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मेघालय के लिविंग रूट ब्रिज UNESCO विश्व धरोहर सूची के लिये नॉमिनेट हुए
- 02 Feb 2026
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चर्चा में क्यों?
भारत ने मेघालय की लिविंग रूट ब्रिज को ‘जिंगकिएंग जरी/ल्यू च्राई सांस्कृतिक परिदृश्य’ शीर्षक के अंतर्गत UNESCO में नामांकन दस्तावेज़ (डॉसियर) के रूप में प्रस्तुत किया है।
मुख्य बिंदु:
- नामांकन प्रस्तुत: UNESCO में भारत के राजदूत विशाल वी. शर्मा ने UNESCO विश्व धरोहर केंद्र के निदेशक को नामांकन दस्तावेज़ सौंपा।
- धरोहर का मत्त्व: यह नामांकन इन लिविंग रूट ब्रिज के सांस्कृतिक, पारिस्थितिक और तकनीकी महत्त्व पर प्रकाश डालता है, जिसमें पारंपरिक पारिस्थितिक प्रबंधन तथा पीढ़ीगत ज्ञान पर ज़ोर दिया गया है।
- स्थान: ये ब्रिज मुख्यतः मेघालय में खासी और जयंतिया पहाड़ियों की दक्षिणी ढलानों में स्थित हैं।
- सांस्कृतिक महत्त्व: ये ब्रिज स्वदेशी खासी और जयंतिया समुदायों द्वारा निर्मित तथा संरक्षित जैव-अभियांत्रिक (Bio-engineered) संरचनाएँ हैं।
- ये लोगों, प्रकृति और पारंपरिक ज्ञान के बीच गहरे सामंजस्य का प्रतीक हैं।
- वैश्विक मान्यता: यदि इसे स्वीकृति मिलती है तो यह स्थल UNESCO विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त करेगा, जिससे वैश्विक पहचान मिलेगी और संरक्षण प्रयासों तथा सतत पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
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