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द बिग पिक्चर/विशेष : मिशन स्मार्ट सिटी

  • 22 Jan 2018
  • 18 min read

संदर्भ व पृष्ठभूमि 

हाल ही में स्मार्ट सिटी परियोजना में शहरों की चयन प्रक्रिया के चौथे और अंतिम चरण में 9 और शहरों को शामिल किया गया। आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने 15 शहरों के बीच प्रतियोगिता कराई थी, जिनमें से इन शहरों का चयन किया गया। विदित हो कि स्मार्ट सिटी परियोजना में 90 शहरों का चयन पहले ही हो चुका है।  

  • गाँवों से शहरों की ओर निरंतर हो रहे पलायन के चलते भारतीय शहरों पर बोझ बराबर बढ़ता जा रहा है। भारत की जनसंख्या का 31 प्रतिशत हिस्सा शहरी है और और जीडीपी में इसका योगदान 63 प्रतिशत है। 
  • वर्ष 2030 तक जनसंख्या का 40 प्रतिशत हिस्सा शहरी हो जाएगा और तब देश की जीडीपी में इसका योगदान लगभग 75 प्रतिशत हो जाएगा, ऐसे में शहरों में नागरिक सुविधाओं को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी। 
  • देश में फिलहाल 4041 शहरों तथा कस्बों  में स्थानीय निकाय हैं और इनमें लगातार बढ़ती आबादी के मद्देनज़र सामाजिक, आर्थिक और बुनियादी ढाँचे के विकास की आवश्यकता है।

स्मार्ट सिटी की परिभाषा

  • स्मार्ट सिटी की ऐसी कोई परिभाषा नहीं है जिसे सर्वत्र स्वीकार किया जाता है। 
  • अलग-अलग लोगों के लिये इसका आशय अलग-अलग होता है। 
  • स्मार्ट सिटी की संकल्पना, शहर-दर-शहर और देश-दर-देश भिन्न होती है।
  • स्मार्ट सिटी का भारत में अलग अर्थ होगा हेतु कुछ पारिभाषिक सीमाएँ अपेक्षित हैं।
  • भारत में किसी भी शहर निवासी की कल्पना में, स्मार्ट शहर तस्वीर में ऐसी अवसंरचना एवं सेवाओं की अभीष्ट सूची होती है जो उसकी आकांक्षा के स्तर को वर्णित करती है। 
  • नागरिकों की आकांक्षाओं और ज़रूरतों को पूरा करने के लिये, शहरी योजनाकार को लक्ष्य आदर्श तौर पर पूरे शहरी पारिस्थितिकी तंत्र का इस प्रकार विकास करना होता है।
  • यह व्यापक विकास के चार स्तंभों--संस्थागत, भौतिक, सामाजिक और आर्थिक अवसंरचना में दिखाई देता है। 
  • यह दीर्घावधिक लक्ष्य हो सकता है और चुने हुए शहर ‘स्मार्टनेस’ की परतें जोड़ते हुए संवर्धित रूप से ऐसी व्यापक अवसंरचना तैयार करने की दिशा में कार्य कर सकते हैं।

(टीम दृष्टि इनपुट)

स्मार्ट सिटी चयन का आधार

  • संकल्पना और विकास के विभिन्न स्तर
  • परिवर्तन और सुधार की इच्छा 
  • शहर के निवासियों के संसाधन
  • लोगों की आकांक्षाओं का स्तर 
  • हालिया चरण में कुल 10 नए शहर शामिल

इस चरण में उत्तर प्रदेश के तीन शहरों-बरेली, मुरादाबाद और सहारनपुर के अलावा तमिलनाडु में इरोड, दादरा नगर हवेली में सिलवासा, लक्षद्वीप में कावारती, अरुणाचल प्रदेश में ईटानगर और दमन दीव में दीव को जगह मिली है।

