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प्रीलिम्स फैक्ट्स: 14 सितंबर, 2018 
Sep 14, 2018

⇒ न्‍यायमूर्ति रंजन गोगोई होंगे भारत के 46वें मुख्‍य न्‍यायाधीश
⇒ पहला आदिवासी परिपथ
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नेशनल स्‍कॉलरशिप पोर्टल मोबाइल एप
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हिंदी दिवस
⇒ फॉल आर्मीवार्म

न्‍यायमूर्ति रंजन गोगोई होंगे भारत के 46वें मुख्‍य न्‍यायाधीश

Ranjan-Gogoi

राष्‍ट्रपति ने न्‍यायमूर्ति रंजन गोगोई को भारत का अगला मुख्‍य न्‍यायाधीश नियुक्‍त किया है। वह देश के वर्तमान मुख्‍य न्‍यायाधीश न्‍यायमूर्ति दीपक मिश्रा के सेवानिवृत्‍त होने के बाद 3 अक्‍तूबर, 2018 को भारत के मुख्‍य न्‍यायाधीश का पद भार ग्रहण करेंगे। 

  • न्‍यायमूर्ति रंजन गोगोई का जन्‍म 18 नवंबर, 1954 को हुआ और वह 1978 में एक अधिवक्‍ता के रूप में नामांकित हुए। 
  • 28 फरवरी, 2001 को उन्हें गुवाहाटी उच्‍च न्‍यायालय में स्थायी न्‍यायाधीश नियुक्‍त किया गया। 
  • 9 सितंबर, 2010 को उनका स्थानांतरण पंजाब एवं हरियाणा उच्‍च न्‍यायालय में किया गया तथा 12 फरवरी, 2011 को उन्‍हें पंजाब एवं हरियाणा उच्‍च न्‍यायालय का मुख्‍य न्‍यायाधीश नियुक्‍त किया गया। 
  • 23 अप्रैल, 2012 को उन्‍हें भारत के सर्वोच्‍च न्‍यायालय के एक न्‍यायाधीश के रूप में नियुक्‍त किया गया।

भारत के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति

भारत के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति अन्य न्यायधीशों एवं उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की सलाह पर करता है।

मुख्य न्यायाधीश के लिये अर्हताएँ

  • उसे भारत का नागरिक होना चाहिये।
  • उसे किसी उच्च न्यायालय का कम-से-कम पाँच साल के लिये न्यायाधीश होना चाहिये या 
  • उसने उच्च न्यायालय या विभिन्न न्यायालयों में कुल मिलाकर 10 वर्ष तक वकील के रूप में कार्य किया हो या 
  • राष्ट्रपति के मत से उसे सम्मानित न्यायवादी होना चाहिये।

कार्यकाल

संविधान में उच्चतम न्यायालय के न्यायधीशों का कार्यकाल तय नहीं किया गया है लेकिन वह 65 वर्ष की आयु तक इस पद पर बना रह सकता है।

न्यायाधीश को पद से हटाना

  • वह राष्ट्रपति को लिखित त्यागपत्र दे सकता है।
  • संसद की सिफारिश पर राष्ट्रपति के आदेश द्वारा उसे पद से हटाया जा सकता है।
  • इस आदेश को संसद के दोनों सदनों का विशेष बहुमत (अर्थात् सदन की कुल सदस्यता का बहुमत तथा सदन में उपस्थित तथा मत देने वाले सदस्यों का दो-तिहाई) समर्थन प्राप्त होना चाहिये।
  • न्यायाधीश जाँच अधिनियम (1968) उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों को पद से हटाने के संबंध में महाभियोग की प्रक्रिया का उपबंध करता है।

पहला आदिवासी परिपथ

Swadesh-Darshan

छत्तीसगढ़ के गंगरेल में पहले ‘आदिवासी परिपथ’ विकास परियोजना की शुरुआत की गई। उल्लेखनीय है कि स्वदेश दर्शन योजना के तहत शुरू की जाने वाली यह देश की दूसरी परियोजना है। इस योजना के तहत शुरू की जाने वाली पहली परियोजना ‘पूर्वोत्तर सर्किट विकासः इम्फाल और खोंगजोंग’  परियोजना है।

  • 99.21 करोड़ रुपए की लागत वाली इस परियोजना को पर्यटन मंत्रालय ने फरवरी 2016 में मंज़ूरी प्रदान की थी। 
  • इस योजना के दायरे में छत्तीसगढ़ के जशपुर, कुंकुरी, माइनपत, कमलेशपुर, महेशपुर, कुरदार, सरोदादादर, गंगरेल, कोंडागाँव, नाथिया नवागाँव, जगदलपुर, चित्रकूट और तीर्थगढ़ शहर आते हैं।

स्वदेश दर्शन के बारे में

  • स्वदेश दर्शन पर्यटन मंत्रालय की सबसे अहम परियोजनाओं में से एक है जिसके अंतर्गत एक विषय पर आधारित पर्यटन परिपथों का योजनाबद्ध ढंग से विकास किया जाना है। 
  • इस योजना को 2014-15 में आरंभ किया गया था और अभी तक मंत्रालय ने 31 राज्यों एवं संघीय क्षेत्रों में 5997.47 करोड़ रुपए की लागत की 74 परियोजनाओं को मंज़ूरी दी है। 
  • आदिवासियों एवं आदिवासी संस्कृति के विकास पर पर्यटन मंत्रालय विभिन्न परियोजनाओं पर काम कर रहा है और स्वदेश दर्शन योजना के तहत इन क्षेत्रों में पर्यटन के ढांचे का विकास कर रहा है। 
  • आदिवासी परिपथ विषय के तहत मंत्रालय ने नगालैण्ड, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ में 381.47 करोड़ रुपए की लागत से 4 योजनाओं को मंज़ूरी दी है।

