हिंदी साहित्य: पेन ड्राइव कोर्स
ध्यान दें:
झारखण्ड संयुक्त असैनिक सेवा मुख्य प्रतियोगिता परीक्षा 2016 -परीक्षाफलछत्तीसगढ़ पीसीएस प्रश्नपत्र 2019छत्तीसगढ़ पी.सी.एस. (प्रारंभिक) परीक्षा, 2019 (महत्त्वपूर्ण अध्ययन सामग्री).छत्तीसगढ़ पी.सी.एस. प्रारंभिक परीक्षा – 2019 सामान्य अध्ययन – I (मॉडल पेपर )
हिंदी साहित्य: पेन ड्राइव कोर्स (Hindi Literature: Pendrive Course)
मध्य प्रदेश पी.सी.एस. (प्रारंभिक) परीक्षा , 2019 (महत्वपूर्ण अध्ययन सामग्री)मध्य प्रदेश पी.सी.एस. परीक्षा मॉडल पेपर.Download : उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (प्रवर) प्रारंभिक परीक्षा 2019 - प्रश्नपत्र & उत्तर कुंजीअब आप हमसे Telegram पर भी जुड़ सकते हैं !यू.पी.पी.सी.एस. परीक्षा 2017 चयनित उम्मीदवार.UPSC CSE 2020 : प्रारंभिक परीक्षा टेस्ट सीरीज़

इतिहास प्रैक्टिस प्रश्न

  • मेसोपोटामियाई सभ्यता और सिंधु घाटी सभ्यता के मध्य उपस्थित मुख्य समानताओं और अंतरों को रेखांकित कीजिये।

    13 May, 2020

    उत्तर :

    मेसोपोटामिया सभ्यता का विकास दजला एवं फरात नदियों के किनारे, वर्तमान इराक और कुवैत के क्षेत्र में हुआ। वहीं सिंधु सभ्यता भारतीय उपमहाद्वीप के पश्चिमोत्तर भाग में विकसित हुई। मेसोपोटामिया सभ्यता (3200-600 ई. पूर्व) और सिंधु सभ्यता (2500-1500 ई. पूर्व) कालक्रम में काफी समय तक परस्पर समानांतर चली।

    दोनों सभ्यताओं के मध्य उपस्थित समानताएँ

    • घरों का निर्माण दोनों ही सभ्यताओं में धूप में सुखाई हुई ईंटों से किया गया।
    • तीर का उपयोग एवं फाँसे द्वारा उपकरणों का निर्माण दोनों में ही देखने को मिलता है।
    • दोनों सभ्यताओं में ही अर्थव्यवस्था मुख्यत: कृषि और व्यापार पर निर्भर थी।
    • प्राथनाएँ एवं अनुष्ठान में भी समानता दिखती है।
    • समान प्रकार के मृदभांडों का प्रयोग किया गया।
    • सिंचाई व्यवस्था, लेखन व्यवस्था, पहिये वाले वाहनों का दोनों में समान प्रकार से उपयोग किया गया।
    • दोनों सभ्यताओं के समाजों में समारोह के लिये स्तुतिगान की प्रथा थी।

