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Rapid Fire (करेंट अफेयर्स): 04 सितंबर, 2020

  • 04 Sep 2020
  • 7 min read

असम धरोहर विधेयक

हाल ही में असम विधानसभा ने मानसून सत्र के समापन दिवस पर राज्य की ऐसी मूर्त विरासत की रक्षा, संरक्षण और पुनर्स्थापन के लिये एक विधेयक पारित किया है, जो कि वर्तमान में किसी भी राष्ट्रीय या राज्य कानून के तहत शामिल नहीं है। असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने कहा कि असम (मूर्त) धरोहर सुरक्षा, संरक्षण, परिरक्षण और रखरखाव विधेयक, 2020 का पारित होना वर्ष 1985 के असम समझौते के खंड 6 को लागू करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इस विधेयक में संग्रहालय वस्तुओं (Museum Objects) जैसे सिक्के, मूर्तियों, पांडुलिपियों, पुरालेखों या कला और शिल्प कौशल के अन्य कार्य और स्वदेशी लोगों की सभी सांस्कृतिक कलाकृतियों को शामिल किया गया है। यह विधेयक असम की मूर्त विरासत की रक्षा, संरक्षण, रखरखाव और जीर्णोद्धार का प्रयास करता है। अधिनियम में उन सभी धरोहरों को शामिल किया जाएगा जो कम-से-कम 75 वर्ष से अस्तित्त्व में हैं। इस विधेयक के तहत उन धरोहर स्थलों को शामिल नहीं किया जाएगा, जिन्हें संसद द्वारा राष्ट्रीय महत्त्व के रूप में घोषित किया गया है अथवा जिन्हें असम प्राचीन स्मारक और अभिलेख अधिनियम, 1959 के तहत कवर किया गया है। असम समझौते की धारा-6 में असमिया लोगों की सांस्कृतिक, सामाजिक, भाषायी पहचान और धरोहर के संरक्षण तथा उसे बढ़ावा देने के लिये उचित संवैधानिक, विधायी तथा प्रशासनिक उपाय करने का प्रावधान है। 

जम्मू-कश्मीर जैव विविधता परिषद

हाल ही में जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने केंद्र शासित प्रदेश में जैविक घटकों के संरक्षण और उसके घटकों के सतत् उपयोग के लिये 10 सदस्यीय परिषद का गठन किया। इस संबंध में जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, राज्य के प्रधान महा वनसंरक्षक (Principal Chief Conservator of Forests) इस 10 सदस्यीय पैनल के अध्यक्ष होंगे, साथ ही इस पैनल में पाँच गैर-सरकारी सदस्य भी शामिल होंगे। वहीं जम्मू-कश्मीर के वन अनुसंधान संस्थान के निदेशक इस परिषद के सदस्य सचिव के रूप में कार्य करेंगे। अधिसूचना के अनुसार परिषद के गैर-सरकारी सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्ष की अवधि का होगा। प्रदेश के वित्त विभाग की सहमति से यह एक कोष का गठन करेगी, जिसे ‘जम्मू और कश्मीर जैव विविधता परिषद कोष’ (Jammu and Kashmir Biodiversity Council Fund) के रूप में जाना जाएगा और इसमें सभी शुल्क, प्रभार और परिषद द्वारा प्राप्त लाभ राशि डाली जाएगी। यह परिषद राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के परामर्श से, जैव विविधता से संबंधित मुद्दों में अनुमोदन प्राप्त करने के लिये प्रारूप और प्रक्रियाओं को सूचित करेगा।

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिज़र्व

असम सरकार ने काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान (Kaziranga National Park) में 3,000 हेक्टेयर से अधिक अतिरिक्त भूमि शामिल करने को मंज़ूरी दी है। ध्यातव्य है कि यह बेहतर वन्यजीव संरक्षण और भविष्य में मानव तथा वन्यजीवों के बीच संघर्ष की स्थिति को कम करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। अतिरिक्त भूमि शामिल होने के साथ ही राष्ट्रीय उद्यान का कुल क्षेत्रफल बढ़कर 914 वर्ग किमी हो जाएगा। ध्यातव्य है कि इससे पूर्व राष्ट्रीय उद्यान में वर्ष 2016 में 195 वर्ग किमी. भूमि शामिल की गई थी, जिससे काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान को ओरंग राष्ट्रीय उद्यान से जोड़ा गया था। काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान असम राज्य में स्थित है। उद्यान में लगभग 250 से अधिक मौसमी जल निकाय (Water Bodies) हैं, इसके अलावा डिपहोलू नदी (Dipholu River) इसके मध्य से बहती है। काजीरंगा में संरक्षण प्रयासों का अधिकांश ध्यान 'बड़ी चार' प्रजातियों- राइनो (Rhino), हाथी (Elephant), रॉयल बंगाल टाइगर (Royal Bengal Tiger) और एशियाई जल भैंस (Asiatic Water Buffalo) पर केंद्रित है। काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान विश्व में लुप्तप्राय एक सींग वाले गैंडों का सबसे बड़ा निवास स्थान है। उद्यान में लगभग 2,400 गैंडे और 121 बाघ हैं।

बांग्लादेश को त्रिपुरा से जोड़ता नया जलमार्ग

त्रिपुरा और बांग्लादेश को अंतर-देशीय जलमार्ग से जोड़ने के लिये बांग्लादेश के दाउदकंडी से त्रिपुरा के सोनमुरा तक ट्रायल रन की शुरुआत हो गई है। इस ट्रायल के हिस्से के रूप में बांग्लादेश के दाउदकंडी से एक जहाज़ त्रिपुरा के सोनमुरा के लिये रवाना हुआ है, जो कि 93 किलोमीटर का रास्ता तय करते हुए अनुमानतः 5 सितंबर तक भारत पहुँचेगा। इस जलमार्ग के शुरू होने से पूर्वोत्तर के राज्यों को खासा फायदा मिलेगा और भारत तथा बांग्लादेश के बीच कारोबार में भी बढ़ोतरी होगी। मौजूदा कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी के दौर में अंतर-देशीय जलमार्ग के माध्यम से उन्नत कनेक्टिविटी दोनों देशों (भारत-बांग्लादेश) के व्यापारियों और व्यापारिक समुदायों के लिये परिवहन का एक किफायती, तेज़, सुरक्षित और स्वच्छ माध्यम प्रदान करेगी।

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