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Rapid Fire (करेंट अफेयर्स): 22 जनवरी, 2021

  • 22 Jan 2021
  • 8 min read

क्वांटम कंप्यूटिंग एप्लीकेशन प्रयोगशाला

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने देश की पहली क्वांटम कंप्यूटिंग एप्लीकेशन प्रयोगशाला विकसित करने के लिये अमेज़न वेब सर्विसेज़ (AWS) के साथ सहयोग की घोषणा की है। इस नई प्रयोगशाला का उद्देश्य कंप्यूटर डेवलपरों, वैज्ञानिकों और शैक्षणिक समुदायों को क्वांटम कंप्यूटिंग के विकास हेतु उपयुक्त माहौल प्रदान करना है। भारतीय वैज्ञानिक समुदाय को उन्नत प्रौद्योगिकियों तक पहुँच प्रदान करना देश में वैज्ञानिक प्रगति की दिशा में महत्त्वपूर्ण हो सकता है। इस प्रयोगशाला में शोधकर्त्ताओं से विषय विशेषज्ञों के साथ कार्य करने हेतु आवेदन आमंत्रित किया जाएगा। चयनित आवेदकों को क्वांटम कंप्यूटिंग हार्डवेयर, सिमुलेटर और प्रोग्रामिंग उपकरण प्रदान किये जाएंगे। हालाँकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यह नई प्रयोगशाला ‘नेशनल मिशन ऑन क्वांटम टेक्नोलॉजीज़ एंड एप्लीकेशन्स’ (NM-QTA) के दायरे में आती है अथवा नहीं। केंद्र सरकार ने बीते वर्ष केंद्रीय बजट (2020-21) में नेशनल मिशन ऑन क्वांटम टेक्नोलॉजीज़ एंड एप्लीकेशन्स (NM-QTA) के तहत पाँच वर्ष के लिये 8,000 करोड़ रुपए खर्च करने की घोषणा की थी। इस मिशन का उद्देश्य क्वांटम कंप्यूटिंग से जुड़ी तकनीकों को विकसित करना एवं भारत को अमेरिका एवं चीन के बाद इस क्षेत्र में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बनाना है। क्वांटम कंप्यूटिंग तकनीक के महत्त्व को देखते हुए तमाम देशों द्वारा इस क्षेत्र में निवेश किया जा रहा है, चीन ने अपनी ‘नेशनल लेबोरेटरी फॉर क्वांटम इन्फार्मेशन साइंसेज़’ में 10 बिलियन डॉलर का निवेश किया है।

‘अवलोकन’ सॉफ्टवेयर 

हाल ही में कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा ने ‘अवलोकन’ नाम से एक सॉफ्टवेयर लॉन्च किया है, जो राज्य सरकार को राज्य में लागू कुल 1,800 कार्यक्रमों पर राज्य सरकार के 39 विभागों द्वारा किये गए व्यय से संबंधित डेटा प्राप्त करने में सक्षम बनाएगा। ‘अवलोकन’ सॉफ्टवेयर एक पारदर्शी ई-गवर्नेंस उपकरण है, जो कि राज्य में विभिन्न विकास कार्यक्रमों के तहत सरकारी अनुदान और आवंटन से संबंधित निर्वाचन-क्षेत्रवार आँकड़े प्रदान करेगा। इन आँकड़ों के आधार पर सरकार को धन जारी करने संबंधी निर्णय लेने में मदद मिलेगी, यह सरकार को उपलब्ध वित्त संसाधनों का इष्टतम प्रयोग करने में सक्षम बनाएगा। राज्य के सभी ज़िला आयुक्तों को नियमित अंतराल पर सॉफ्टवेयर में डेटा रिकॉर्ड करने का निर्देश दिया गया है। इस सॉफ्टवेयर को कर्नाटक सरकार के तहत सेंटर फॉर स्मार्ट गवर्नेंस (CSG) द्वारा विकसित किया गया है, वहीं इस सॉफ्टवेयर पर नियंत्रण और इसके स्वामित्व का अधिकार राज्य सरकार के योजना, कार्यक्रम निगरानी एवं सांख्यिकी विभाग के पास हैं।

राष्‍ट्रीय स्‍टार्टअप सलाहकार परिषद

हाल ही में सरकार ने राष्‍ट्रीय स्‍टार्टअप सलाहकार परिषद में 28 गैर-आधिकारिक सदस्यों को नामांकित किया है, जिसमें बायजू के संस्थापक बायजू रविंद्रन, ज़ेस्टमनी (ZestMoney) के सह-संस्थापक लिज़ी चैपमैन और एक्सिलर वेंचर्स के अध्यक्ष क्रिस गोपालकृष्णन समेत कई अन्य स्टार्टअप्स के संस्थापक और निवेशक शामिल हैं। राष्‍ट्रीय स्‍टार्टअप सलाहकार परिषद के गैर-आधिकारिक सदस्यों का कार्यकाल दो वर्ष का होगा। उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (DPIIT) ने देश में नवाचार और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिये एक अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने हेतु आवश्यक उपायों पर सरकार को सलाह देने के लिये बीते वर्ष जनवरी माह में एक राष्ट्रीय स्टार्टअप सलाहकार परिषद की स्थापना की थी। यह परिषद आम नागरिकों विशेष तौर पर छात्रों के बीच नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिये उपाय सुझाएगी; अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों और अर्द्ध-शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा देने का प्रयास करेगी; सृजन, संरक्षण एवं बौद्धिक संपदा अधिकारों के व्यावसायीकरण को बढ़ावा देगी तथा इसे आसान बना देगी और लागत को कम करके व्यवसायों को शुरू करने, संचालित करने तथा बढ़ावा देने की दिशा में कार्य करेगी, जिसमें गैर-आधिकारिक सदस्यों की विशेषज्ञता का लाभ मिलेगा।

मनरेगा कार्य दिवसों में वृद्धि 

रोज़गार के अवसरों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से उत्तराखंड सरकार ने घोषणा की है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) के तहत कार्य दिवसों की संख्या को 100 से बढ़ाकर 150 कर दिया जाएगा। आँकड़ों की मानें तो अब तक राज्य में कुल 12.19 लाख जॉब कार्ड प्रदान किये जा चुके हैं, जिसमें से 2.66 लाख जॉब कार्ड वर्ष 2020 में दिये गए थे। यह निर्णय राज्य रोज़गार गारंटी परिषद की हालिया बैठक के दौरान लिया गया। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने राज्य में उन बेरोज़गार लोगों को सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से ‘उत्तराखंड आजीविका एप’ भी लॉन्च किया, जो कि रोज़गार के अवसरों की तलाश में हैं। ध्यातव्य है कि महामारी की शुरुआत के बाद से ही मनारेगा के तहत कार्य दिवसों की संख्या में बढ़ोतरी करने की मांग की जा रही थी, क्योंकि महामारी और लॉकडाउन के कारण लाखों की संख्या में बेरोज़गार प्रवासी श्रमिक अपने गाँवों में लौट गए और अब उनमें से कई पूर्णतः मनरेगा मज़दूरी पर निर्भर हैं।

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