    प्रमुख असमानताएँ

    • नगर नियोजन
      • मेसोपोटामिया में महलों और पैतृकों को समर्पित मंदिरों के चारों ओर नगरों का निर्माण होता था, जबकि सिंधु सभ्यता में दुर्ग के पूर्वी भाग में नगरों का निर्माण हुआ जो अधिक सुनियोजित एवं ग्रिड प्रणाली में बसाए गए थे।
      • मेसोपोटामिया सभ्यता में अधिकांश लोग नगरों और कस्बों में रहते थे, वहीं सिंधु समाज में अधिकांश लोग गाँवों में रहते थे।
      • मेसोपोटामिया सभ्यता में शहरों को रक्षित करने के लिये, वहीं सिंधु सभ्यता में घरों को संरक्षित करने के लिये दीवारों का निर्माण किया गया।
    • मेसोपोटामिया सभ्यता में हथियारों के रूप में कुल्हाड़ियों, चाकू, तलवारों एवं कवच का उपयोग किया गया। वहीं दूसरी तरफ सिंधु समाज में मेसोपोटामिया की अपेक्षा अधिक शांतिपूर्ण था। इसलिये उनके द्वारा कृषि कार्यों के लिये उपयुक्त औजारों का ही अधिक निर्माण किया गया। सिंधु सभ्यता से भालों के निर्माण के साक्ष्य मिले हैं।
    • मेसोपोटामिया अर्थव्यवस्था मूल्यवान पत्थरों के व्यापार द्वारा संचालित थी, वहीं सिंधु सभ्यता की अर्थव्यवस्था कपास, शिल्प वस्तुएँ एवं आभूषणों के व्यापार द्वारा संचालित थी।
    • मेसोपोटामियाई लोग प्रमुख रूप से जूट का उत्पादन करते थे एवं उसका उपयोग तेल, जाली निर्माण एवं कपड़े के रूप में किया जाता था। वहीं सिंधु सभ्यता में खाने वाला सामान्य फलों और सब्जियों का उत्पादन किया जाता था।
    • भाषा एवं साहित्य में भी दोनों के मध्य पर्याप्त असमानताएँ विद्यमान है। मेसोपोटामियाई सभ्यता से प्राचीनतम लेखन व्यवस्था के साक्ष्य मिले हैं, जिसमें ‘न्यायिक साहित्य’ की प्रधानता है। वहीं सिंधु लिपि अभी तक पढ़ी नहीं जा सकी है।
    • तकनीक के इस्तेमाल में भी दोनों में अंतर है। मेसोपोटामिया में सबसे पहले पहिये का निर्माण हुआ। वहीं सिंधु समाज में माप-तौल की व्यवस्था, समान प्रकार के अनुपात वाली ईंटों का निर्माण एवं अधिकांश कृषि में प्रयुक्त तकनीकें अनूठे उदाहरण हैं।
    • धर्म के मामले में मेसोपोटामिया के लोगों द्वारा विश्वास किया जाता था कि प्रत्येक शहर भगवान द्वारा संरक्षित है। यहाँ पिरामिडों को स्वर्ग और पृथ्वी के मध्य संपर्क के विश्वास के रूप में निर्मित किया गया। मेसोपोटामियाई समाज में प्रत्येक शहर का अपना पैतृक भगवान होता था।

    वहीं सिंधु समाज में पेड़-पौधों और प्रकृति की पूजा मुख्यत: की जाती थी। यहाँ मातृदेवी की पूजा के साक्ष्य मिले हैं, जबकि मेसोपोटामिया के विपरित यहाँ मंदिरों के कोई साक्ष्य प्राप्त नहीं हुए।

    • मेसोपोटामियाई समाज प्रमुखत: पितृसत्तात्मक था, वहीं सिंधु सभ्यता में मातृसत्तात्मक समाज के साक्ष्य मिले हैं।
    • मेसोपोटामियाई समाज एक पुजारी वर्ग के शासक द्वारा शासित किया जाता था, वहीं सिंधु सभ्यता में शासक वर्ग के सिद्धांत की अभी तक कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है।

    कालक्रम की समानांतरता और आपसी व्यापारिक संपर्कों के कारण हमें दोनों सभ्यताओं के समाज और अर्थव्यवस्था में कुछ समानताएँ देखने को मिलती हैं फिर भी सभ्यताओं की अपनी विशिष्ट स्थानिक विशिष्टताओं के कारण उनमें पर्याप्त असमानताओं का होना भी उतना ही स्वाभाविक है।

एसएमएस अलर्ट
 

नोट्स देखने या बनाने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

नोट्स देखने या बनाने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

close

प्रोग्रेस सूची देखने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

close

आर्टिकल्स को बुकमार्क करने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

close