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भारतीय अर्थव्यवस्था

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत

  • 07 Dec 2021
  • 10 min read

चर्चा में क्यों?

रक्षा क्षेत्र में आत्म निर्भर भारत पर बल देने के लिये प्रधान मंत्री ने हाल ही में सशस्त्र बल सेवा प्रमुखों को स्वदेशी रूप से डिज़ाइन और विकसित उपकरण सौंपे हैं।

प्रमुख बिंदु

  • रक्षा उपकरणों का वितरण: एचएएल द्वारा डिज़ाइन और विकसित किया गया हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टरों को वायु सेना प्रमुख को सौंप दिया गया।
  • भारतीय स्टार्टअप द्वारा डिज़ाइन और विकसित किये गए ड्रोन और यूएवी थल सेनाध्यक्ष को दिये गए।
  • डीआरडीओ द्वारा डिज़ाइन और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) द्वारा निर्मित नौसेना के जहाजों के लिये उन्नत इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट प्रधान मंत्री द्वारा नौसेना स्टाफ के प्रमुख को सौंप दिया गया।
  • यूपी डीआईसी का झाँसी नोड: प्रधानमंत्री ने यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (UP-DIC) के झाँसी नोड में 400 करोड़ रुपए की परियोजना की आधारशिला भी रखी।
  • झाँसी के अलावा इस गलियारे में आगरा, अलीगढ़, चित्रकूट, लखनऊ और कानपुर में नोड हैं।

रक्षा क्षेत्र में आत्म निर्भर भारत

  • रक्षा औद्योगिक गलियारा:
    • स्वदेशीकरण की ओर मार्च 2018 में एक महत्त्वपूर्ण कदम, जिसकी घोषणा वित्त मंत्री ने 2018 में की थी और इसने तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में दो रक्षा औद्योगिक गलियारे स्थापित करने का निर्णय लिया।
    • उत्तर प्रदेश कॉरिडोर का उद्देश्य रक्षा विनिर्माण का समर्थन करने के लिये उत्तर प्रदेश के बड़े MSME आधार को पुनर्जीवित करना है क्योंकि इसमें छह नोड हैं।
    • सरकार शुल्क कर, बिजली शुल्क, स्टांप शुल्क आदि में छूट और रियायतें दे रही है।
    • दोनों औद्योगिक गलियारे रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने के लिये सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख कदमों में से एक हैं।
  • स्वदेशीकरण के साथ आधुनिकीकरण: रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र
    • हाल ही में भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) ने झाँसी में शिलान्यास समारोह के साथ शुरुआत की है।
    • इस क्षेत्र में ब्रह्मोस एक प्रमुख निवेश है जो विशेष टाइटेनियम और मिश्र धातुओं आदि में लखनऊ में निजी क्षेत्र निवेश के ज़रिए आएगा।
    • भारतीय रक्षा निर्माताओं ने दोनों राज्य सरकारों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये हैं।

चुनौतियाँ

  • बहुत अधिक विलंब: पिछले पाँच वर्षों में भारत सरकार ने प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण के साथ 200 से अधिक रक्षा अधिग्रहण प्रस्तावों को मंज़ूरी दी है, जिसका मूल्य लगभग 4 ट्रिलियन रुपए है, लेकिन अधिकांश अभी भी प्रसंस्करण के अपेक्षाकृत प्रारंभिक चरण में हैं।
  • सार्वजनिक क्षेत्र संचालित कंपनियाँ : भारत में दुनिया के शीर्ष 100 सबसे बड़े हथियार उत्पादकों में से चार कंपनियाँ (भारतीय आयुध कारखाने, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL)) हैं।
    • ये सभी चार कंपनियाँ सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम हैं और घरेलू आयुध मांग के बड़े हिस्से को पूरा करने के लिये ज़िम्मेदार हैं।
    • सरकारें आमतौर पर 'मेक इन इंडिया' के बावजूद, निजी क्षेत्र पर रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों (DPSU) को विशेषाधिकार देने की प्रवृत्ति रखती हैं।
  • महत्त्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों की कमी: महत्त्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में खराब डिज़ाइन क्षमता, अनुसंधान एवं विकास में अपर्याप्त निवेश और प्रमुख उप-प्रणालियों और घटकों के निर्माण में असमर्थता स्वदेशी विनिर्माण में बाधा डालती है।
    • आर एंड डी प्रतिष्ठान, उत्पादन एजेंसियों (सार्वजनिक या निजी) और अंतिम उपयोगकर्त्ता के बीच संबंध बेहद कमज़ोर हैं।
  • लंबी निर्माण अवधि: एक विनिर्माण आधार का निर्माण पूंजी और प्रौद्योगिकी-गहन है और इसकी लंबी अवधि की अवधि है।
    • एक कारखाने के लिये क्षमता उपयोग के इष्टतम स्तर तक पहुँचने के लिये, इसमें पाँच से लेकर 10-15 साल तक का समय लग सकता है।
  • खराब विनिर्माण वातावरण: कड़े श्रम कानून, अनुपालन बोझ और कौशल की कमी, रक्षा में स्वदेशी विनिर्माण के विकास को प्रभावित करती है।
  • समन्वय की कमी: रक्षा मंत्रालय और औद्योगिक संवर्धन मंत्रालय के अतिव्यापी क्षेत्राधिकार भारत की रक्षा निर्माण की क्षमता को कम करते हैं।

