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अमेरिका ने ईरान के खिलाफ ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ शुरू किया

  • 05 Mar 2026
  • 17 min read

चर्चा में क्यों?

संयुक्त राज्य अमेरिका ने फरवरी 2026 में ईरान के खिलाफ 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' (Operation Epic Fury) नामक एक बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया। यह अभियान इज़राइल के सहयोग से किया गया और मध्य पूर्व में तनाव के स्तर को गंभीर रूप से बढ़ा दिया है।

मुख्य बिंदु:

  • ऑपरेशन एपिक फ्यूरी: डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी सैन्य और रणनीतिक ढाँचे को लक्षित करते हुए एक वृहद् पैमाने का सैन्य अभियान घोषित किया, जिसका कथित उद्देश्य ईरान के न्यूक्लियर कार्यक्रम को निष्क्रिय करना तथा शासन करने वाले तंत्र को कमज़ोर करना था।
    • इन हमलों को इज़राइल के सहयोग से संपन्न किया गया।
    • खबरों के अनुसार, विमानों, क्रूज़ मिसाइलों और ड्रोन के माध्यम से ईरान के कई शहरों में मिसाइल ठिकानों, कमांड केंद्रों तथा अन्य रणनीतिक सुविधाओं सहित सैकड़ों लक्ष्यों पर हमला किया गया।
  • उद्देश्य: अमेरिकी प्रशासन ने कहा कि इस अभियान का लक्ष्य है ईरान की परमाणु हथियार महत्त्वाकांक्षाओं को रोकना, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को कमज़ोर करना और ईरान के क्षेत्रीय सैन्य प्रभाव को घटाना है
  • क्षेत्रीय तनाव: ईरान ने प्रतिक्रिया स्वरूप कई मध्य पूर्वी देशों में अमेरिकी और सहयोगी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल तथा ड्रोन हमले किये, जिससे क्षेत्रीय संघर्ष के बढ़ने का डर बढ़ गया।
  • वैश्विक कूटनीतिक प्रतिक्रियाएँ: इस संघर्ष ने वैश्विक शक्तियों के बीच गहरी चिंता उत्पन्न की है, जिसके फलस्वरूप संयुक्त राष्ट्र में तनाव कम करने और कूटनीतिक समाधानों की तलाश पर गहन चर्चा शुरू हो गई है।
    • इस सैन्य कार्रवाई की अमेरिका के सांसदों और विश्लेषकों द्वारा आलोचना की गई, जिन्होंने इसकी कानूनी वैधता तथा दीर्घकालिक रणनीति या निकासी योजना की अनुपस्थिति पर सवाल उठाए।
  • प्रभाव: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से इस क्षेत्र में तेल आपूर्ति मार्ग बाधित हो सकते हैं, विशेष रूप से होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास, जहाँ से वैश्विक तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है।
  • महत्त्व: ऑपरेशन एपिक फ्यूरी का आरंभ पश्चिम एशिया में एक महत्त्वपूर्ण भू-राजनीतिक घटना है, जिसने अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को बढ़ाया है तथा क्षेत्रीय स्थिरता, वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा एवं अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति के संबंध में गंभीर चिंताएँ उत्पन्न की हैं।
और पढ़ें: ईरान पर US-इज़राइल का हमला, मध्य पूर्वी देश, होर्मुज़ जलडमरूमध्य, ईरान के परमाणु हथियार
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