  • इस चरण में स्मार्ट सिटी परियोजना के मानकों पर खरे उतरने वाले चयनित शहरों में सिलवासा पहले स्थान पर रहा।
  • एक शहर का चयन पूर्वोत्तर राज्य से किया गया है, लेकिन संबद्ध राज्य में विधानसभा चुनाव के चलते आचार संहिता लागू हो जाने के कारण मेघालय की राजधानी शिलांग का नाम अभी घोषित नहीं किया गया है।
  • चयनित शहरों ने अपने स्मार्ट सिटी प्रस्तावों में परियोजना के मानकों के अनुरूप 12,824 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की कार्ययोजना पेश की है। इस राशि से इन शहरों में जीवन को सुविधापूर्ण और सुगम बनाया जा सकेगा।
  • इन 9 नई स्मार्ट सिटीज़ में 10 हज़ार 629 करोड़ रुपए क्षेत्र आधारित विकास पर खर्च होंगे, जबकि 2,185 करोड़ रुपए पैन सिटीज़ परियोजनाओं पर खर्च होंगे। इससे 35.3 लाख लोग लाभान्वित होंगे।
  • इसके तहत इन शहरों में स्मार्ट रोड, नदी-तालाबों को पुनर्जीवित करना, साइकिलिंग ट्रैक, वॉक पाथ, स्मार्ट क्लासरूम, कौशल विकास केंद्र, स्वास्थ्य सेवाओं का उन्नयन, सूचना तकनीक आधारित म्युनिस्पिल सेवाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी।
  • इस चरण में विजेता शहरों ने अपने स्मार्ट सिटी के प्रस्तावों की गुणवत्ता में 19 प्रतिशत (औसत) चयन की पात्रता के लिये सुधार किया।

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार इस परियोजना के पहले चरण में 100 शहरों में प्रत्येक को 500 करोड़ रुपये दे रही है। शेष राशि संबद्ध शहर स्थानीय निकाय बांड के अलावा निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की भागीदारी से जुटा रहे हैं। देशभर में कुल 100 स्मार्ट सिटीज़ पर 2 लाख 3 हज़ार 979 करोड़ रुपए का निवेश होने की संभावना है।

विकास के लिये विशेष कंपनी (Special Purpose Vehicle-SPV)

स्मार्ट सिटी परियोजना के लिये विकसित की जाने वाली भूमि और इसके क्रियान्वयन का विशेष अधिकार एसपीवी के पास है। इस कंपनी का काम शहर के विकास में शामिल सभी एजेंसियों और स्थानीय राजनीतिक नेतृत्व के बीच तालमेल सुनिश्चित करना है। मिशन स्मार्ट सिटी के लिये एसपीवी को कंपनी कानून के तहत बनाया गया है ताकि पेशेवर क्षमता और जवाबदेही को सबसे अच्छे ढंग से सुनिश्चित किया जा सके। इस मिशन में निजी भागीदारी के लिये महानगरों की बड़ी सलाहकार संस्थाओं और कंपनियों पर निर्भर रहने के बजाय स्थानीय कंपनियों और तकनीकी संस्थाओं के साथ साझेदारी की संभावनाएँ तलाशी जानी चाहिये। 

इसके लिये शहरी स्थानीय निकायों की क्षमताओं का निर्माण करने और उपलब्ध संसाधनों को विकसित करने की आवश्यकता है। इस तरह की व्यवस्था से सस्ते नवाचार की भावना भी झलकती है जिसे स्मार्ट सिटी मिशन के दिशा-निर्देशों में बढ़ावा दिया गया है। 

स्मार्ट सिटी योजना में दो तरह की परियोजनाएँ बन रही  हैं--1. शहरी बुनियादी ढाँचे से संबंधित 2. सूचना प्रौद्योगिकी और तकनीक से। पुराने शहर में बुनियादी ढाँचे के विकास में समय लगने की संभावना है और ऐसे में सूचना प्रौद्योगिकी और तकनीक से जुड़ी सुविधाओं जैसे-शहरी निकाय की सेवाओं की आपूर्ति, स्मार्ट खंभों के ज़रिये सेंसर आधारित आँकड़ों का संग्रह, इंटेलीजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट, स्मार्ट ठोस कचरा प्रबंधन और जलापूर्ति में जल्दी परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

(टीम दृष्टि इनपुट)

मिशन स्मार्ट सिटी में अब तक हुई प्रगति?
17 जनवरी, 2018 तक...

  • 1,38,730 करोड़ रुपए की 2948 परियोजनाओं के कई चरणों का काम पूरा होने को है
  • 2237 करोड़ रुपए की 189 परियोजनाएँ शीघ्र पूरी होने वाली हैं
  • 36 शहरों में स्मार्ट सड़कों पर काम शुरू हो चुका है
  • 30 शहरों में इंटीग्रेटेड कमांड और कंट्रोल परियोजनाओं पर काम शुरू हो चुका है
  • 37 शहरों में स्मार्ट वाटर प्रोजेक्ट शुरू हो चुके हैं
  • 44 शहरों में सौर ऊर्जा परियोजनाओं पर काम चल रहा है
  • 40 शहरों को सुंदर बनाने का काम भी चल रहा है

