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जीव विज्ञान और पर्यावरण

वर्मी बायोडाइजेस्टर (Vermi Biodigestor)

  • 24 Jun 2019
  • 3 min read
  • वर्मी बायोडाइजेस्टर ग्रामीण भारत में जल-प्रदूषण को खत्म करने के लिये एक तकनीकी नवाचार है।
  • यह कृषि को लाभ का व्यवसाय तथा जैविक बनाकर सतत् एवं समावेशी विकास के लक्ष्य की प्राप्ति में भी सहायक है।
  • यह प्रौद्योगिकी घरों, गाँवों, कृषि एवं पशुपालन से प्राप्त जैव अपघटनीय अपशिष्टों को जैविक खादों व बायोगैस में परिवर्तित कर देती है।
  • वर्मी बायोडाइजेस्टर दो तकनीकों बायोडाइजेस्टर और वर्मी कंपोस्ट को एकीकृत करता है। यह ताज़ा गोबर, कृषि-जैव अपशिष्ट, नगरपालिका जैविक अपशिष्ट, खाद्य और सब्जी अपशिष्ट आदि जैसे बायोडिग्रेडेबल कचरे का उपभोग कर पुनर्चक्रण करता है।
  • यह वर्मी कंपोस्ट, वर्मीवाश और जीवामृत (जे.वी.वी. ट्रिनिटी) तथा बायोगैस का उत्पादन करता है।

जे.वी.वी. ट्रिनिटी

  • जे.वी.वी. ट्रिनिटी एक जैविक खाद होती है। यह खाद पूरी तरह से रासायनिक उर्वरकों के साथ-साथ कीटनाशकों की आवश्यकता को समाप्त करती है।
  • दो घनमीटर क्षमता वाला बायोडाइजेस्टर सालाना तौर पर लगभग 90 से 140 क्विंटल कचरे अपशिष्ट का उपभोग एवं पुर्नचक्रण करता है तथा इसके द्वारा प्रतिवर्ष लगभग 28,0000 रुपए मूल्य की जैविक खाद और केंचुओं का उत्पादन किया जाता है।
  • इसके अतिरिक्त इससे प्राप्त बायोगैस लगभग 17 टन CO2 गैस के समतुल्य होती है जिसकी कीमत लगभग 50 हज़ार रुपए तक होती है तथा इससे प्राप्त बायोगैस का उपयोग स्वच्छ एवं नवीकरणीय ईंधन के रूप में किया जाता है।
  • चूँकि ग्रामीण भारत में जल प्रदूषण मुख्य रूप से जैव-अपघटनीय कचरे और उर्वरकों के अपवाह के कारण होता है, इसलिये आर्थिक रूप से व्यवहार्य इस तकनीक के अंतर्गत ग्रामीण भारत में उत्पादित समस्त जैव-अपघटनीय अपशिष्टों का पुर्नचक्रण किया जा सकता है तथा इसके द्वारा जनित समस्त जल प्रदूषकों को समाप्त किया जा सकता है।
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