शुरू की गई पहलें

  • रक्षा उत्पादन और निर्यात संवर्धन नीति 2020 (डीपीईपीपी 2020):
    • डीपीईपीपी 2020 को आत्मनिर्भरता और निर्यात के लिये देश की रक्षा उत्पादन क्षमताओं पर एक केंद्रित, संरचित और महत्त्व बल प्रदान करने के लिये एक व्यापक मार्गदर्शक दस्तावेज़ के रूप में परिकल्पित किया गया है।

आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र की दिशा में बहुआयामी कदम:

  • मेक इन इंडिया: 2014
    • निजी उद्योग को सशक्त बनाने के लिये फोकस करने के साथ इसमें प्रगतिशील परिवर्तन हुए हैं।
    • डीपीपी 2016 भारतीय IDDM (स्वदेशी रूप से डिज़ाइन, विकसित और निर्मित किया हुआ) नामक एक नई श्रेणी के साथ सामने आया।
    • यदि किसी भारतीय कंपनी ने भारतीय IDDM का विकल्प चुना, तो उसे अन्य सभी श्रेणियों पर वरीयता दी गई।
  • सामरिक भागीदारी:
    • एक रणनीतिक साझेदारी मॉडल भारतीय कंपनियों को विदेशी OEM के साथ सहयोग करने और प्रौद्योगिकीयों का हस्तांतरण प्राप्त करने, भारत में निर्माण और भारत में उन परियोजनाओं को बनाए रखने की क्षमता प्राप्त करने की अनुमति देता है।
    • कामकाज में पारंपरिक पनडुब्बियों के लिये पहला RFP 
  • सकारात्मक स्वदेशीकरण: 2020
    • पहली बार सरकार किसी वस्तु के आयात के लिये स्वयं पर प्रतिबंध लगा रही है क्योंकि सरकार स्वदेशी उद्योग को सशक्त बनाना चाहती है।
    • 101 वस्तुओं और 108 वस्तुओं की दो सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियाँ हैं जिनमें प्लेटफार्मों से लेकर हथियार प्रणालियों एवं सेंसर तक वस्तुओं की पूरी रेंज शामिल है।

आगे की राह

  • रक्षा मंत्रालय, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और सेवा मुख्यालय उद्योग को संभालने सहित सभी आवश्यक कदम उठाएँगे, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सूची में उल्लिखित समय-सीमा पूरी हो।
  • इससे भारतीय रक्षा निर्माताओं को विश्व स्तरीय बुनियादी ढाँचा तैयार करने, भारत को रक्षा में आत्मनिर्भर बनाने और निकट भविष्य में रक्षा निर्यात की क्षमता विकसित करने के सरकार के 'मेक इन इंडिया' विज़न में मदद मिलेगी।
  • रक्षा मंत्रालय से 'रक्षा उत्पादन और निर्यात संवर्धन नीति (DPEPP) 2020' का अंतिम संस्करण भी जारी करने की उम्मीद है।
  • आत्मनिर्भरता और निर्यात के लिये देश की रक्षा उत्पादन क्षमताओं पर एक केंद्रित, संरचित और अधिक बल प्रदान करने के लिये एक व्यापक मार्गदर्शक दस्तावेज़ के रूप में इसकी परिकल्पना की गई है।
  • भारत आज स्टार्टअप्स का दूसरा सबसे बड़ा हब है जिसका मतलब है कि इनोवेशन यानी नए विचार अधिक aa rhe हैं, यह मेक इन इंडिया की प्रक्रियाओं को तेज करेगा और लागत को कम करेगा और इससे पूरी दुनिया में भारत प्रतिस्पर्द्धी बनेगा।
  • नौसेना स्वदेशीकरण नवाचार संगठन ने पिछले एक साल में रक्षा उत्पादन के लिये 30 पेटेंट दायर किये हैं।
  • यह उद्योग को विकसित करने और दुनिया में प्रतिस्पर्द्धी होने तथा वैश्विक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये पहल करने पर बल देगा।
  • इसका उद्देश्य भारत को एक रक्षा उत्पादन केंद्र बनाना है और यदि भारत को भारतीय सुरक्षा क्षेत्र में शुद्ध सुरक्षा प्रदाता बनना है तो इन पहलुओं को ध्यान में रखना चाहिये।
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