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द बिग पिक्चर : बुनियादी विकास एवं पूर्वोत्तर भारत

  • 29 Dec 2018
  • 21 min read

संदर्भ


25 दिसंबर, 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के डिब्रूगढ़ को अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट से जोड़ने वाले देश के सबसे लंबे सड़क और रेल पुल का उद्घाटन किया। यह देश का पहला पूरी तरह से स्टील से निर्मित पुल है। यह पुल असम के डिब्रूगढ़ शहर के समीप ब्रह्मपुत्र नदी पर बनाया गया है जो भारत का सबसे लंबा (सड़क-रेल पुल) तथा एशिया का दूसरा सबसे लंबा रेल-सड़क पुल है। इसकी लंबाई 4.94 किलोमीटर है।

  • इस पुल में सबसे ऊपर तीन लेन वाली एक सड़क है, जबकि उसके ठीक नीचे दोहरी रेलवे लाइन है। यह पुल ब्रह्मपुत्र के जलस्तर से 32 मीटर की ऊँचाई पर है।
  • बोगीबील सड़क-रेल पुल का निर्माण 2002 में शुरू हुआ था। इस पुल को स्वीडन और डेनमार्क को जोड़ने वाले पुल की तर्ज़ पर बनाया गया है।

पृष्ठभूमि

  • इस पुल की आधारशिला 1997 में तत्कालीन प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा ने रखी थी। लेकिन इसका निर्माण अप्रैल 2002 में शुरू हो पाया।
  • 1962 तक ब्रह्मपुत्र भारत की एकमात्र ऐसी नदी थी जिसकी पूरी लंबाई पर एक भी रेलवे या किसी तरह का पुल नहीं बना था।
  • 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ढोला सादिया यानी भूपेन हजारिका सेतु का उद्घाटन किया जो उत्तरी असम और पूर्वी अरुणाचल प्रदेश के बीच पहला स्थायी सड़क कनेक्शन है।
  • यह लोहित नदी को पार करता है जो ब्रह्मपुत्र नदी की एक मुख्य उपनदी है।
  • अब तक अरुणाचल के लिये रेल और सड़क परिवहन असम के तीन पुलों के माध्यम से होता आ रहा है जिसमें बोंगाई ज़िले में जोगिगोपा, गुवाहाटी के पास सराईघाट और शोणितपुर नागाँव के बीच कोलिया भोमोरा सेतु है।
  • इसके अलावा दूसरा मार्ग नौका मार्ग था जिसे सिर्फ दिन में ही चलाया जा सकता था। बारिश के मौसम में ब्रह्मपुत्र नदी का बहाव तेज़ होने के कारण नाव का रास्ता भी बंद हो जाता था।
  • बोगीबील पुल के बन जाने से रास्ता बंद होने की समस्या नहीं होगी क्योंकि यह पुल ब्रह्मपुत्र नदी के जलस्तर से करीब 32 मीटर ऊँचा है।

भारत के पूर्वोत्तर राज्य

  • भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में आठ राज्य अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिज़ोरम, नगालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा आते हैं। इस समस्त क्षेत्र का कुल क्षेत्रफल 2,62,179 वर्ग किलोमीटर है।
  • भारत के कुछ राज्य जैसे राजस्थान, मध्य प्रदेश या महाराष्ट्र से तुलना करें तो क्षेत्रफल के आधार पर इनमें से प्रत्येक राज्य पूर्वोत्तर के इस संपूर्ण क्षेत्र के मुकाबले अधिक बड़ा है। 
  • पूर्वोत्तर की सीमा पाँच देशों से मिलती है। ये देश हैं- बांग्लादेश, भूटान, चीन, नेपाल और म्याँमार। पूर्वोत्तर की केवल 30-35 प्रतिशत भूमि ही समतल है। 
  • दशकों से खराब बुनियादी ढाँचे और सीमित कनेक्टिविटी ने इन राज्यों के सामाजिक-आर्थिक विकास में बाधक के रूप में काम किया है।
  • पूर्वोत्तर भारत का क्षेत्र देश की राजधानी दिल्ली से लगभग 2000 कि.मी. दूर स्थित है और ऐसा माना जाता है कि इंटरनेट और सोशल मीडिया के दौर में भी सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ वहाँ देर से पहुँच पाता है।
  • भारत की 'अष्टलक्ष्मी' के रूप में पहचाने जाने वाले इन राज्यों को दक्षिण-पूर्व एशिया के प्रवेश द्वार के रूप में मान्यता दी गई है।

