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प्रिलिम्स फैक्ट्स: 07 सितंबर, 2020

  • 07 Sep 2020
  • 15 min read

चंद्रयान-1

Chandrayaan-1

हाल ही में केंद्रीय परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री ने बताया कि इसरो (ISRO) के चंद्रयान-1 (Chandrayaan-1) मिशन द्वारा भेजे गए कुछ चित्र चंद्रमा पर पृथ्वी के वातावरण के संभावित प्रभाव को इंगित करते हैं।  

Chandrayaan-I

प्रमुख बिंदु:

  • चंद्रयान-1 द्वारा भेजे गए चित्रों में चंद्रमा के ध्रुवों पर जंग के अवशेष दिखाई पड़े हैं जिसके आधार पर नासा के वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि चंद्रमा पर लौह पदार्थों में जंग लगने में पृथ्वी का अपना वातावरण सहायता कर रहा है।    
    • गौरतलब है कि चंद्रमा की सतह लौह समृद्ध चट्टानों के लिये जानी जाती है किंतु वहाँ जल एवं ऑक्सीजन की उपस्थिति ज्ञात नहीं है जो किसी लोहे में जंग लगने का मुख्य कारण है।

चंद्रयान-1 (Chandrayaan-1):

  • चंद्रयान-1 (भारत का प्रथम चंद्र मिशन) को 22 अक्तूबर, 2008 को प्रमोचित किया गया था।
  • यह अंतरिक्षयान का उद्देश्य चंद्रमा की सतह के विस्तृत नक्शे एवं पानी के अंश और हीलियम की खोज करना है।
  • इसके अतिरिक्त इसका उद्देश्य चंद्रमा की सतह पर मैग्नीशियम, एल्यूमिनियम, सिलिकॉन, कैल्शियम, आयरन एवं टाइटेनियम जैसे खनिजों व रासायनिक तत्वों के वितरण के साथ-साथ यूरेनियम एवं थोरियम जैसे उच्च परमाणु संख्या वाले तत्त्वों की खोज करना है।
  • इस मिशन को दो वर्षों के लिये भेजा गया था किंतु 29 अगस्त, 2009 को इससे अचानक रेडियो संपर्क टूट गया जिसके कुछ दिनों बाद ही इसरो ने आधिकारिक रूप से इस मिशन को समाप्त करने की घोषणा कर दी थी।
  • वर्ष 2017 में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने इसे फिर से ढूँढ निकाला था।

चंद्रयान-3 (Chandrayaan-1): 

  • चंद्रयान-3, चंद्रयान-2 का उत्तराधिकारी है और यह चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग का प्रयास करेगा। गौरतलब है कि चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर की हार्ड लैंडिंग के कारण यह चंद्रमा की सतह पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था।
  • चंद्रयान-3 को वर्ष 2021 तक लॉन्च किये जाने की संभावना है। 


व्यापार सुधार कार्य योजना

Business Reform Action Plan

हाल ही में केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री ने व्यापार सुधार कार्य योजना (Business Reform Action Plan- BRAP) के तहत कारोबारी सुगमता के आधार पर राज्यों की रैंकिंग के चौथे संस्करण की घोषणा की।

Business-Reform-Action-Plan

प्रमुख बिंदु:

  • व्यापार सुधार कार्य योजना (BRAP) के आधार पर राज्यों की रैंकिंग तय करने का कार्य वर्ष 2015 में शुरू किया गया था।  
  • अब तक राज्यों की इस आधार पर रैंकिंग की सूची वर्ष 2015, 2016 एवं 2017-18 में जारी की गई थी। 
  • व्यापार सुधार कार्य योजना (2018-19) में करोबार की स्थितियाँ बेहतर बनाने के लिये 180 मुख्य मानक तय किये गए हैं जिनमें 12 व्यावसायिक विनियामक क्षेत्र जैसे- सूचना तक पहुँच, एकल खिड़की प्रणाली, श्रम एवं पर्यावरण आदि शामिल हैं।
  • कारोबारी सुगमता के मामले में प्रदर्शन के आधार पर राज्यों की रैंकिंग तय करते समय स्वस्थ्य प्रतिस्पर्द्धा एवं बड़े स्तर पर निवेश आकर्षित करने का उद्देश्य हासिल करने का प्रयास किया गया है।
  • राज्य सुधार कार्य योजना 2019 के तहत शीर्ष दस राज्यों की सूची इस प्रकार है:- आंध्रप्रदेश, उत्तरप्रदेश, तेलंगाना, मध्यप्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, गुजरात।


