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अंडमान में दो दशक बाद मिट्टी का ज्वालामुखी उद्गार

  • 18 Feb 2026
  • 12 min read

चर्चा में क्यों?

उत्तरी अंडमान के डिगलीपुर क्षेत्र में स्थित श्यामनगर में एक मिट्टी का ज्वालामुखी (मड वोल्केनो), जो दो दशकों से अधिक समय से निष्क्रिय था, अचानक सक्रिय हो गया। इस सक्रियता के कारण धरती से मिट्टी और गैस का उत्सर्जन होने लगा।

मुख्य बिंदु:

  • भूवैज्ञानिक महत्त्व: मिट्टी की ज्वालामुखी ऐसी भूवैज्ञानिक संरचनाएँ होती हैं जिनमें भूमिगत दबाव और द्रवों की गतिशीलता के कारण मृदा, गैस और पानी बाहर निकलता है। ये सामान्य लावा वाले ज्वालामुखियों से भिन्न होते हैं।
    • स्थान: मिट्टी की ज्वालामुखी उत्तर अंडमान के डिगलीपुर क्षेत्र में जल टिकरे के पास स्थित है। यह क्षेत्र हरे-भरे वन परिदृश्यों के बीच फैली मिट्टी के ज्वालामुखियों की शृंखला के लिये जाना जाता है।
  • निगरानी: इस अप्रत्याशित गतिविधि ने भूवैज्ञानिकों का ध्यान आकर्षित किया है, जो द्वीपों के नीचे होने वाली भूमिगत प्रक्रियाओं और द्रव गतिकी को समझने के लिये इस स्थल की अधिक गहन निगरानी कर सकते हैं।
  • प्रभाव: स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये विस्फोट स्थल पर आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगाते हुए एहतियाती कदम उठाए हैं। हालाँकि, अब तक किसी बड़ी चोट या संरचनात्मक क्षति की सूचना नहीं मिली है।
    • विशेषज्ञों का कहना है कि मिट्टी की ज्वालामुखियों के विस्फोट सामान्यतः बाहरी जलवायु कारकों की बजाय विवर्तनिक गतिविधियों और भूमिगत दबाव से जुड़े होते हैं तथा ऐसे घटनाक्रम क्षेत्रीय भूविज्ञान को समझने में महत्त्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं।

और पढ़ें: ज्वालामुखी, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह

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