पश्चिमी देशों से अलग हैं भारतीय स्मार्ट सिटी 

देश में जिन स्मार्ट सिटीज़ का विकास करने की योजना है, वह यूरोपीय या अमेरिकी स्मार्ट सिटी की अवधारणा से कुछ अलग है। भारत में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत मौजूदा शहरी क्षेत्र को रहने योग्य बनाना है यानी कि शहरों की रेट्रोफिटिंग करना। इसका लक्ष्य शहर के एक हिस्से में आधुनिक सुख-सुविधाएँ विकसित करना है, जिसके तहत शहर में कम-से-कम 500 एकड़ के हिस्से को नए रंगरूप में ढाला जा सकता है या फिर 25 एकड़ हिस्से को नए सिरे से विकसित किया जा सकता है या फिर बिल्कुल नया शहर बसाया जा सकता है।

(टीम दृष्टि इनपुट)

भारत में प्रस्तावित स्मार्ट सिटी सुविधाएँ 

  • क्षेत्र आधारित घटनाक्रमों में मिश्रित भू-उपयोग को बढ़ावा देना
  • अनियोजित क्षेत्रों में भू-उपयोग को अधिक कुशल बनाना 
  • आवासन (Housing) के अवसरों का सभी के लिये विस्तार करना 
  • पैदल और साइकिल चलने योग्य सड़कों का निर्माण  
  • स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना
  • अंतःक्रिया को बढ़ावा देने और सुरक्षा सुनिश्चित करना
  • सड़क नेटवर्क को केवल वाहनों एवं सार्वजनिक परिवहन के लिये ही नहीं बल्कि पैदल चलने वालों और साइकिल चालकों के लिये भी बनाना 
  • पैदल या साइकिल से तय की जाने वाली दूरियों के लिये आवश्यक प्रशासनिक सेवाएँ प्रदान करना 
  • नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में बढ़ोतरी करना 
  • शहरी क्षेत्रों में ताप-प्रभावों में कमी लाने और पारिस्थितिकीय संतुलन बनाने के लिये खुले स्थानों, पार्क, खेल के मैदान, मनोरंजन के स्थानों का संरक्षण और विकास करना (पर्यावरण संरक्षण) 
  • परिवहन के विभिन्न विकल्पों को बढ़ावा देना
  • पारगमन उन्मुख विकास, सार्वजनिक परिवहन और अंतिम गंतव्य स्थल पर परिवहन कनेक्टिविटी
  • सेवाओं की कीमतों में कमी लाने और स्थानीय निकायों के कार्यालयों में जाए बिना सेवाएं प्रदान करना 
  • इनके लिये जवाबदेही और पारदर्शिता लाने हेतु अधिकाधिक ऑनलाइन सेवाओं को उपलब्ध कराना
  • शासन को सिटिज़न फ्रेंडली और किफायती बनाना, विशेषकर मोबाइल उपयोग को 
  • लोगों के सुझाव लेने एवं कार्यस्थलों के कार्यकलापों की ऑनलाइन निगरानी का उपयोग करने के लिये ई-समूहों का गठन करना 
  • स्मार्ट सिटी के लिये चुने गए शहर में कम-से-कम एक  ऐसा स्मार्ट फीचर होना चाहिये जो शहर के सभी  निवासियों की ज़िंदगी से जुड़ा हो
  • मुख्य आर्थिक कार्यकलापों के आधार पर शहर को पहचान प्रदान करना, जैसे-मुरादाबाद पीतल के लिये और लखनऊ चिकनकारी के लिये पहचाना जाता है
  • अवसंरचना और सेवाओं को बेहतर बनाने के लिये क्षेत्र आधारित विकास में उनके लिये स्मार्ट समाधान का उपयोग करना

मिशन स्मार्ट सिटी की प्रमुख चुनौतियाँ

  • राज्य और शहरी स्थानीय निकायों को स्मार्ट सिटी के विकास में  महत्त्वपूर्ण सहायक भूमिका निभानी होगी। 
  • इस स्तर पर स्मार्ट नेतृत्व और दृष्टि एवं निर्णायक कार्रवाई करने की क्षमता मिशन की सफलता का निर्धारण करने में महत्त्वपूर्ण कारक होगा। 
  • नीति निर्माताओं, कार्यान्वयन करने वालों एवं अन्य हितधारकों द्वारा विभिन्न स्तरों पर रेट्रोफिटिंग की अवधारणाओं को समझना, पुनर्विकास और ग्रीनफील्ड विकास हेतु क्षमता सहायता की जरूरत होगी। 
  • पूर्व योजना बनाने के दौर में ही समय और संसाधनों में प्रमुख निवेश करना होगा। 
  • स्मार्ट सिटी मिशन को सक्रिय रूप से प्रशासन और सुधारों में भाग लेने वाले स्मार्ट लोगों की आवश्यकता है। 
  • नागरिक भागीदारी शासन में एक औपचारिक भागीदारी की तुलना में काफी अधिक है। स्मार्ट लोगों की भागीदारी को सूचना तकनीक के बढ़ते उपयोग, विशेष रूप से मोबाइल आधारित उपकरणों के माध्यम से एसपीवी द्वारा सक्रिय किया जाएगा।

