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प्रिलिम्स फैक्ट्स

  • 17 May, 2021
  • 15 min read
प्रारंभिक परीक्षा

प्रिलिम्स फैक्ट: 17 मई, 2021

बसव जयंती

(Basava Jayanti)

भारतीय प्रधानमंत्री ने बसव जयंती के अवसर पर जगद्गुरु बसवेश्वर को श्रद्धांजलि अर्पित की।

  • नवंबर 2015 में भारत के प्रधानमंत्री ने लंदन की थेम्स नदी (लैम्बेथ) के किनारे बसवेश्वर की प्रतिमा का उद्घाटन किया।

Basava-Jayanti

प्रमुख बिंदु 

जन्म

  • उनका जन्म कर्नाटक में 1131 ई. में हुआ था।

परिचय

  • वह 12वीं सदी के एक महान भारतीय दार्शनिक, राजनेता और समाज सुधारक थे।
  • वह शिव-केंद्रित भक्ति आंदोलन में ‘लिंगायत संत’ और कल्याणी चालुक्य/कलचुरी वंश के शासनकाल के दौरान हिंदू शैव समाज सुधारक थे।
    • लिंगायत भारत में एक हिंदू संप्रदाय है, जो शिव को एकमात्र देवता के रूप में पूजता है। दक्षिण भारत में लिंगायत समुदाय का विशेष प्रभाव दिखाई पड़ता है।
  • उन्हें ‘भक्ति भंडारी’ (शाब्दिक रूप से ‘भक्ति के कोषाध्यक्ष’) या बसवेश्वर (भगवान बसव) के रूप में भी जाना जाता है।

योगदान

  • बसवन्ना ने ‘वचन’ नामक अपनी कविताओं के माध्यम से सामाजिक जागरूकता फैलाई।
  • विभिन्न महत्त्वपूर्ण लिंगायत कार्यों का श्रेय बसवन्ना को दिया जाता है, जिनमें शत-स्थल-वचन, कला-ज्ञान-वचन, मंत्र-गोप्य, घटना चक्र-वचन और राज-योग-वचन आदि शामिल हैं।
  • गौतम बुद्ध की तरह बसवन्ना ने भी आम जनमानस को एक तर्कसंगत सामाजिक व्यवस्था में आनंदपूर्वक जीने का तरीका सिखाया, जिसे बाद में ‘शरण आंदोलन’ के रूप में जाना जाने लगा।
  • शरण आंदोलन ने सभी जातियों के लोगों को आकर्षित किया और भक्ति आंदोलन के अधिकांश प्रकारों की तरह इसके तहत भी काफी महत्त्वपूर्ण साहित्य और वचनों की रचना की गई, जिसने ‘वीरशैव संतों’ के लिये आध्यात्मिक मार्ग प्रशस्त किया।
  • बसवा द्वारा स्थापित ‘अनुभव मंडप’ ने सामाजिक लोकतंत्र की नींव रखी।
  • बसव का मानना ​​था कि मनुष्य अपने जन्म से नहीं बल्कि समाज में अपने आचरण से महान बनता है।
  • उन्होंने ‘कार्य’ को पूजा और उपासना के रूप में रेखांकित करते हुए शारीरिक श्रम की गरिमा बनाए रखने पर ज़ोर दिया।

मृत्यु

  • उनकी मृत्यु 1167 ई. में हुई।

भक्ति आंदोलन

  • भक्ति आंदोलन तमिल क्षेत्र में शुरू हुआ और इसने अलवार (विष्णु के भक्त) तथा नयनार (शिव के भक्त), वैष्णव और शैव कवियों की कविताओं के माध्यम से काफी लोकप्रियता हासिल की।
  • ये संत धर्म को एक औपचारिक पूजा के रूप में नहीं देखते थे बल्कि वे पूजा करने वाले व्यक्ति और भगवान के बीच प्रेम पर आधारित एक प्रेम बंधन के रूप में देखते थे।
  • भक्ति आंदोलन मूल रूप से 9वीं शताब्दी में दक्षिण भारत में शंकराचार्य के साथ शुरू हुआ और  भारत के विभिन्न हिस्सों में फैला तथा 16वीं शताब्दी तक कबीर, नानक और श्री चैतन्य के साथ एक महान आध्यात्मिक शक्ति के रूप में उभरा।

पीएम किसान

(PM-KISAN)

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि’ (पीएम-किसान) के तहत वित्तीय लाभ की 8वीं किस्त जारी की है।

