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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

GM फसलें

  • 10 Aug 2019
  • 5 min read

GM फसलें क्या है ?

  • जेनेटिक इजीनियरिंग के ज़रिये किसी भी जीव या पौधे के जीन को अन्य पौधों में डालकर एक नई फसल प्रजाति विकसित की जाती
  • जीएम फसल उन फसलों को कहा जाता है जिनके जीन को वैज्ञानिक तरीके से रूपांतरित किया जाता है।

GM फसलों के लाभ

  • यह बीज साधारण बीज से कहीं अधिक उत्पादकता प्रदान करता है।
  • इससे कृषि क्षेत्र की कई समस्याएँ दूर हो जाएंगी और फसल उत्पादन का स्तर सुधरेगा।
  • जीएम फसलें सूखा-रोधी और बाढ़-रोधी होने के साथ कीट प्रतिरोधी भी होती हैं।
  • जीएम फसलों की यह विशेषता होती है कि अधिक उर्वर होने के साथ ही इनमें अधिक कीटनाशकों की ज़रूरत नहीं होती।

जीएम फसलों के नुकसान

भारत में इन फसलों का विरोध करने के कई कारण हैं...

  • जीएम फसलों की लागत अधिक होती है, क्योंकि इसके लिये हर बार नया बीज खरीदना पड़ता है।
  • बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के एकाधिकार के कारण किसानों को महँगे बीज और कीटनाशक उनसे खरीदने पड़ते हैं।
    • इस समय हाइब्रिड बीजों पर ज़ोर दिया जा रहा है और अधिकांश हाइब्रिड बीज(चाहे जीएम हों अथवा नहीं) या तो दोबारा इस्तेमाल लायक नहीं होते और अगर होते भी हैं तो पहली बार के बाद उनका प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं होता।
    • इसे स्वास्थ्य, पर्यावरण तथा जैव विविधता के लिये हानिकारक माना जाता है।
    • भारत में इस प्रौद्योगिकी का विरोध करने वालों का कहना है कि हमारे देश में कृषि में काफी अधिक जैव विविधता है, जो जीएम प्रौद्योगिकी को अपनाने से खत्म हो जाएगी।

भारत में उपयोग की जा रही GM फसलें

BT कपास (एकमात्र उपयोग की जा रही GM फसल ),GM सरसों ,BT बैंगन (विवादित )।

वर्तमान संदर्भ

कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय (Ministry of Agriculture & Farmers Welfare) द्वारा लोकसभा में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, कृषि, सहकारिता और किसान कल्याण विभाग (Department of Agriculture, Cooperation and Farmers Welfare) ने राज्यों को BT बैंगन और HT कपास के प्रसार को नियंत्रित करने के लिये निर्देश जारी किये हैं।

विवाद

  • भारत में Bt कपास, जो कि एक GM फसल है, की शुरुआत काफी सफल किंतु विवादास्पद रही है। वर्ष 2002 में इसकी शुरुआत के बाद एक दशक में कपास का उत्पादन दुगुने से भी अधिक हो गया। लेकिन, इसी समय मूल्य निर्धारण एवं बौद्धिक संपदा अधिकारों के मुद्दे पर विवाद भी शुरू हो गया था।
  • Bt-बैंगन के विकास के लिये 2005 में महिको (अमेरिकन कृषि बायोटेक कंपनी मोनसेंटो की भारतीय सहयोगी कंपनी) ने दो विश्वविद्यालयों के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किये। दो विशेषज्ञ समितियों द्वारा जैव सुरक्षा द्वारा और क्षेत्र परीक्षणों के अध्ययन के बाद Bt-बैंगन को भारत के शीर्ष बायोटेक्नोलॉजी नियामक जेनेटिक इंजीनियरिंग एप्रेजल कमेटी (GEAC) ने 2009 में इसके वाणिज्यिक उत्पादन की मंज़ूरी दे दी। लेकिन इसके बाद में भारी विरोध को देखते हुए सरकार ने इसके उत्पादन को स्थगित कर दिया।
  • GM सरसों का प्रयोग भी विवादास्पद बना हुआ है।

GM फसलों से सम्बंधित विवादों का समाधान -

  • आनुवांशिक रूप से संशोधित सूक्ष्म जीवों और उत्पादों के कृषि में उपयोग को स्वीकृति प्रदान करने वाली जेनेटिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन समिति (GEAC) की शक्तियाँ बढ़ाई जाएँ तथा उसे निर्णय लेने हेतु और अधिक स्वायत्ता दी जाए।
  • जीएम फसलों को मंज़ूरी उनके सामाजिक-आर्थिक व स्वास्थ्य पर प्रभाव के मूल्यांकन के बाद ही दी जानी चाहिये।
  • GM फसलों को अपनाने वाले कृषकों के हितों की रक्षा हेतु उचित नीतियाँ अपनाई जानी चाहिये।
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