 स्टार्ट-अप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम

Start-Up Village Entrepreneurship Programme

‘स्टार्ट-अप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम’ (Start-Up Village Entrepreneurship Programme- SVEP) ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमों का प्रसार कर रहा है और ग्रामीण उद्यमियों का सृजन कर रहा है।  

Rural-Development

प्रमुख बिंदु:

  • इस कार्यक्रम ने अगस्त 2020 के आँकड़ों के अनुसार, देश के 23 राज्यों के 153 ब्लॉकों में व्यवसाय सहायता सेवाओं एवं पूँजी प्रेरित करने के बारे में सहायता प्रदान की है। 
  • इस कार्यक्रम के द्वारा सामुदायिक संसाधन व्यक्ति-उद्यम संवर्द्धन (Community Resource Person-Enterprise Promotion) के लगभग 2000 प्रशिक्षित कैडर ग्रामीण उद्यमियों को सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं। जिनसे लगभग 100000 उद्यमी सहायता प्राप्‍त कर रहे हैं। 
  • अहमदाबाद स्थित भारतीय उद्यमिता विकास संस्‍थान (Entrepreneurship Development Institute of India), SVEP का तकनीकी सहयोगी संस्‍थान है।

‘स्टार्ट-अप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम’

(Start-Up Village Entrepreneurship Programme- SVEP):

  • SVEP, दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्‍ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (Deendayal Antyodaya Yojana–National Rural Livelihoods Mission), केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा वर्ष 2016 में एक उप-योजना के रूप में लागू किया गया था।
  • इसका उद्देश्‍य ग्रामीणों को गरीबी से बाहर निकालना, उद्यम स्‍थापना में मदद करना और उद्यमों के स्थिर होने तक उनको सहायता उपलब्‍ध कराना है।
  • SVEP, उद्यमों को प्रोत्‍साहन देने के लिये वित्‍तीय सहायता एवं व्यवसाय प्रबंधन में प्रशिक्षण तथा स्‍थानीय सामुदायिक कैडर बनाते समय स्‍व-रोज़गार अवसरों को उपलब्ध कराने पर ध्यान केंद्रित करता है।
  • SVEP, ग्रामीण स्टार्ट-अप्‍स की तीन प्रमुख समस्‍याओं (वित्त, इन्‍क्‍युबेशन एवं कौशल पारिस्थितिक तंत्र) का निवारण करता है।
  • यह कार्यक्रम मुख्य रूप से स्थानीय तौर पर समुदाय संसाधन व्यक्तियों-उद्यम संवर्द्धन (Community Resource Person-Enterprise Promotion) को विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करता है जिससे ग्रामीण उद्यमों की स्थापना करने में ग्रामीण उद्यमियों को मदद मिल सके।
  • जबकि इसका एक अन्य प्रमुख क्षेत्र SEVP ब्लॉकों में ब्लॉक संसाधन केंद्रों (Block Resource Center- BRC) को बढ़ावा देना है। यह सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों की निगरानी एवं प्रबंधन करता है और SEVP ऋण आवेदनों का मूल्यांकन करता है तथा संबंधित ब्लॉक में उद्यम संबंधी जानकारियों के भंडार के रूप में कार्य करता है।
    • BRC प्रभावी एवं स्वतंत्र रूप से कार्य करने के लिये स्‍थायी राजस्व मॉडल की सहायता करने की भूमिका निभाते हैं।


राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन

National Biopharma Mission

भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने किफायती जैव-प्रौद्योगिकी स्वास्थ्य देखभाल उत्पादों के अनुसंधान एवं विकास में निवेश बढ़ाने के लिये विभिन्न पहल की हैं। इन विभिन्न पहलों के अंतर्गत राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन (National Biopharma Mission) की स्थापना जैव-औषधि, वैक्सीन एवं उपकरण उद्योग की ज़रूरतों की पहचान करने तथा क्षमता निर्माण संबंधी बाधाओं को दूर करने के लिये की गई है।