बोगीबील सड़क-रेल पुल : आर्थिक, सामरिक तथा वाणिज्यिक महत्त्व

  • यह पुल न सिर्फ पूर्वोत्तर के लिये जीवन रेखा साबित होगा बल्कि देश की सुरक्षा को भी मज़बूती प्रदान करेगा। इसके तैयार होने में 17 साल का समय लगा है।
  • इस पुल को सामरिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। अरुणाचल प्रदेश से सटे बॉर्डर पर चीन की चुनौती से निपटने में इससे बड़ी मदद मिलेगी। सेना के भारी टैंक इस पर आसानी से जा सकते हैं। 
  • इसके अलावा नागरिक आबादी के लिये भी यह पुल काफी उपयोगी साबित होगा। इससे पूर्वी असम से अरुणाचल प्रदेश के बीच सफर करने में लगने वाला समय घटकर सिर्फ 4 घंटे का रह जाएगा। दिल्ली से डिब्रूगढ़ की यात्रा में भी 3 से 4 घंटे की कमी आएगी।
  • इस पुल को चीन के साथ लगती सीमा तक रक्षा साजो सामान पहुँचाने के लिये एक बड़ी सहायता के रूप में देखा जा रहा है।
  • उम्मीद जताई जा रही है कि बोगीबील पुल सीमावर्ती इलाकों में राष्ट्रीय सुरक्षा को मज़बूत करने के अलावा क्षेत्र में आर्थिक विकास के एक नए युग की शुरुआत करेगा। इससे चीन की सीमा पर तैनात सशस्त्र बलों के लिये काफी सहूलियत होगी।
  • यह पुल इतना मज़बूत है कि आपात काल में इससे सेना के बड़े टैंक भी गुज़र सकेंगे।
  • यह अरुणाचल और असम के बीच के सभी हिस्सों के लिये आल वेदर कनेक्टिविटी प्रदान करने में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
  • यह पुल असम के दो ज़िलों डिब्रूगढ़ और धेमाजी को जोड़ेगा जो पहले नौका मार्ग से ही जुड़े थे।
  • यह असम और अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी हिस्से में ब्रह्मपुत्र के उत्तर और दक्षिण तटों के बीच सड़क और रेल कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। साथ ही चीन से लगने वाली सीमा तक पहुँचने का समय 10 घंटे कम कर देगा।

पूर्वोत्तर राज्यों में बुनियादी विकास

  • केंद्र सरकार ने पिछले चार वर्षों में पूर्वोत्तर क्षेत्र में बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं की एक विस्तृत श्रृंखला पर विशेष ध्यान दिया है।
  • इस क्षेत्र में रेल, सड़क, वायु और अंतर्देशीय जलमार्ग कनेक्टिविटी में सुधार पर ज़ोर दिया गया है।
  • भारत सरकार की 'एक्ट ईस्ट' नीति (Act Aast Policy) पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को मज़बूत करने पर केंद्रित है और सड़क, रेल, वायु, टेलिकॉम, विद्युत और जलमार्ग से संबंधित विभिन्न परियोजनाओं के माध्यम से इस कनेक्टिविटी को बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है।
  • भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में बुनियादी ढाँचे के विकास के लिये प्रमुख सरकारी पहलों को निम्नलिखित शीर्षकों के अंतर्गत समझा जा सकता है।

