिये एक महत्त्वपूर्ण संस्था के रूप में कार्य करता है।
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रैपिड फायर
भारत समुद्री बीमा पूल
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘भारत समुद्री बीमा पूल’ (BMI Pool) के गठन को मंज़ूरी दी है, जो एक घरेलू बीमा पूल होगा और इसमें ₹12,980 करोड़ की संप्रभु गारंटी दी जाएगी, ताकि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच निरंतर और किफायती समुद्री बीमा कवरेज सुनिश्चित किया जा सके।
- उद्देश्य: विदेशी बीमाकर्त्ताओं जैसे इंटरनेशनल ग्रुप ऑफ प्रोटेक्शन एंड इंडेम्निटी क्लब्स पर निर्भरता कम करना, समुद्री व्यापार की निरंतरता बनाए रखना और भू-राजनीतिक अस्थिरता के समय प्रतिबंधों के प्रभाव से निपटने की क्षमता तथा संप्रभु नियंत्रण को मज़बूत करना।
- व्यापक जोखिम कवरेज: यह पूल मुख्य समुद्री जोखिमों को कवर करता है, जिनमें जहाज़ और मशीनरी, कार्गो, युद्ध जोखिम तथा सुरक्षा और क्षतिपूर्ति समूह (P&I) शामिल हैं। इसमें तृतीय-पक्ष देनदारियाँ भी शामिल हैं, जैसे– तेल प्रदूषण, जहाज़ का मलबा हटाना, माल की क्षति और चालक दल की चोटें।
- पोत प्रयोज्यता: यह कवरेज भारतीय ध्वज वाले या भारतीय नियंत्रण वाले जहाज़ों के साथ-साथ उन सभी जहाज़ों के लिये प्रदान किया जाता है जो अंतर्राष्ट्रीय मूल से भारतीय बंदरगाहों तक (और इसके विपरीत) माल ले जा रहे हैं। इसमें अस्थिर समुद्री गलियारों से होकर गुज़रने वाले पारगमन भी शामिल हैं।
- परिचालन क्षमता: बीमा पॉलिसियाँ पूल के सदस्य बीमाकर्त्ताओं द्वारा जारी की जाएँगी, जो लगभग ₹950 करोड़ की संयुक्त विशेष समुद्री बीमा क्षमता का उपयोग करेंगे।
- इस पहल का उद्देश्य देश में ही विशेषीकृत विशेष समुद्री बीमा , दावा प्रबंधन और कानूनी विशेषज्ञता विकसित करना है, जो आत्मनिर्भर भारत के विज़न के साथ सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।
- महत्त्व: यह पहल आर्थिक सुरक्षा को मज़बूत करती है और समुद्री व्यापार की निरंतरता सुनिश्चित करती है, क्योंकि इससे विदेशी बीमाकर्त्ताओं पर निर्भरता घटती है। यह क्षेत्र भारत के 70% से अधिक व्यापार (मात्रा के आधार पर) और 95% (मूल्य के आधार पर) का संचालन करता है। साथ ही यह यूनाइटेड किंगडम, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में अपनाई जाने वाली सर्वोत्तम वैश्विक प्रथाओं के अनुरूप है।
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रैपिड फायर
IAF के लिये स्वदेशी 1000 किग्रा. का एरिअल बम
हाल ही में रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायु सेना (IAF) के लिये 1,000 किग्रा. के हवाई बम (Mk-84 के समान) के स्वदेशी डिज़ाइन और विकास की शुरुआत की है, जो वर्तमान में Mk-84 श्रेणी के सामान्य प्रयोजन बमों के आयात पर निर्भर है।
- उद्देश्य: इस परियोजना का लक्ष्य रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देना और विदेशी मूल के उपकरण निर्माताओं (OEMs) पर निर्भरता को कम करना है।
- कार्यान्वयन ढाँचा: यह परियोजना रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP), 2020 के तहत मेक-II (उद्योग-वित्तपोषित) मार्ग से क्रियान्वित की जा रही है, जिसके बाद “Buy” (भारतीय – स्वदेशी रूप से डिज़ाइन, विकसित और निर्मित) श्रेणी के अंतर्गत खरीद की जाएगी, जिससे विकास से खरीद तक स्पष्ट संबंध सुनिश्चित होता है।
- स्वदेशीकरण एवं भागीदारी: इस परियोजना में कम-से-कम 50% स्वदेशी सामग्री अनिवार्य है और यह भारतीय निजी उद्योग के लिये खुली है, जिसमें निर्धारित शर्तों के तहत प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, संयुक्त उपक्रम और विदेशी सहयोग के प्रावधान शामिल हैं।
- तकनीकी विशेषताएँ एवं अनुकूलता: यह बम एक उच्च-कैलिबर, प्राकृतिक विखंडन (फ्रैगमेंटेशन) युक्त आयुध होगा, जिसमें उच्च विस्फोटक प्रभाव और उल्लेखनीय अधिकतम ओवर-प्रेशर क्षमता होगी। इसे भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल रूसी और पश्चिमी मूल, दोनों ही प्रकार के विमानों के साथ पूरी तरह अनुकूल और क्रियाशील होने के लिए डिज़ाइन किया जाएगा।
- समय-सीमा: इस परियोजना को ‘एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट’ से लेकर अनुबंध के अंतिम रूप तक, परीक्षण और मूल्यांकन सहित, लगभग 2.5 वर्षों में पूरा किये जाने का अनुमान है।
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