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आंतरिक सुरक्षा

भारतीय वायुसेना का आधुनिकीकरण

  • 05 Sep 2019
  • 11 min read

संदर्भ

जम्मू-कश्मीर की विशेष स्थिति को समाप्त किये जाने के पश्चात् भारत एवं पाकिस्तान के मध्य तनाव बढ़ता जा रहा है। इसी दौरान भारत के एयर चीफ मार्शल ने कहा है कि भारतीय वायु सेना (IAF) अभी भी 44 वर्ष पुराने मिग -21 रूसी फाइटर जेट्स उड़ा रही है। भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों के बेड़े में शामिल मिग -21 सबसे अधिक दुर्घटनाग्रस्त होने वाला विमान रहा है, इसीलिये इसे ‘फ्लाइंग कॉफिन’ (उड़ता ताबूत) के नाम से जाना जाता है।

वर्ष 1963 से 2015 तक मिग -21 विमानों से कुल 210 दुर्घटनाएँ हुई हैं। इनमें से सर्वाधिक 16 दुर्घटनाएँ वर्ष 1999 में हुई। वर्तमान में भारत मिग -21 बाइसन का सबसे बड़ा ऑपरेटर है, जिसके बेड़े में सौ से अधिक विमान कार्यरत हैं।

नई दिल्ली में आयोजित भारतीय वायुसेना की एक संगोष्ठी में एयर चीफ मार्शल ने कहा कि वर्ष 2019 में रूसी लड़ाकू जेट के मूल संस्करण को चरणबद्ध रूप से हटाया जाएगा। हालाँकि भारत को उच्च-तकनीकी हथियारों की आवश्यकता है, जिन्हें अभी भी आयात करने की ज़रूरत है।

आधुनिकीकरण की आवश्यकता को दर्शाने वाले प्रमुख कारण

    • भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण की आवश्यकता युद्ध के खतरे की धारणा से उत्पन्न हुई है। यह आवश्यकता तब अधिक चिंतनीय हो जाता है जब देश की आधी सीमा सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील हो।
    • आधुनिकीकरण केवल लड़ाकू विमानों तक सीमित नहीं है। यहाँ यह भी सोचने की ज़रूरत है कि क्या फोर्स मल्टीप्लायर (जैसे- हवा में ईंधन भरने वाले, संचार नेटवर्क आदि) भी उन्नत है।
    • युद्ध उपकरण को संचालित करने वालों की क्षमता पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है।
    • जिन मुद्दों पर विचार करने की आवश्यकता है उनमें पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसियों को ध्यान में रखते हुए देश की युद्ध नीति को ‘दो-मोर्चे की युद्ध नीति’ में बदलना, नेटवर्क केंद्रित युद्ध, एयरोस्पेस यानी भारतीय वायु सीमा सहित अंतरिक्ष संपत्ति को भी अपने युद्ध क्षेत्र में शामिल रखना है।
    • इंडक्शन रेट (Induction Rate) और रिटायरमेंट रेट अन्य कारक है। भारतीय वायुसेना में फाइटर जेट्स का इंडक्शन रेट उनके रिटायरमेंट रेट से काफी धीमा होता है।
    • इस पर भी विचार करने की ज़रूरत है कि किस तरह के विमानों की देश को ज़रूरत है, यानी क्या सभी राफेल श्रेणी के ही विमान चाहिये या कुछ अन्य श्रेणी के विमान भी उपयोगी हैं।
  • ‘नेटवर्क-केंद्रित वारफेयर’ (Network-centric Warfare) मोटे तौर पर उभरती हुई रणनीति, तकनीकों और प्रक्रियाओं के संयोजन का वर्णन करता है जिसे कोई भी शक्ति पूरी तरह से या आंशिक रूप से नेटवर्क बल का इस्तेमाल कर एक निर्णायक युद्ध लाभ ले सकता है।
  • ‘नेटवर्क केंद्रित वारफेयर’ युद्धस्थल से सैन्य कर्मियों, प्लेटफार्मों इत्यादि को आपस में जोड़ने के लिये कंप्यूटर, उच्च गति की डेटा लिंकिंग और नेटवर्किंग सॉफ्टवेयर के उपयोग पर ध्यान केंद्रित करता है।