स्मार्ट सिटी और नया शहरी एजेंडा

  • जैसा हम बता चुके हैं कि 'स्मार्ट सिटी' की संकल्पना, शहर-दर-शहर और देश-दर-देश भिन्न होती है, जो विकास के स्तर, परिवर्तन और सुधार की इच्छा, शहर के निवासियों के संसाधनों और उनकी आकांक्षाओं पर निर्भर करती है। इस मिशन में शहरों के मार्गदर्शन करने के लिये कुछ पारिभाषिक सीमाएँ अपेक्षित हैं। 
  • भारत में किसी भी शहर निवासी की कल्पना में, स्मार्ट शहर तस्वीर में ऐसी अवसंरचना एवं सेवाओं की अभीष्ट सूची होती है, जो उसकी आकांक्षा के स्तर को वर्णित करती है। स्मार्ट सिटी अवधारणा, जहाँ नागरिकों की आकांक्षाओं और ज़रूरतों को पूरा करने के लिये, शहरी योजनाकार को आदर्श तौर पर पूरे शहरी पारिस्थितिकी तंत्र का विकास करना होता है, वहीं नया शहरी एजेंडा जलवायु परिवर्तन और सतत विकास के लक्ष्यों को समाहित किये हुए है।
  • बेशक स्मार्ट सिटी का विचार ई-गवर्नेंस की अवधारणा को एक नए स्तर पर ले जाने का प्रयास है। पूर्णत: स्मार्ट सिटी हो जाने पर स्मार्ट सिटी के निवासियों की अधिकांश समस्याएँ स्वत: ही हल हो जाएंगी। स्मार्ट सिटी बनने की आवश्यक शर्तों में ई-गवर्नेंस तो है ही, लेकिन यह एक धुरी मात्र है, जिस पर शेष सेवाएँ आधारित हैं। स्मार्ट सिटी के महाअभियान में जनसाधारण को शामिल किये बिना स्मार्ट सिटी का सपना पूरा नहीं हो सकता। स्मार्ट सिटी वस्तुत: एक ऐसा शहर होता है, जो सतत आर्थिक विकास व उच्च जीवन स्तर सुनिश्चित करता है तथा अर्थव्यवस्था, परिवहन, पर्यावरण, जीवन स्तर और सरकारी सेवाओं की सर्वोच्च श्रेष्ठता पर फोकस करता है। अतः स्मार्ट सिटी मिशन और नए शहरी एजेंडे का मिलन भारत में शहरीकरण से उत्पन्न समस्याओं का समाधान बन सकता है।

(टीम दृष्टि इनपुट)

निष्कर्ष: केंद्र सरकार ने जून 2015 में स्मार्ट सिटी मिशन शुरू किया था, जिसका लक्ष्य 100 शहरों को स्मार्ट सिटी में बदलना है। इन शहरों में पर्याप्त जल और बिजली आपूर्ति, सफाई, सार्वजनिक यातायात, ठोस कचरा प्रबंधन, सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, आधुनिक यातायात प्रबंधन व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी और ई-प्रशासन के ज़रिये जीवन स्तर को बेहतर बनाया जाना है। अब केंद्र सरकार ने राज्यों से मिशन स्मार्ट सिटी में उन स्मार्ट सिटी परियोजनओं को शीघ्र लागू करने के लिये कहा है, जिनका नागरिकों के जीवन पर प्रत्यक्ष एवं परिवर्तनकारी प्रभाव पड़ता है। 

किसी भी देश में स्मार्ट सिटी की अवधारणा वहाँ विकास के स्तर, परिवर्तन और सुधार की इच्छा, शहर के निवासियों के संसाधनों और उनकी आकांक्षाओं पर निर्भर करती है। आज शहरीकरण और इससे उत्पन्न समस्याएँ देश के लिये एक बड़ा संकट बनकर सामने आए हैं और इसके लिये सभी संभावित उपाय किये जा रहे हैं। ऐसे में स्मार्ट सिटी जैसी पहल अत्यंत उपयोगी और सार्थक कही जा सकती है।

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