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तारों में नाभिक-संश्लेषण

  • 20 May 2024
  • 2 min read

स्रोत: द हिंदू

तारों में नाभिक-संश्लेषण (Stellar Nucleosynthesis) वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा तारे अपने कोर के अंदर तत्त्वों का निर्माण करते हैं। इस तरह से नहीं बनने वाला एकमात्र तत्त्व हाइड्रोजन है, जो ब्रह्मांड में सबसे प्रचुर और सबसे हल्का तत्त्व है।

  • तारकीय कोर को दाब और ताप प्रभावित करते हैं। उल्लेखनीय है कि सूर्य के कोर में ताप 15 मिलियन डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाता है। इन कठोर परिस्थितियों में परमाणु नाभिकीय संलयन की प्रक्रिया से गुज़रते हैं।
    • हाइड्रोजन नाभिक, जो कि केवल एक प्रोटॉन है, p-p (प्रोटॉन-प्रोटॉन) अभिक्रिया में हीलियम नाभिक (दो प्रोटॉन और दो न्यूट्रॉन) के निर्माण हेतु एक साथ आता है
    • अधिक विशाल तारों में कार्बन-नाइट्रोजन-ऑक्सीजन (CNO) चक्र महत्त्वपूर्ण होता है, जहाँ इन तत्त्वों के नाभिक हीलियम सहित अन्य तत्त्वों के निर्माण हेतु अलग-अलग तरीकों से एक साथ आते हैं।
      • CNO चक्र में हाइड्रोजन का हीलियम में संलयन होता है, जो कार्बन, नाइट्रोजन और ऑक्सीजन समस्थानिकों द्वारा उत्प्रेरित होता है।
    • जैसे ही किसी तारे में संलयन के दौरान नाभिक समाप्त हो जाता है, उसका कोर संकुचित जाता है, जिससे तापमान बढ़ जाता है और आगे नाभिकीय संलयन आरंभ हो जाता है।
    • यह प्रक्रिया तब तक जारी रहती है जब तक तारा लोहे (Fe) का उत्पादन शुरू नहीं कर देता, जो सबसे हल्का तत्त्व है जिसके संलयन से निकलने वाली ऊर्जा की तुलना में अधिक ऊर्जा की खपत होती है।
      • लोहे से भारी तत्त्वों को किसी तारे के बाहर तभी संश्लेषित किया जा सकता है जब वह सुपरनोवा की स्थिति में पहुँच जाता है।

और पढ़ें: नाभिकीय संलयन ऊर्जा

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