नेशनल स्‍कॉलरशिप पोर्टल मोबाइल एप

NSP-Mobile-App

हाल ही में केंद्रीय अल्‍पसंख्‍यक मामलों के मंत्रालय ने देश का पहला नेशनल स्‍कॉलरशिप पोर्टल मोबाइल एप (NSP Mobile App) लॉन्च किया।

  • ‘नेशनल स्‍कॉलरशिप पोर्टल मोबाइल एप’ निर्धन एवं कमज़ोर वर्ग के छात्रों को एक सुगम, आसान और बाधा मुक्‍त छात्रवृत्ति प्रणाली सुनिश्चित करेगा। 
  • सभी छात्रवृत्तियाँ नेशनल स्‍कॉलरशिप पोर्टल के माध्‍यम से प्रत्‍यक्ष लाभ हस्‍तांतरण (DBT) के तहत ज़रूरतमंद छात्रों  के बैंक खातों में सीधे दी जा रही हैं जिसने यह सुनिश्चित किया है कि दुहराव एवं राजस्व चोरी की कोई गुंजाइश न रहे।
  • नेशनल स्‍कॉलरशिप पोर्टल मोबाइल एप छात्रों के लिये लाभदायक साबित होगा एवं छात्रवृत्तियों हेतु एक पारदर्शी तंत्र को सुदृढ़ बनाने में सहायता करेगा।
  • छात्र अपने मोबाइल एप पर विभिन्‍न छात्रवृत्तियों के बारे में सभी प्रकार की सूचनाएँ प्राप्‍त कर सकेंगे, वे अपने घर में ही बैठकर छात्रवृत्तियों के लिये आवेदन कर सकेंगे, छात्र इस मोबाइल एप पर अपने लिये सभी आवश्‍यक दस्‍तावेज़ अपलोड कर सकेंगे, छात्र अपने आवेदन, छात्रवृत्तियों के संवितरण आदि की स्थिति की जानकारी भी ले सकेंगे। 
  • दूरदराज़ के क्षेत्रों, पहाड़ी क्षेत्रों, पूर्वोत्‍तर के छात्रों को इससे सबसे अधिक लाभ पहुँचेगा।

हिंदी दिवस

Hindi-Day

14 सितंबर को पूरे देश में हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। ध्यातव्य है कि विश्व हिंदी दिवस प्रतिवर्ष 10 जनवरी को मनाया जाता है। 

  • 14 सितंबर, 1949 को संविधान सभा द्वारा हिंदी को राजभाषा का दर्जा प्रदान किया गया था और संविधान के भाग-17 में इससे संबंधित महत्त्वपूर्ण प्रावधान किये गए।
  • इस दिन के ऐतिहासिक महत्त्व के कारण 1953 से राष्ट्रभाषा प्रचार समिति द्वारा प्रतिवर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस का आयोजन किया जाता है।
  • हिंदी को प्रोत्साहन देने की दृष्टि से इस दिवस के आयोजन का महत्त्वपूर्ण स्थान है। इस अवसर पर हिंदी के प्रोत्साहन हेतु कई पुरस्कार प्रदान किये जाते हैं, जैसे- राजभाषा कीर्ति पुरस्कार और राष्ट्रभाषा गौरव पुरस्कार। 
  • कीर्ति पुरस्कार ऐसे विभाग को दिया जाता है जिसने वर्षभर हिंदी में कार्य को बढ़ावा दिया हो, जबकि राष्ट्रभाषा गौरव पुरस्कार तकनीकी-विज्ञान लेखन हेतु दिया जाता है।

फॉल आर्मीवार्म

Spodoptera-Frugiperda

इस खरीफ सीज़न में कर्नाटक के किसानों के सामने फॉल आर्मीवार्म या स्पोडोप्टेरा फ्रुजाईपेर्डा (Spodoptera frugiperda) नामक एक नई समस्या ने दस्तक दी है। 

  • वर्तमान में यह कीट मक्का की फसल को नुकसान पहुँचा रहा है और वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यह कीट जल्दी ही अन्य क्षेत्रों में फ़ैल सकता है तथा दूसरी फसलों को भी नुकसान पहुँचा सकता है।
  • यह कीट भारतीय मूल का नहीं है। भारत में पहली बार इसकी उपस्थिति कर्नाटक में चिकबल्लापुर ज़िले के गौरीबिंदपुर के पास दर्ज की गई थी।
  • यह कीट आमतौर पर उत्तरी अमेरिका से लेकर कनाडा, चिली और अर्जेंटीना के विभिन्न हिस्सों में पाया जाता है।
  • वर्ष 2017 में इस कीट के दक्षिण अफ्रीका में फैलने के कारण वहाँ की फसलों को भारी नुकसान हुआ था।
  • ये कीट पहले पौधे की पत्तियों पर हमला करते हैं तथा इनके हमले के बाद पत्तियाँ ऐसी दिखाई देती हैं जैसे उन्हें कैंची से काटा गया हो।
  • ये कीट एक बार में 900-1000 अंडे दे सकते हैं।

स्रोत : द हिंदू, बिज़नेस लाइन एवं पी.आई.बी.


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