प्रमुख बिंदु

  • इस योजना के तहत, केंद्र सरकार द्वारा प्रतिवर्ष तीन समान किस्तों में 6,000 रुपए की राशि सीधे सभी भूमिधारक किसानों के बैंक खातों में स्थानांतरित की जाती है, भले ही उनकी जोत का आकार कुछ भी हो।
    • इसे फरवरी 2019 में लॉन्च किया गया था।
  • वित्तपोषण और क्रियान्वयन
    • यह योजना, भारत सरकार से 100 प्रतिशत वित्तपोषित एक केंद्रीय क्षेत्रक योजना है।
    • इसे कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा क्रियान्वित किया जा रहा है।
  • लाभार्थियों की पहचान
    • लाभार्थी किसान परिवारों की पहचान करने का समग्र दायित्त्व राज्य/केंद्रशासित प्रदेश की सरकारों को दिया गया है।
  • उद्देश्य
    • प्रत्येक फसल चक्र के अंत में प्रत्याशित कृषि आय के अनुरूप उचित फसल स्वास्थ्य और उचित पैदावार सुनिश्चित करने के लिये विभिन्न आदानों की खरीद में छोटे और सीमांत किसानों की वित्तीय ज़रूरतों को पूरा करना।
    • किसानों को कृषि संबंधी दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु साहूकारों के चंगुल में पड़ने से बचाना और खेती की गतिविधियों में उनकी निरंतरता सुनिश्चित करना।
  • पीएम किसान मोबाइल एप
    • बीते दिनों इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से ‘राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र’ (NIC) द्वारा विकसित और डिज़ाइन किया गया ‘पीएम-किसान मोबाइल एप’ लॉन्च किया गया है।
    • इस एप के माध्यम से किसान अपने आवेदन की स्थिति देख सकते हैं, अपडेट कर सकते हैं तथा अपने आधार कार्ड में सुधार कर सकते हैं, साथ ही इसके माध्यम से बैंक खातों में क्रेडिट की भी जाँच की जा सकती है।

विविध

Rapid Fire (करेंट अफेयर्स): 17 मई, 2021

मृणाल सेन

14 मई, 2021 को देश के मशहूर फिल्म निर्माता मृणाल सेन की 98वीं जयंती मनाई गई। मृणाल सेन का जन्म 14 मई, 1923 को अविभाजित भारत के फरीदपुर शहर (वर्तमान बांग्लादेश) में हुआ था। मृणाल सेन ने कलकत्ता के एक फिल्म स्टूडियो में ऑडियो टेक्नीशियन के रूप में की थी। मृणाल सेन ने अपनी पहली फीचर फिल्म वर्ष 1953 में बनाई थी। वर्ष 1958 में निर्मित उनकी फिल्म ‘नील आकाशेर नीचे’ (अंडर द ब्लू स्काई) स्वतंत्र भारत में प्रतिबंधित पहली भारतीय फिल्म थी। उन्होंने अधिकांशतः बंगाली और हिंदी में फिल्मों का निर्देशन किया। कला और फिल्म के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। भारत सरकार द्वारा उन्हें पद्मभूषण से, फ्रांँस की सरकार द्वारा ‘ऑर्ड्रे डेस आर्ट्स एट डेस लेटर्स’ से और रूस की सरकार द्वारा उन्हें ‘ऑर्डर ऑफ फ्रेंडशिप’ से सम्मानित किया गया। उन्हें दादा साहब फाल्के पुरस्कार से भी नवाज़ा गया था। भारतीय सिनेमा में ‘न्यू सिनेमा’ आंदोलन को शुरू करने वाले मृणाल सेन स्वयं को ‘निजी मार्क्सवादी’ के रूप में परिभाषित करते थे। 30 दिसंबर, 2018 को हृदय आघात के चलते 95 वर्ष की आयु में कोलकाता में उनका निधन हो गया। उनकी प्रमुख फिल्मों में- भुवन शोम, एक दिन प्रतिदिन, मृगया और आकाश कुसुम आदि शामिल हैं। 

