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हिमनद

  • 25 Feb 2021
  • 12 min read

परिचय

  • हिमनद जलवायु परिवर्तन के संवेदनशील संकेतक होते हैं। क्रिस्टलीय बर्फ, चट्टान, तलछट एवं जल से निर्मित क्षेत्र, जहाँ पर वर्ष के अधिकांश समय बर्फ जमी होती है, को हिमनद कहते हैं। अत्यधिक भार व गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से हिमनद ढलान की ओर प्रवाहित होते हैं।
  • पृथ्वी पर कुल जल की मात्रा का 2.1% हिमनदों में बर्फ के रूप में मौजूद है जबकि 97.2% की उपस्थिति महासागरों एवं अंतःस्थलीय समुद्रों में होती है।

हिमनद हेतु आवश्यक दशाएँ:

  • औसत वार्षिक तापमान गलनांक बिंदु के आसपास होना चाहिये।
  • सर्दियों में हिमपात से बर्फ की बड़ी मात्रा का एकत्रित होनी चाहिये।
  • सर्दियों के अलावा शेष वर्ष में भी तापमान इतना अधिक नहीं चाहिये कि सर्दियों के दौरान एकत्रित पूरी बर्फ पिघल जाए।

हिमनदों का निर्माण

  • हिमनदों का निर्माण उन स्थानों होता है जहाँ बर्फ के पिघलने की तुलना में अधिक मात्रा में हिमपात होता है। हिमपात के पश्चात् बर्फ संपीडित हो जाती है तथा सघन हो जाती है।
  • हिमनद के सघन, संपीड़ित बर्फ या फर्न के रूप में बर्फ के जमने की प्रक्रिया को फर्निफिकेशन कहा जाता है। सामान्यतः बर्फ की परत काफी मोटी लगभग 50 मीटर की हो जाने पर फर्निफिकेशन की प्रक्रिया प्रारंभ होती है और इससे हिमनद धीरे-धीरे प्रवाहित होने के साथ ही एक हिम-नदी का स्वरूप धारण करते हैं।
  • हिमनद के अलग-अलग भाग, अलग-अलग गति से बहते हैं तथा हिमनद के मध्य में उपस्थित बर्फ तल में मौजूद उपस्थित बर्फ की तुलना में तीव्र गति से प्रवाहित होते हैं।

भौगोलिक स्थिति

  • पृथ्वी के 91% हिमनद अंटार्कटिका तथा 8% हिमनद ग्रीनलैंड में हैं। विश्व के कुल भौगोलिक क्षेत्र के लगभग 10% पर हिमनद विद्यमान हैं।

महत्त्व:

  • जल भंडार के रूप में हिमनद: पृथ्वी के स्वच्छ जल का लगभग तीन-चौथाई भाग हिमनदों में संग्रहीत है। अतः हिमनद पृथ्वी पर जल का दूसरा सबसे बड़ा एवं स्वच्छ जल का सबसे बड़ा भंडार हैं।
    • हिमनदों से प्रवाहित होने वाले ठंडे जल का प्रभाव निचली जलधाराओं के तापमान पर भी पड़ता है।
  • नदियों के जल स्रोत के रूप में हिमनद: हिमालय पर्वत के सबसे बड़े हिमनदों में से एक गंगोत्री हिमनद, गंगा नदी का स्रोत है।
    • गंगा नदी भारत एवं बांग्लादेश में स्वच्छ जल और विद्युत का सबसे महत्त्वपूर्ण स्रोत है।
  • जलीय जीवों के जीवन हेतु हिमनद: पर्वतीय वातावरण में कई जलीय प्रजातियों को जीवित रहने के लिये ठंडे जल की आवश्यकता होती है जो कि हिमनदों द्वारा प्राप्त होता है।
    • कुछ जलीय जीव विशेष रूप से जलधाराओं के तापमान के प्रति संवेदनशील होते हैं एवं हिमनदों से प्राप्त ठंडे जल के बिना जीवित नहीं रह सकते हैं।
    • जलधारा के तापमान में परिवर्तन नेटिव ट्राउट (Native trout) एवं अन्य कीस्टोन सैल्मन प्रजातियों (Keystone Salmon Species) पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।
  • मानव के लिये हिमनद: हिमनद मानव को कई उपयोगी संसाधन प्रदान करते हैं। हिमनदीय मृत्तिका (Glacial Till) से फसलों के लिये उपजाऊ मृदा प्राप्त होती है।
    • रेत एवं बजरी निक्षेप का उपयोग कंक्रीट और डामर बनाने के लिये किया जाता है।

