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Rapid Fire (करेंट अफेयर्स): 09 जनवरी, 2021

  • 09 Jan 2021
  • 7 min read

भारतीय भाषाओं में निःशुल्क डोमेन

नेशनल इंटरनेट एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NIXI) ने घोषणा की है कि वह आईएन (in) डोमेन के साथ पंजीयन कराने वाले प्रत्येक आवेदक को 22 आधिकारिक भारतीय भाषाओं में से किसी एक में निःशुल्क आईडीएन यानी अंतर्राष्ट्रीय डोमेन नाम का विकल्प देगा। आवेदक को स्थानीय भाषा में एक ई-मेल भी निःशुल्क मिलेगा। यह प्रस्ताव स्थानीय भाषा की सामग्री के प्रसार को प्रोत्साहित करने के लिये तैयार किया गया है। यह पेशकश उन नए डॉट आईएन (.in) उपयोगकर्त्ताओं के लिये मान्य है, जो 31 जनवरी, 2021 तक अपना पंजीकरण कराते हैं। यह सुविधा उन वर्तमान उपयोगकर्त्ताओं के लिये भी उपलब्ध है, जो जनवरी 2021 में अपने डोमेन का नवीनीकरण करेंगे। नेशनल इंटरनेट एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NIXI) वर्ष 2003 से कार्यरत एक गैर-लाभकारी संगठन है, जो इंटरनेट एक्सचेंज संबंधी गतिविधियों के माध्यम से भारत के नागरिकों के बीच इंटरनेट तकनीक का प्रसार करने हेतु प्रतिबद्ध है। संगठन के मुख्य कार्यों में इंटरनेट एक्सचेंज के माध्यम से विभिन्न ISPs में और ISP व CDN के बीच इंटरनेट डेटा का आदान-प्रदान करना, भारत के लिये आईएन (in) डोमेन व भारत (Bharat) डोमेन का पंजीयन, प्रबंधन तथा संचालन करना और इंटरनेट प्रोटोकॉल ((IPv4/IPv6) का प्रबंधन एवं संचालन करना आदि शामिल हैं।

क्लेयर पोलोसक

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच जारी तीसरे टेस्ट मैच में ‘फोर्थ अंपायर’ के रूप में शामिल होने के साथ ही ऑस्ट्रेलिया की क्लेयर पोलोसक पुरुषों के टेस्ट मैच में अंपायरिंग करने वाली पहली महिला बन गई हैं। 32 वर्षीय क्लेयर पोलोसक ने इससे पूर्व ICC के डिविज़न 2 में नामीबिया और ओमान के बीच वर्ष 2019 में विंडकॉक में खेले गए पुरुष वनडे मैच में पहली महिला ऑन-फील्ड अंपायर होने का सम्मान भी हासिल किया था। टेस्ट मैचों से संबंधित ICC नियमों के अनुसार, ‘फोर्थ अंपायर’ के रूप में घरेलू क्रिकेट बोर्ड द्वारा ICC अंपायरों के अंतर्राष्ट्रीय पैनल में से किसी एक व्यक्ति को नियुक्त किया जाता है। ‘फोर्थ अंपायर’ के कार्यों में नई गेंद लाना, लाइट मीटर में बैटरी की जाँच करना, लंच के दौरान पिच का अवलोकन करना ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी हस्तक्षेप के कारण खेल न रुके। साथ ही ‘फोर्थ अंपायर’ आवश्यकता पड़ने पर मैच के ‘थर्ड अंपायर’ का स्थान भी ले सकता है।

कज़ाख्स्तान में मृत्युदंड की समाप्ति

हाल ही में कज़ाख्स्तान के राष्ट्रपति ने नागरिक और राजनीतिक अधिकारों पर अंतर्राष्ट्रीय नियम (ICCPR) के दूसरे वैकल्पिक प्रोटोकॉल की पुष्टि करने संबंधी प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर दिये हैं, जिसके साथ ही कज़ाख्स्तान में मौत की सज़ा को पूर्णतः समाप्त कर दिया गया है। ज्ञात हो कि कज़ाख्स्तान में फाँसी की सज़ा पर वर्ष 2003 में रोक लगा दी गई थी, किंतु इसके बावजूद न्यायालयों द्वारा कुछ विशिष्ट मामलों जैसे- ‘आतंकी कृत्यों’ में दोषियों को मौत की सज़ा दी जा रही थी, जिसे अब पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है। कज़ाख्स्तान में आजीवन कारावास को वर्ष 2004 में वैकल्पिक सज़ा के रूप में पेश किया गया था। नागरिक और राजनीतिक अधिकारों पर अंतर्राष्ट्रीय नियम (ICCPR) को वर्ष 1966 में अपनाया गया और वर्ष 1976 से लागू किया गया, इसे अब तक कुल 173 देशों द्वारा स्वीकृति दी गई है। इससे संबंधित दूसरे वैकल्पिक प्रोटोकॉल, जो कि मृत्युदंड के उन्मूलन से संबंद्ध है, को 15 दिसंबर, 1989 को अपनाया गया था और यह वर्ष 1991 में लागू हुआ। इस प्रोटोकॉल के तहत सभी देश मृत्युदंड की सज़ा का प्रावधान नहीं करेंगे और अपने क्षेत्राधिकार में उसे समाप्त करने का प्रयास करेंगे। प्रोटोकॉल के अंतर्गत मृत्युदंड की अनुमति केवल युद्ध काल में होगी।

भारतीय प्रवासी दिवस

भारत के विकास में प्रवासी भारतीयों के योगदान को चिह्नित करने के लिये प्रतिवर्ष 9 जनवरी को भारतीय प्रवासी दिवस का आयोजन किया जाता है। प्रवासी भारतीय दिवस मनाने का निर्णय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने लिया था। ज्ञात हो कि 9 जनवरी, 1915 के ही दिन महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत वापस आए थे, इसलिये 9 जनवरी को प्रवासी भारतीय दिवस के आयोजन के लिये चुना गया था। पहले प्रवासी भारतीय दिवस का आयोजन 9 जनवरी, 2003 को नई दिल्ली में हुआ था। इस वर्ष प्रवासी भारतीय दिवस का विषय ‘आत्मनिर्भर भारत में योगदान’ है। प्रवासी भारतीय दिवस का प्रमुख उद्देश्य प्रवासी भारतीय समुदाय की उपलब्धियों को मंच प्रदान कर उनको दुनिया के सामने लाना है। साथ ही यह दिवस अप्रवासी भारतीयों की भारत के प्रति सोच, भावना की अभिव्यक्ति, देशवासियों के साथ सकारात्मक बातचीत के लिये भी एक मंच उपलब्ध कराता है।

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