National-Biopharma-Mission

प्रमुख बिंदु:

  • ‘केंद्रीकृत वायरल एवं बैक्टीरियल नैदानिक इम्युनोजेनेसिटी लैब’ (Centralised Viral and Bacterial clinical Immunogenicity labs) टीका उद्योग के लिये एक महत्त्वपूर्ण आवश्यकता के रूप में कड़े ‘गुड क्लिनिकल लेबोरेटरी प्रैक्टिस’  (Good Clinical Laboratory Practice) मानकों को पूरा करती है। 
  • हाल ही में वायरल टीकों की नैदानिक ​​इम्युनोजेनेसिटी का मूल्याँकन करने के लिये ‘नेशनल इम्युनोजेनेसिटी एंड बायोलॉजिक्स इवैल्यूएशन सेंटर’ (National Immunogenicity & Biologics Evaluation Center) को भारती विद्यापीठ विश्वविद्यालय द्वारा अपनी एक घटक इकाई ‘इंटरेक्टिव रिसर्च स्कूल फॉर हेल्थ अफेयर्स’ (Interactive Research School for Health Affairs) और बीआईआरएसी-डीबीटी (BIRAC-DBT) द्वारा राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन के अंतर्गत संयुक्त रूप से स्थापित किया गया है।
    • इसमें एक अत्याधुनिक बीएसएल-3+ (Biosafety Level-3+), चार बीएसएल-2 एवं दस बीएसएल-1 प्रयोगशालाएँ हैं। 
    • डेंगू, चिकनगुनिया और COVID-19 वायरस के लिये महत्त्वपूर्ण प्रतिरक्षात्मकता मूल्यांकन परीक्षण जैसे- प्लाॅक रिड्यूशन न्यूट्रलाइजेशन टेस्ट (Plaque Reduction Neutralization Test- PRNT), माइक्रोन्यूट्रलाइज़ेशन जाँच (Microneutralization Assay), आईजीएम (IgM) और आईजीजी ईएलआईएसए (IgG ELISA) को विकसित, मानकीकृत एवं मान्य किया गया है।

जैव प्रौद्योगिकी विभाग (Department of Biotechnology):

  • केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) कृषि, स्वास्थ्य सेवा, पशु विज्ञान, पर्यावरण एवं उद्योग क्षेत्रों में जैव प्रौद्योगिकी के विकास एवं अनुप्रयोग सहित भारत में जैव प्रौद्योगिकी के विकास को बढ़ावा देते हुए इसमें वृद्धि करता है।

जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (Biotechnology Industry Research Assistance Council- BIRAC):

  • भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT), द्वारा स्थापित जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (BIRAC) अनुसूची-B की धारा 8 के तहत एक गैर-लाभकारी सार्वजनिक क्षेत्र का उद्यम है। 

राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन (National Biopharma Mission):

  • इस मिशन को भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान सहायता परिषद (BIRAC) में कार्यान्वित किया जा रहा है।
  • यह कार्यक्रम भारत की जनसंख्या के स्वास्थ्य मानकों में सुधार के उद्देश्य से देश में किफायती उत्पादों को वितरित करने के लिये समर्पित है।
  • देश में नैदानिक ​​परीक्षण क्षमता और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण क्षमताओं को मज़बूत करने के अलावा टीके, चिकित्सा उपकरण एवं डायग्नोस्टिक्स और बायोथेरेप्यूटिक्स (Biotherapeutics) इस मिशन के सबसे महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में शामिल हैं।

‘इंटरेक्टिव रिसर्च स्कूल फॉर हेल्थ अफेयर्स’ (Interactive Research School for Health Affairs):

  • यह भारती विद्यापीठ की एक महत्त्वपूर्ण घटक इकाई है जो पूरी तरह से अनुसंधान के लिये समर्पित है।
  • इस संस्थान को वर्ष 2001 में स्थापित किया गया था। 
  • यह संस्थान चिकित्सा, आयुर्वेद, होम्योपैथी, डेंटल कॉलेजों जैसे विभिन्न विश्वविद्यालय के अन्य घटकों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए मानव स्वास्थ्य की प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में अनुसंधान करने के प्रति समर्पित है।
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