हिमनदों का वर्गीकरण

हिमनदों को आकार और ताप के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है:

  • आकार आधारित:
    • आइस कैप: आइस कैप एक गुंबदाकार हिमनद होता है जो सभी दिशाओं में प्रवाहित होता है, उदाहरणस्वरूप कैनेडियन आर्कटिक में स्थित एलेस्मेरे द्वीप पर आइस कैप।
      • पृथ्वी पर उपस्थित आइस कैप हिमनद की मात्रा के बारे में अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है, लेकिन यदि वे सभी पिघल गए, तो वैश्विक समुद्र का जल स्तर लगभग 70 मीटर (लगभग 230 फीट) बढ़ जाएगा, जिससे तटीय शहरों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी।
    • घाटी हिमनद: इन्हें अल्पाइन हिमनद अथवा पर्वतीय हिमनद भी कहा जाता है, ये पर्वतों पर बनते हैं एवं घाटियों से होकर नीचे की ओर प्रवाहित होते हैं।
      • ये ऑस्ट्रेलिया को छोड़कर प्रत्येक महाद्वीप के ऊँचे पर्वतों में पाए जाते हैं (हालाँकि न्यूजीलैंड में हिमनद पाए जाते हैं)।
    • उदाहरण: स्विटज़रलैंड में गॉर्नर हिमनद एवं तंज़ानिया में फर्टवांग्लर हिमनद (Furtwangler Glacier)।
    • हिम चादर: घाटी हिमनदों के विपरीत केवल एकदिशीय या ढलान के बजाय, हिम चादर पर्वतीय क्षेत्रों तक सीमित नहीं होती हैं। ये व्यापक गुंबदाकार होने के साथ ही सभी दिशाओं में प्रवाहित होते हैं।
      • जैसे-जैसे हिम चादरें फैलती हैं, वे अपने चारों ओर बर्फ की मोटी परत से घाटियाँ, मैदान और संपूर्ण पर्वतों तक को ढक लेती हैं।
      • सबसे वृहद हिम चादरें जिन्हें महाद्वीपीय हिमनद कहा जाता है, विशाल क्षेत्रों में फैली हुई होती हैं।
        • अधिकतर महाद्वीपीय हिमनद अंटार्कटिका एवं ग्रीनलैंड द्वीप में फैले हुए हैं।
    • सर्क हिमनद: ये छोटे एवं चौड़े होते हैं, जब किसी पर्वतीय भाग में हिमानियाँ पिघलती हैं तो वहाँ आरामदायक कुर्सी या कटोरे के आकार (Bowl Shaped) की संरचना बनती है, जिसे सर्क कहते हैं।
  • ताप आधारित:
    • ध्रुवीय हिमनद: ध्रुवीय हिमनद वह हिमनद होता है जिसके संपूर्ण भाग का तापमान वर्ष भर गलनांक बिंदु से नीचे होता है।
      • उपध्रुवीय हिमनदों में ग्रीष्म ऋतु में सतह के पिघलने एवं समशीतोष्ण बर्फ की आधार परत के अलावा बर्फ का तापमान गलनांक बिंदु से कम होता है।
    • समशीतोष्ण हिमनद: एक समशीतोष्ण हिमनद वह होता है जिसका तापमान गलनांक बिंदु के आसपास होता है, अतः यहाँ बर्फ एवं जल दोनों उपस्थित होते हैं।
      • ये उत्तरी अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका और एशिया एवं न्यूजीलैंड में पाए जाते हैं।
      • अंटार्कटिक हिमनद एवं ग्रीनलैंड के दक्षिणी भाग के हिमनदों में कुछ समशीतोष्ण हिमनद हैं।

