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Rapid Fire (करेंट अफेयर्स): 11 अगस्त, 2020

  • 11 Aug 2020
  • 8 min read

राजधानी दिल्ली का स्कूल शिक्षा बोर्ड

हाल ही में देश की राजधानी दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने सूचना दी है कि दिल्ली का अपना स्कूल शिक्षा बोर्ड अगले वर्ष से कार्य करना प्रारंभ कर देगा। हालाँकि अन्य राज्यों के विपरीत दिल्ली के अपने स्कूल शिक्षा बोर्ड को दिल्ली के सरकार विद्यालयों पर अनिवार्य रूप से लागू नहीं किया जाएगा अथवा उन्हें इसे अपनाने के लिये मजबूर नहीं किया जाएगा। दिल्ली के स्कूल शिक्षा बोर्ड की स्थापना से संबंधित योजना का विवरण देते हुए उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली का नया स्कूल शिक्षा बोर्ड, केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) में प्रस्तावित सुधारों के अनुरूप कार्य करेगा और यह बोर्ड केवल वर्ष के अंत में होने वाली परीक्षाओं के विपरीत विद्यार्थियों के सतत् मूल्यांकन पर ध्यान  देगा। इस संबंध में सूचना देते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि ‘दिल्ली सरकार ने हाल ही में प्रस्तावित बोर्ड के साथ-साथ पाठ्यक्रम सुधारों पर काम करने के लिये दो समितियों का गठन किया है, और सब कुछ सही रहने पर यह बोर्ड अगले वर्ष तक कार्य करना शुरू कर देगा।’ उपमुख्यमंत्री ने बताया कि ‘प्रारंभ में, लगभग 40 विद्यालयों को इस नए बोर्ड से संबद्ध किया जाएगा, जो कि सरकारी या निजी हो सकते हैं, हालाँकि प्रदेश के किसी भी विद्यालय के लिये इसमें शामिल होना अनिवार्य नहीं होगा। गौरतलब है कि देश भर में अन्य राज्यों में अकसर यह देखा जाता है कि राज्य के निजी विद्यालय अपने लिये किसी भी प्रकार के बोर्ड का चयन करने के लिये स्वतंत्र होते हैं, जबकि राज्य के सरकारी विद्यालयों को अनिवार्य रूप से राज्य सरकार के बोर्ड का पालन करना पड़ता है। इस प्रकार दिल्ली सरकार एक ऐसे समृद्ध और उपयोगी बोर्ड का गठन करना चाहती है, जिसमें विद्यालय अपनी इच्छा से शामिल हों। 

वी.वी. गिरि

10 अगस्त, 2020 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पूर्व राष्ट्रपति वी. वी. गिरी (V. V. Giri) की जयंती पर राष्ट्रपति भवन में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। वी.वी. गिरि के नाम से प्रसिद्ध भारत के चौथे राष्ट्रपति वराहगिरि वैंकट गिरि का जन्म 10 अगस्त, 1894 को ओडिशा के गंजाम ज़िले के बेरहामपुर में हुआ था। वी.वी. गिरि ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा बेरहामपुर से ही प्राप्त की और उसके पश्चात् वे कानून का अध्ययन करने के लिये आयरलैंड चले गए, वहाँ वे भारत और आयरलैंड दोनों देशों की राजनीति में काफी सक्रिय थे, जिसके चलते उन्हें 1 जून, 1916 को आयरलैंड छोड़ना पड़ा। वर्ष 1916 में वे भारत लौटे और मद्रास उच्च न्यायालय में शामिल हो गए। साथ ही वे कांग्रेस में शामिल होकर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भी सक्रिय हो गए। वर्ष 1934 में वे इम्पीरियल लेजिस्लेटिव असेंबली के सदस्य के तौर पर चुने गए और वर्ष 1937 तक इस पद पर रहे। वर्ष 1951 के आम चुनावों में, वह मद्रास में लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से पहली लोकसभा के लिये चुने गए थे और वर्ष 1952-54 के बीच केंद्रीय श्रम मंत्री के तौर पर कार्य किया। जिसके बाद वर्ष 1957 से वर्ष 1967 के बीच उन्होंने उत्तर प्रदेश (1957-1960), केरल (1960-1965) और कर्नाटक (1965-1967) के राज्यपाल के रूप में कार्य किया। 13 मई, 1967 को वी.वी. गिरि भारत के तीसरे उपराष्ट्रपति के तौर पर चुने गए और वे लगभग 2 वर्ष तक इस पद पर रहे, ज्ञात हो कि वे ऐसे पहले उपराष्ट्रपति थे जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा नहीं किया था। वर्ष 1969 में राष्ट्रपति चुनाव हुए और वी.वी. गिरि को भारत के चौथे राष्ट्रपति के तौर पर चुन लिया गया। वी.वी. गिरि वर्ष 1974 तक भारत के राष्ट्रपति रहे, वर्ष 1975 में उन्हें ‘भारत रत्न' से सम्मानित किया गया और 24 जून, 1980 को उनकी मृत्यु हो गई। 

राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन डेशबोर्ड 

हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नई दिल्ली में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से नेशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन डेशबोर्ड का उद्घाटन किया है। ध्यातव्य है कि यह ऑनलाइन डैशबोर्ड देश भर में 'राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन' (National Infrastructure Pipeline- NIP) से संबंधित जानकारी के लिये सभी हितधारकों हेतु एक-स्टॉप समाधान के रूप में कार्य करेगा। इस डेशबोर्ड का संचालन इंडिया इनवेस्टमेंट ग्रिड (India Investment Grid-IIG) द्वारा किया जा रहा है। वर्ष 2019 के स्वतंत्रता दिवस पर भारतीय प्रधानमंत्री ने कहा था कि अगले 5 वर्षों में आधारभूत अवसंरचना पर 100 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा। इसी का अनुसरण करते हुए 31 दिसंबर, 2019 को 103 करोड़ रुपए की लागत वाली राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन शुरू की गई। इसमें विभिन्न क्षेत्रों के अंतर्गत 6500 से अधिक परियोजनाएँ शुरू की जाएगी। अनुमान के अनुसार, भारत को अपनी विकास दर को बनाए रखने के लिये वर्ष 2030 तक बुनियादी ढाँचे पर 4.5 ट्रिलियन डॉलर खर्च करने की आवश्यकता होगी। 

इंदिरा वन मितान योजना

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने वनवासियों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से ‘इंदिरा वन मितान योजना’ (Indira Van Mitan Yojan) शुरू करने की घोषणा की है। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि इस योजना के तहत, वन आधारित आर्थिक गतिविधियों का प्रबंधन करने के लिये आदिवासी बहुल क्षेत्रों के लगभग 10,000 गाँवों में युवाओं के समर्पित समूह का गठन किया जाएगा। युवाओं के ये समूह अनुसूचित क्षेत्रों में वन उपज की खरीद, प्रसंस्करण और विपणन का काम देखेंगे। इस संबंध में जारी सूचना के अनुसार, प्रत्येक समूह में 10 से 15 सदस्य शामिल होंगे और इस योजना के तहत राज्य सरकार का लक्ष्य अनुसूचित क्षेत्रों के 19 लाख परिवारों को इसके साथ जोड़ना है।

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