इस क्षेत्र में प्रगति

  • इस क्षेत्र में भारतीय वायुसेना ने इंटीग्रेटेड मैटेरियल्स मैनेजमेंट ऑनलाइन सिस्टम (Integrated Materials Management Online System- IMMOLS) लागू किया है।
  • जहाँ तक केंद्रीय नियंत्रण का सवाल है, IAF में एकीकृत वायु कमान और नियंत्रण प्रणाली (Integrated Air Command and Control System- IACCS) है, जो जमीन और हवा में मौजूद सभी सेंसर्स को जोड़ती है।
  • IAF फोर्स मल्टीप्लायरों जैसे फ्लाइट रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट (Flight Refuelling Aircraft- FRA), एयरबोर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (Airborne Warning and Control System- AWACS), आदि की देखरेख भी कर रहा है।
  • मिसाइल के मोर्चे पर, भारत के पास सामरिक मिसाइलों का एक अच्छा बेड़ा है, जिसमें अग्नि1-वी और पृथ्वी शामिल हैं। बहुस्तरीय सुरक्षा के लिये ‘लॉन्ग रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल’ (LR-SAM), ‘मीडियम रेंज सर्फेस टू एयर मिसाइल’ (MR-SAMs), आदि भी है। भारत के पास ब्रह्मोस भी है जो कि स्वदेशी रूप से निर्मित है।
  • भारत ने चिनूक जैसे भारी लिफ्ट हेलीकॉप्टर और अपाचे जैसे हेलीकॉप्टरों को अपनी वायुसेना में शामिल किया है।
  • IAF के पास अब अपने स्वयं के संचालन के लिये एक समर्पित उपग्रह प्रणाली भी है।
  • बुनियादी ढाँचे के मोर्चे पर IAF एयरफिल्ड इन्फ्रास्ट्रक्चर का आधुनिकीकरण (Modernisation of AirField Infrastructure- MAFI) नामक एक परियोजना है। इस परियोजना के अंतर्गत 30 हवाई अड्डों को हर मौसम में 24X7 उड़ान क्षमताओं में अपग्रेड किया गया है।
  • अन्य पहलों में इंडियन डिज़ाइन डेवेलेप्ड एंड मेन्युफेक्चर्ड (Indian Designed, Developed and Manufactured- IDDM), रक्षा खरीद प्रक्रिया (Defense Procurement Procedure- DPP) में रणनीतिक साझेदारी नीति आदि शामिल है।

चुनौतियाँ

  • तत्काल में अल्पावधि की सबसे बड़ी चिंता भविष्य में फाइटर जेट्स की कमी है।
  • भारत में उच्च तकनीक वाले विमान बनाने में प्रतिभा की कमी है।
  • भारत के पास विमान के लिये प्रौद्योगिकी विकास का कोई रोडमैप नहीं है अर्थात् मौजूदा विमान की प्रौद्योगिकी समय पर अपग्रेड करने की कोई योजना नहीं है।
  • 'उद्योग या विनिर्माण क्षेत्र से संबंधित चुनौतियाँ:
    • प्रौद्योगिकी और प्रतिभा तक पहुँच।
    • बड़े पूंजीगत व्यय और इस क्षेत्र में निवेश करने पर रिटर्न की लंबी अवधि।
    • विमान से जुड़े इकोसिस्टम को बेहतर बनाना।
  • स्वदेशी आविष्कार का न होना है
    • वित्तीय बोझ: भारत स्वदेशीकरण की लागत वहन करने में सक्षम नहीं है। उदाहरण के लिये, स्वदेश में Su-30 को बनाना, Su-30 को खरीदने की तुलना में 1.8 गुना अधिक महँगा है, इसे सीधे रूस से खरीदा जा सकता है।
  • वर्तमान में, उपकरण खरीदने के लिये भारतीय वायुसेना को एक लंबी प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है, जिसमें लगभग 4-5 साल लगते हैं।

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और निजी उद्योग

  • HAL भारत की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है। हालाँकि इसे पर्याप्त विनिर्माण के लिये आदेश नहीं प्राप्त है।
    • उदाहरण के लिये, HAL कानपुर एक बड़ा विनिर्माण बेस है। इसमें सभी आवश्यक सुविधाएँ मौजूद हैं जो किसी भी एयरोस्पेस उद्योग के लिये आवश्यक होती है जैसे कि- विनिर्माण सेट अप, उचित बुनियादी ढाँचा आदि। लेकिन इसे विनिर्माण करने का कोई आदेश प्राप्त नहीं है।
  • सरकार को एक सहयोगी दृष्टिकोण रखने की आवश्यकता है जहाँ निजी उद्योग को लीज़ पर उपलब्ध सुविधाओं को प्राप्त करने की अनुमति हो।
    • HAL निजी उद्योग पर निर्भर रह सकता है क्योंकि उसने निजी कंपनियों को LCA तेजस के कुछ उत्पादों को आउटसोर्स किया था जिसे उसने समय से प्राप्त किया।
    • रक्षा मंत्रालय ने अपनी सुविधाओं के उपयोग के लिये निजी उद्योगों को भी अनुमति दी है, चाहे वह आयुध कारखानों में हो या सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों में।
    • सरकार HAL को विदेशी विक्रेता या विदेशी निर्माताओं के साथ गठजोड़ करने की अनुमति दे सकती है।

आगे की राह

  • एक राष्ट्रीय वैमानिकी आयोग (National Aeronautic Commission) बनाने की आवश्यकता है ताकि संबंधित मुद्दों पर चर्चा करने के लिये उद्योग, सशस्त्र बल और सरकार एक साथ एक मंच पर आ सकें।
  • निजी कंपनियाँ अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं, इसलिये सरकार को उन्हें प्रोत्साहित करने की ज़रूरत है।
  • आधुनिकीकरण को स्वदेशीकरण के साथ जोड़ा जाना चाहिये। अपने स्वयं के बेड़े के निर्माण और सेवा के लिये स्वदेशी क्षमता के विकास के बिना भारत सुरक्षा के क्षेत्र में एक महाशक्ति नहीं बन सकता है।

अभ्यास प्रश्न: भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण की क्या आवश्यकता है? इसमें आने वाली चुनौतियों और उनके समाधान के उपायों पर चर्चा कीजिये।

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