1. एयरपोर्ट

  • उत्तर-पूर्वी परिषद, (The North-Eastern Council-NEC) पूर्वोत्तर के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिये एक नोडल एजेंसी है।
  • NEC, जिसके प्रमुख सदस्यों में इन आठ राज्यों के राज्यपाल और मुख्यमंत्री शामिल हैं, 12 ऑपरेशनल हवाई अड्डों में बुनियादी ढाँचे के उन्नयन के लिये वित्तपोषण कर रहा है।
  • सिक्किम में 24 सितंबर को पाक्योंग एयरपोर्ट का उद्घाटन मोदी किया गया। गंगटोक से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित (200 एकड़ से अधिक के क्षेत्रफल में निर्मित) यह हवाई अड्डा समुद्र तल से 4,500 फीट की ऊँचाई पर एक पहाड़ी के ऊपर स्थित है। यह देश के पाँच सबसे ऊँचे हवाई अड्डों में से एक है, इसके निर्माण में 650 करोड़ रुपए की लागत आई है।
  • तेजू हवाई अड्डे का निर्माण कार्य पूरा होने वाला है और इसे चालू वित्त वर्ष में संचालित किये जाने की संभावना है।
  • इससे लोअर दिबांग वैली, अंजाव, नामसाई और दिबांग वैली जैसे पड़ोसी ज़िलों से कनेक्टिविटी में सुधार होने की उम्मीद है।
  • उम्रोई (शिलॉन्ग) हवाई अड्डे में NEC द्वारा रनवे विस्तार कार्यों को शामिल किया जाएगा, ताकि बड़े हवाई जहाज़ों को ज़मीन पर उतारा जा सके।
  • इसी तरह गुवाहाटी में LGBI एयरपोर्ट पर विमानशाला (hangar) आवंटित करने के लिये काम चल रहा है।

2. सड़क परियोजनाएँ

  • NEC ने 10,500 किलोमीटर लंबी सड़कों के निर्माण पर अपना ध्यान केंद्रित किया है, जिसमें अंतर-राज्य और आर्थिक महत्त्व की सड़कें शामिल होंगी।
  • नॉर्थ ईस्ट रोड सेक्टर डेवलपमेंट स्कीम (North-East Road Sector Development Scheme) नामक एक नई योजना शुरू की गई है जो सड़कों और पुलों के लिये रणनीतिक परियोजनाओं को संचालित करेगी।
  • इन परियोजनाओं में दोइमुख-हरमुती, तुरा-मनकाचर और वोखा-मेरापानी-गोलाघाट शामिल हैं जिसकी अनुमानित लागत 213.97 करोड़ रुपए है। इसका निर्माण राष्ट्रीय राजमार्ग और बुनियादी ढाँचा विकास निगम (NHIDCL) के नेतृत्व में होगा।
  • NHIDCL द्वारा इस तरह की कुल 14 परियोजनाएँ शुरू की जाएंगी।
  • देश का एक बड़ा राज्य होने के बावजूद अरुणाचल प्रदेश में सड़क घनत्व सबसे कम है। केंद्रीय सड़क और परिवहन मंत्रालय, ट्रांस अरुणाचल राजमार्ग परियोजना (Trans Arunachal Highway Project) को तेज़ करने की योजना बना रहा है।
  • मंत्रालय सड़क और राजमार्गों के लिये विशेष त्वरित सड़क विकास कार्यक्रम (Rapid Road Development Programme) चलाएगा, जिससे 2,319 किलोमीटर की दूरी तय की जा सकेगी।
  • अरुणाचल फ्रंटियर हाईवे और ईस्ट वेस्ट कॉरिडोर (Arunachal Fruntier Highway and East West Corridor) के लिये निर्माण योजना भी प्रस्तावित की गई है।

3. रेल परियोजनाएँ

  • पूर्वोत्तर राज्यों के लिये 20 प्रमुख रेलवे परियोजनाओं के माध्यम से एक रेलवे लिंक प्रदान करने की योजना पर कार्य किया जा रहा है, जिसमें 13 नई लाइनें, 2 गेज रूपांतरण और लगभग 2,624 किलोमीटर की लंबाई के साथ पाँच दोहरीकरण शामिल हैं।
  • बैराबी और सरांग को जोड़ने वाली एक ब्रॉड गेज रेलवे लाइन का निर्माण प्रगति पर है जो 2020 तक पूर्वोत्तर राज्यों की राजधानियों को जोड़ेगी।
  • पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे क्षेत्र के एक हिस्से में 51 किलोमीटर लंबी रेल लिंक अगले साल तक चालू होने की उम्मीद है।
  • परियोजना में नौ किलोमीटर के साथ 23 सुरंगों का निर्माण भी होगा, साथ ही 36 प्रमुख पुल और 147 छोटे पुल भी होंगे।
  • रेलवे लाइन में तीन स्टेशन शामिल होंगे- होर्टोकी, कवनपुई और मुलखंग, जो आधुनिक सुविधाओं जैसे-एस्केलेटर, फुट ओवर-ब्रिज आदि से सुसज्जित होंगे।
  • ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे एक एक्सप्रेस हाईवे परियोजना, जिसकी लागत 40,000 करोड़ रुपए है और 1,300 किलोमीटर तक फैली हुई है, से असम में कनेक्टिविटी संबंधित मुद्दों को हल होने की उम्मीद है।
  • बेहतर सड़क, रेल और हवाई संपर्क से पूर्वोत्तर भारत को प्रगति की ओर एक बड़ी छलांग लगाने में मदद मिलेगी।