शहीद सुखदेव

15 मई, 2021 को देश भर में प्रसिद्ध भारतीय क्रांतिकारी शहीद सुखदेव की जयंती मनाई गई। सुखदेव (1907-1931) उन प्रसिद्ध भारतीय क्रांतिकारियों में से एक थे, जिन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में ;महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। सुखदेव का जन्म 15 मई, 1907 को पंजाब के लुधियाना में हुआ था। अपने बचपन के दिनों में ही सुखदेव ने भारत पर ब्रिटिश राज द्वारा किये गए क्रूर अत्याचारों को देखा था, जिसने उन्हें क्रांतिकारी गतिविधियों में शामिल होने के लिये प्रेरित किया। सुखदेव, हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) के सदस्य थे। उन्होंने अन्य प्रसिद्ध क्रांतिकारियों के साथ लाहौर में 'नौजवान भारत सभा' ​​की भी शुरुआत की, जिसका प्राथमिक लक्ष्य युवाओं के बीच सांप्रदायिकता को समाप्त कर उन्हें स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लेने के लिये प्रेरित करना था। सुखदेव, भगत सिंह और शिवराम राजगुरु के सहयोगी थे, जो कि वर्ष 1928 में पुलिस उपाधीक्षक, जॉन सॉन्डर्स की हत्या में शामिल थे। नई दिल्ली में सेंट्रल असेंबली हॉल बम विस्फोट (8 अप्रैल, 1929) के बाद, सुखदेव और उनके सहयोगियों को गिरफ्तार कर लिया गया तथा उनके अपराध के लिये उन्हें दोषी ठहराया गया एवं मौत की सज़ा सुनाई गई। 23 मार्च, 1931 को तीन बहादुर क्रांतिकारियों- भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को ब्रिटिश सरकार द्वारा फांँसी दे दी गई। हालाँकि उनके जीवन ने अनगिनत युवाओं को प्रेरित किया और उनकी मृत्यु ने इन्हें एक मिसाल के रूप में कायम किया।

विश्व कृषि-पर्यटन दिवस

16 मई, 2021 को देश भर में 14वें विश्व कृषि-पर्यटन दिवस के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। विश्व कृषि-पर्यटन दिवस का लक्ष्य कृषि और पर्यटन क्षेत्र को एकीकृत कर किसानों की आय में बढ़ोतरी करना है। इस वर्ष विश्व कृषि-पर्यटन दिवस की थीम है- ‘कृषि पर्यटन के माध्यम से ग्रामीण महिला सतत् उद्यमिता के अवसर’। कृषि पर्यटन का आशय पर्यटन के उस रूप से है, जिसमें ग्रामीण संस्कृति को पर्यटक आकर्षण के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। यह पारिस्थितिकी पर्यटन के समान ही होता है, यद्यपि इसमें प्राकृतिक परिदृश्य के बजाय सांस्कृतिक परिदृश्य को शामिल किया जाता है। विशेषज्ञों की मानें तो कृषि पर्यटन में कृषि आय बढ़ाने और एक गतिशील, विविध ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास को प्रोत्साहित करने की महत्त्वपूर्ण क्षमता है। कई विकसित देशों में कृषि पर्यटन, पर्यटन उद्योग का एक अभिन्न अंग बन गया है। इसे कृषि तथा संबद्ध व्यवसाय के मूल्यवर्द्धन के रूप में देखा जा सकता है, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों को ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि एवं प्राकृतिक संसाधनों की बहु-क्रियाशील प्रकृति के इष्टतम लाभों का उपयोग करने में सक्षम बनाता है। महाराष्ट्र, देश में कृषि पर्यटन को विकसित करने और बढ़ावा देने वाला अग्रणी राज्य है। महाराष्ट्र में वर्ष 2005 में कृषि-पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये कृषि पर्यटन विकास निगम (ATDC) का गठन किया गया था। 

‘कोवैक्स’ पहल में शामिल होगा पंजाब

हाल ही में पंजाब सरकार ने कोविड-19 टीकों की कमी को देखते हुए वैश्विक ‘कोवैक्स’ (Covax) सुविधा में शामिल होने की घोषणा की है, हालाँकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि पंजाब, ‘कोवैक्स’ के माध्यम से वैक्सीन प्राप्त करने के लिये पात्र है अथवा नहीं। ‘कोवैक्स’ की शुरुआत कोविड-19 महामारी से निपटने और सुभेद्य तथा वंचित वर्ग तक वैक्सीन की पहुँच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अप्रैल 2020 में विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूरोपीय आयोग और फ्राँस के सहयोग से की गई थी। ‘कोवैक्स’ का सह-नेतृत्व गावी, WHO और ‘कोएलिशन फॉर एपिडेमिक प्रीपेयर्डनेस इनोवेशन्स’ (CEPI) द्वारा किया जा रहा है। ‘कोवैक्स’ पहल के तहत वैक्सीन के विकास के पश्चात् इस पहल में शामिल सभी देशों तक इसकी समान पहुँच सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है, साथ ही इसके तहत वर्ष 2021 के अंत तक 2 बिलियन खुराक के उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, जो अनुमानतः उच्च जोखिम और सुभेद्य लोगों तथा इस महामारी से निपटने के लिये तैनात स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा हेतु पर्याप्त होगा। ‘कोवैक्स’ पहल के तहत अब तक 122 देशों को 59 मिलियन वैक्सीन की खुराक उपलब्ध कराई गई है।


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