Celebrate the festival of colours with our exciting offers.
ध्यान दें:

टू द पॉइंट

भारतीय विरासत और संस्कृति

सैंधव वास्तुकला

  • 17 Dec 2018
  • 5 min read
  • सैंधव कला उपयोगितामूलक थी। सिंधु सभ्यता की सबसे प्रभावशाली विशेषता उसकी नगर निर्माण योजना एवं जल-मल निकास प्रणाली थी।
  • सिंधु सभ्यता की नगर योजना में दुर्ग योजना, स्नानागार, अन्नागार, गोदीवाड़ा, वाणिज्यिक परिसर आदि महत्त्वपूर्ण हैं।
  • हड़प्पा सभ्यता के समस्त नगर आयताकार खंड में विभाजित थे जहाँ सड़कें एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं। इसे ग्रिड प्लानिंग कहा जाता है।
  • हड़प्पा सभ्यता के नगरीय क्षेत्र के दो हिस्से थे- पश्चिमी टीला (Upper town) और पूर्वी टीला (Lower town)।
  • हड़प्पा काल में भवनों में पक्की और निश्चित आकार की ईंटों के प्रयोग के अलावा लकड़ी और पत्थर का भी प्रयोग होता था।
  • घर के बीचोंबीच बरामदा बनाया जाता था और मुख्य द्वार हमेशा घर के पीछे खुलता था।
  • घर के गंदे पानी की निकासी के लिये ढकी हुई नालियाँ बनाई गईं और इन्हें मुख्य नाले से जोड़कर गंदे पानी की निकासी की जाती थी।
  • जल-आपूर्ति व्यवस्था का साक्ष्य ‘धौलावीरा’ से मिला है जहाँ वर्षा जल को शुद्ध कर उसकी आपूर्ति की जाती थी।
  • हड़प्पा सभ्यता में दोमंजिला भवन हैं, सीढ़ियाँ हैं, पक्की-कच्ची ईंटों का इस्तेमाल है, किंतु गोलाकार स्तंभ और घर में खिड़की का चलन नहीं है।
  • हड़प्पा सभ्यता के नगरों में कहीं भी मंदिर का स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला।
  • हड़प्पा से प्राप्त विशाल अन्नागार, मोहनजोदड़ो का विशाल स्नानागार (39 × 23 × 8 फुट), अन्नागार व सभा भवन परिसर तथा लोथल (गुजरात) से प्राप्त व्यावसायिक क्षेत्र परिसर और विशालतम गोदीवाड़ा हड़प्पा सभ्यता की नगर निर्माण योजना के उत्कृष्ट नमूने हैं।
  • हड़प्पा सभ्यता (2750&1700 B.C.) में स्थापत्य/वास्तुकला ने जो उँचाई प्राप्त की थी वह वैदिक काल (1500&600 B.C.) तक आते-आते समाप्त हो चुकी थी। अत: वैदिक काल स्थापत्य कला की दृष्टि से ह्रास का काल है।
  • वैदिकोत्तर काल के दो महत्त्वपूर्ण अवशेष हैं- बिहार में राजगृह शहर की किलाबंदी (6-5वीं ईसा पूर्व) तथा प्राचीन कलिंगनगर की किलाबंद राजधानी शिशुपालगढ़ (ईसा पूर्व द्वितीय-प्रथम शताब्दी)।
  • अशोक के काल में संगतराशी और पत्थर पर नक्काशी फारस की देन थी।
  • मेगस्थनीज के अनुसार पाटलिपुत्र में चंद्रगुप्त मौर्य का महल समकालीन ‘सूसा’ साम्राज्य के प्रासाद को भी मात करता है।
  • पाटलिपुत्र में एक विशाल इमारती लकड़ी की दीवार के अवशेष मिले हैं जिससे राजधानी को घेरा गया था।
  • सारनाथ का स्तंभ मौर्यकालीन कला का उत्कृष्ट नमूना है।
  • इन स्तंभों पर एक खास तरह की पॉलिश ‘ओप’ की गई थी जिससे इनकी चमक धातु जैसी हो गई। किंतु पॉलिश की यह कला समय के साथ लुप्त हो गई।

क्रम

आधार

पश्चिमी टीला (Upper town)

पूर्वी टीला (Lower Town)

1. दिशा

अपेक्षाकृत यह पश्चिम दिशा में स्थित था।

यह पूर्व दिशा में स्थित था।
2.

ऊँचाई

यह ज़्यादा ऊँचाई पर था।

यह कम ऊँचाई पर था।
3. दुर्गीकरण

यह पूर्णतया दुर्गीकृत क्षेत्र था।

यह दुर्गीकृत नहीं था।

4. जनसंख्या

यह कम आबादी वाला क्षेत्र था।

यह अधिक आबादी वाला क्षेत्र था।
5. इमारतें

यहाँ विशिष्ट इमारतें मौजूद थीं, जैसे- स्नानागार, अन्नगार आदि।

यहाँ साधारण इमारतें थीं, जैसे- एककक्षीय श्रमिक भवन आदि।

एसएमएस अलर्ट
 

नोट्स देखने या बनाने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

नोट्स देखने या बनाने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

close

प्रोग्रेस सूची देखने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

close

आर्टिकल्स को बुकमार्क करने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

close