स्थलरूप निर्माण

  • अपरदित स्थलरूप
    • हिमनद घाटियाँ/गर्त: ये घाटियाँ गर्त के आकार की एवं U-आकार वाली होती हैं जिनके तल चौड़े तथा अपेक्षाकृत चिकने एवं ढाल तीव्र होते हैं।
      • घाटियों में मलबा बिखरा रहता है तथा हिमोढ़ मलबा दलदली रूप में दिखाई देता है।
      • बहुत गहरी हिमनद गर्तें जिनमें समुद्री जल भर जाता है तथा जो समुद्री तटरेखा पर होती हैं, को फियोर्ड कहते हैं।
    • सर्क: ये अक्सर हिमनद घाटियों के शीर्ष पर पाए जाते हैं, ये हिमाच्छादित पर्वतों में सामान्य स्थलरूप हैं।
      • ये गहरे, लंबे व चौड़े गर्त होते हैं जिनकी दीवार तीव्र ढाल वाली सीधी एवं अवतल होती है।
      • हिमनद के पिघलने पर जल से भरी झील का भी प्रायः इन गर्तों में निर्माण होता है। इन झीलों को सर्क झील या टार्न झील कहते हैं।
    • हॉर्न और सिरिटेड कटक: सर्क के शीर्ष पर अपरदन होने से हॉर्न निर्मित होते हैं।
      • यदि तीन अथवा अधिक विकीर्णित निरंतर शीर्ष अपरदन के कारण अत्यधिक नुकीले हो जाते हैं तथा उनके तल आपस में मिल जाते हैं, तो उन्हें हॉर्न कहते हैं।
  • निक्षेपित स्थलरूप:
    • हिमनद टिल या गोलाश्मी मृत्तिका: पिघलते हुए हिमनद द्वारा मिश्रित रूप में महीन पदार्थों का निक्षेप-हिमोढ़ या हिमनद टिल या गोलाश्मी मृत्तिका के रूप में जाना जाता है।
      • पिघले हिमनद के जल से कुछ मात्रा में शैल मलबा, सरिता में प्रवाहित होकर निक्षेपित होता है।
        • ऐसे हिमनदी-जलोढ़ निक्षेप हिमानी धौत (Outwash) कहलाते हैं।
        • हिमानी धौत स्तरीय व वर्गीकृत होते हैं।
    • हिमोढ़: हिमोढ़ हिमनद गोलाश्मी मृत्तिका/टिल के जमाव के कारण लंबी कटकें निर्मित होती हैं।
      • अंतस्थ हिमोढ़ हिमनद के अंतिम भाग में मलबे के निक्षेप से बनी लंबी कटकें होती हैं।
      • पार्श्विक हिमोढ़ हिमनद घाटी की दीवार के समानांतर निर्मित होते हैं।
      • कुछ घाटी हिमनद तेज़ी से पिघलने पर घाटी तल पर हिमनद टिल को एक परत के रूप में अव्यवस्थित रूप से छोड़ देते हैं जिन्हें तलीय अथवा तलस्थ (Ground) हिमोढ़ कहते हैं।
      • घाटी के मध्य में पार्श्विक हिमोढ़ के साथ-साथ हिमोढ़ मिलते हैं जो मध्यस्थ हिमोढ़ कहलाते हैं।
        • ये पार्श्विक हिमोढ़ की अपेक्षा कम स्पष्ट होते हैं। कभी-कभी मध्यस्थ हिमोढ़ व तलस्थ के अंतर को पहचानना कठिन होता है।
    • एस्कर्स: ये रेत एवं बजरी से बनी कटकें (Ridges) होती हैं, जो हिमनदों के पिघले जल के प्रवाह के माध्यम से निक्षेप के रूप में जमा हो जाती हैं।
      • इसके पश्चात् बर्फ पिघलने के बाद निक्षेप एक कटक के रूप में शेष रह जाते हैं।
    • ड्रमलिन: ड्रमलिन हिमनद गोलाश्म मृत्तिका के अंडाकार समतल कटकनुमा स्थलरूप होते हैं जिनमें कुछ मात्रा में रेत व बजरी होती है।
      • ड्रमलिन के लंबे भाग हिमनद के प्रवाह की दिशा के समानांतर होते हैं।
      • ये एक किलोमीटर लंबे व 30 मीटर तक ऊँचे होते हैं।
      • ड्रमलिन का हिमनद सम्मुख भाग स्टाॅस (Stoss) कहलाता है, जो पृच्छ भागों की अपेक्षा तीव्र एवं ढाल वाला होता है।

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