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अमेरिकी म्यूज़ियम लौटाएगा तमिलनाडु से चोरी तीन दुर्लभ कांस्य मूर्तियाँ
- 02 Feb 2026
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चर्चा में क्यों?
स्मिथसोनियन के नेशनल म्यूज़ियम ऑफ एशियन आर्ट ने घोषणा की है कि वह तीन प्राचीन कांस्य मूर्तियाँ भारत को वापस करेगा। यह निर्णय कई वर्षों तक चली स्रोत-जाँच के बाद लिया गया है, जिसमें यह पुष्टि हुई कि ये कलाकृतियाँ तमिलनाडु के मंदिरों से अवैध रूप से हटाई गई थीं।
मुख्य बिंदु:
- वापस लाई गई मूर्तियाँ: ये तीनों धरोहर दक्षिण भारतीय कांस्य शिल्पकला की उत्कृष्ट कृतियाँ हैं, जिन्हें मूल रूप से मंदिर अनुष्ठानों में पवित्र शोभायात्रा मूर्तियों (उत्सव मूर्तियों) के रूप में उपयोग किया जाता था—
- शिव नटराज: चोल काल की एक उत्कृष्ट कृति, जो लगभग 990 ईस्वी की मानी जाती है।
- सोमस्कंद: 12वीं शताब्दी की चोलकालीन कांस्य प्रतिमा, जिसमें शिव अपनी पत्नी पार्वती और पुत्र स्कंद के साथ दर्शाए गए हैं।
- परवई के साथ संत सुंदरर: 16वीं शताब्दी की विजयनगर कालीन कांस्य मूर्ति, जिसमें तमिल संत और उनकी पत्नी को दर्शाया गया है।
- पहचान: मूर्तियों के मूल स्थानों की पुष्टि पुदुचेरी स्थित फ्रेंच इंस्टीट्यूट के अभिलेखागार में उपलब्ध 1950 के दशक की दुर्लभ तस्वीरों के माध्यम से की गई।
- मूल स्थल: शिव नटराज की मूर्ति तंजावुर ज़िले के श्री भव औषधेश्वर मंदिर से चुराई गई थी।
- सोमस्कंद की प्रतिमा तिरुवरूर ज़िले के अलाथुर गाँव स्थित विश्वनाथ स्वामी मंदिर से संबंधित पाई गई।
- संत सुंदरर की मूर्ति कल्लाकुरिची ज़िले के वीरसोलापुरम गाँव के एक शिव मंदिर से प्राप्त हुई थी।
- संग्रहालय की नैतिक प्रतिबद्धता: स्मिथसोनियन संग्रहालय ने मूर्तियों की वापसी पर सहमति देने के आधार के रूप में अपनी नैतिक प्रबंधन और पारदर्शिता नीतियों का हवाला दिया, जिसमें इसकी 'साझा प्रबंधन और नैतिक वापसी नीति' (Shared Stewardship and Ethical Returns Policy) भी शामिल है।
- सांस्कृतिक विरासत की पुनर्स्थापना: पवित्र मंदिर-कांस्य मूर्तियों की वापसी भारत के अपने कलात्मक वंश और धार्मिक इतिहास को पुनः प्राप्त करने के प्रयासों को सशक्त बनाती है।