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Rapid Fire (करेंट अफेयर्स): 07 जनवरी, 2023

  • 07 Jan 2023
  • 3 min read

कालाज़ार रोग 

देश में वर्ष 2007 से 2022 के बीच कालाज़ार के मामलों में 98.7 प्रतिशत की कमी आई है। वर्ष 2007 में यह संख्‍या 44,533 थी जो वर्ष 2022 में घटकर 834 रह गई। देश भर में 632 ऐसे प्रखंड हैं जहाँ दस हज़ार की आबादी के बीच कालाज़ार के मामले एक से भी कम रहे हैं। आँत का लीशमैनियासिस, जिसे कालाज़ार के रूप में भी जाना जाता है, में बुखार, वज़न में कमी, प्लीहा और यकृत में सूजन आदि लक्षण देखे जाते हैं। यह एक उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग (Neglected Tropical Disease- NTD) है जिससे भारत सहित लगभग 100 देश प्रभावित हैं। NTD संचारी रोगों का एक विविध समूह है जो उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय स्थितियों वाले 149 देशों में व्याप्त हैं। यह लीशमैनिया (Leishmania) नामक परजीवी के कारण होता है जो बालू मक्खियों (Sand Flies) के काटने से फैलता है। लीशमैनियासिस के तीन प्रकार हैं- आँत का लीशमैनियासिस, त्वचीय (Cutaneous) लीशमैनियासिस, श्लेष्मत्वचीय (Mucocutaneous) लीशमैनियासिस। भारत में सामान्यतः कालाज़ार के नाम से जाना जाने वाले आँत का लीशमैनियासिस का इलाज न किये जाने पर यह घातक हो सकता है।

वन वीक वन लैब

नई दिल्ली में विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी मंत्रालय द्वारा "वन वीक वन लैब" अभियान का शुभारंभ किया गया। इस अभियान की घोषणा CSIR लीडरशिप सम्मेलन में की गई। इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत में तकनीकी सफलताओं एवं नवाचारों को प्रदर्शित करना है जिससे देश में नवाचार संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही यह अभियान देश भर में फैले 37 वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) प्रयोगशालाओं एवं संस्थानों में से प्रत्येक में आयोजित किया जाएगा। "वन वीक वन लैब" अभियान विभिन्न क्षेत्रों में विशेषज्ञता, नवाचार और तकनीकी सफलता को प्रदर्शित करेगा। इस दौरान हर प्रयोगशाला में एक सप्ताह का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा जिसमें स्टार्टअप, छात्र और समाज के विभिन्न वर्ग शामिल होंगे।

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