4. संचार अवसंरचना

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्वोत्तर में कनेक्टिविटी, कम्युनिकेशन तथा कॉमर्स (three-C) पर अधिक बल देने की बात कही है।
  • डाकघरों का नेटवर्क, टेलीफोन एक्सचेंज और टेलीफोन कनेक्शन संचार के लिये प्रमुख बुनियादी ढाँचे हैं। टेलीफोन आधारित संचार में काफी तेज़ गति से प्रसार हो रहा है।
  • सरकार ने पूर्वोत्तर भारत के आठ राज्यों में दूरसंचार कनेक्टिविटी में सुधार के लिये 15,000 करोड़ रुपए के निवेश की घोषणा की है। भारत का सीमांत राज्य अरुणाचल प्रदेश जो चीन के साथ सीमा साझा करता है, में 2817 से अधिक मोबाइल टावर स्थापित करने की योजना है।
  • ‘पूर्वोत्तर क्षेत्रों में भारत नेट रणनीति’ के तहत पूर्वोत्तर क्षेत्र के 4240 ग्राम पंचायतों को दिसंबर 2018 तक सैटेलाइट कनेक्टिविटी द्वारा ब्रॉडबैंड से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

पूर्वोत्तर में औद्योगिक विकास

  • पूर्वोत्तर क्षेत्र के आठ राज्यों में प्राकृतिक संसाधन, औद्योगीकरण के स्तर तथा ढाँचागत सुविधाओं के संबंध में काफी भिन्नता है।
  • चार रिफाइनरी और दो पेट्रोकेमिकल परिसरों को छोड़कर इस क्षेत्र में बड़े उद्योग नदारत हैं।
  • औद्योगिक क्षेत्र मुख्य रूप से असम में चाय, पेट्रोलियम (कच्चे तेल), प्राकृतिक गैस आदि विकसित हुआ है तथा पूर्वोत्तर के अन्य क्षेत्रों में खनन, लकड़ी चीरने का कारखाना तथा इस्पात निर्माण इकाइयाँ देखने को मिलती है। इस क्षेत्र की पूरी क्षमता का दोहन होना बाकी है।
  • औद्योगिक रूप से NER (North Eastern Region) देश में सबसे पिछड़ा क्षेत्र बना हुआ है और असम को छोड़कर इस क्षेत्र के राज्यों में औद्योगिक विकास बहुत कम है। असम पारंपरिक चाय, तेल और लकड़ी आधारित उद्योगों के कारण थोड़ी बेहतर स्थिति में है।
  • मेघालय में भी लघु और मध्यम उद्योगों की स्थापना के परिणामस्वरूप कुछ हद तक विकास हुआ है।
  • इस क्षेत्र में भी औद्योगिक विकास की कमी में योगदान करने वाले कई कारक हैं, जैसे-
  1. खराब बुनियादी ढाँचा
  2. अपर्याप्त बिजली की आपूर्ति
  3. हिंसा तथा जबरन वसूली
  4. उत्पादन की उच्च लागत
  5. स्थानीय लोगों में उद्यमशीलता का अभाव
  6. सार्वजनिक क्षेत्र के निवेश का निम्न स्तर, आदि
  7. गुणवत्तापूर्ण रियल एस्टेट की अनुपलब्धता
  8. सीमा व्यापार
  • हाल के वर्षों में भारत सरकार की “पूर्व की ओर देखो नीति” ने पूर्वोत्तर को और अधिक महत्त्वपूर्ण और रणनीतिक बना दिया है।
  • इस क्षेत्र को चुनौतियों का सामना करने और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में विशाल बाज़ार के माध्यम से खुले अवसरों को भुनाने के लिये पर्याप्त सुविधाएँ प्रदान करनी होंगी।

पूर्वोत्तर में व्यापार

  • स्वतंत्रता के बाद की अवधि में व्यापार में काफी समस्याएँ आईं क्योंकि संप्रभु राष्ट्रों की सीमाओं को फिर से परिभाषित किया गया।
  • यही कारण है कि देश के अन्य राज्यों की अपेक्षा अधिक पिछड़े पूर्वोत्तर क्षेत्र में विकास की राह को सुनिश्चित करने के लिये और अधिक प्रयास किये जाने की आवश्यकता है।
  • एक्ट ईस्ट पालिसी पूर्वोत्तर क्षेत्र की स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे सकती है बशर्ते हम सीमा पार एक मज़बूत भूमि-आधारित व्यापार विकसित करें।
  • उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में व्यापार को बढ़ावा देने के लिये बुनियादी ढाँचे में निवेश और व्यापार सुविधा उपायों पर ध्यान दिये जाने की आवश्यकता है।
  • मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी परियोजनाओं का एक ब्लू प्रिंट पहले ही तैयार किया जा चुका है और इनमें से कई परियोजनाएँ जैसे- कलादान मल्टीमोडल हाईवे, निष्पादन के अंतिम चरण में है।
  • हाल ही में चटगाँव के पास अगरतला से अखौरा तक ब्रॉड गेज कनेक्टिविटी के निर्माण के लिये कार्य शुरू किया गया है। यह अगरतला और कोलकाता के बीच की दूरी को काफी हद तक कम कर देगा और चटगाँव बंदरगाह तक एक कुशल पहुँच प्रदान करेगा।
  • भारतमाला परियोजना के तहत अंतः-क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिये उत्तर-पूर्वी आर्थिक गलियारे को प्रस्तावित किया गया है। ब्रह्मपुत्र पर सात जलमार्ग टर्मिनलों के माध्यम से मल्टी-मोडल फ्रेट मूवमेंट प्रस्तावित है।
  • केंद्र ने पहले ही लॉजिस्टिक को बुनियादी ढाँचे के निवेश के रूप में अधिसूचित किया है।
  • लैंड पोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (Land Port Authority of India) ने सभी भूमि सीमा शुल्क स्टेशनों को अपने कब्जे में लेने और उन्हें वेयरहाउसिंग सुविधाओं के साथ एकीकृत चेक-पोस्ट के साथ अपग्रेड करने की इच्छा जताई है।
  • विदेश व्यापार क्षमताओं के निर्माण के लिये एक विशेष पहुँच और क्षमता निर्माण कार्यक्रम की आवश्यकता होगी।
  • व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल और क्रेता-विक्रेता के बीच नियमित बैठकें, उत्तर-पूर्व के पड़ोसी देशों, म्याँमार और बांग्लादेश के व्यवसायियों के बीच वार्ताएँ भी व्यापार को बढ़ावा देने में सहायक साबित होंगी।

निष्कर्ष


पिछले कुछ दशकों में पूर्वोत्तर के संपूर्ण क्षेत्र में सड़क, रेल और हवाई संपर्क और दूरसंचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। पिछले दो दशकों में यहाँ कई नए विश्वविद्यालय, मेडिकल कॉलेज और इंजीनियरिंग कॉलेज स्थापित हुए हैं। यहाँ एक आईआईटी और आईआईएम भी है। पूर्वोत्तर में सड़क निर्माण की 197 तथा रेलवे की 20 परियोजनाएँ निर्माणाधीन हैं जिनके ज़रिये पूर्वोत्तर के सभी राज्यों की राजधानियों को रेल मार्ग से जोड़ने की योजना है। अभी तक तीन राज्यों की राजधानियाँ ही रेल लाइन से जुड़ पाई हैं। बिजली की दो बड़ी परियोजनाओं पर भी काम चल रहा है साथ ही एक व्यापक दूरसंचार योजना भी लागू की गई है। राष्ट्र की मुख्यधारा से कटे रहने वाले पूर्वोत्तर के लोगों का शेष भारत से संपर्क और लगाव निश्चित रूप से बढ़ा है। ये योजनाएँ अगर तय समय पर अपने मुकाम तक पहुँच पाईं तो इससे पूर्वोत्तर की तस्वीर तो बदलेगी ही, भारत की एकता-अखंडता से जुड़ी एक बड़ी चिंता भी समाप्त हो जाएगी। 

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