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प्रीलिम्स फैक्ट्स: 03 मई, 2019

  • 03 May 2019
  • 5 min read

विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस

दुनिया भर में 3 मई को ‘विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस’ (World Press Freedom Day) मनाया जाता है।

  • इस वर्ष विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस की थीम ‘Media for Democracy: Journalism and Elections in Times of Disinformation’ है।
  • यूनेस्को की जनरल कॉफ्रेंस की सिफारिश के बाद दिसंबर 1993 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस की घोषणा की थी। तब से हर वर्ष 3 मई (विंडहोक घोषणा की सालगिरह) को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है।

press

  • विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस का उद्देश्य प्रेस की आज़ादी के महत्त्व के प्रति जागरूकता फैलाना है।

पंचलोहा की मूर्तियाँ

पंचलोहा पारंपरिक रूप से सोना, सिल्वर, कॉपर, जिंक और आयरन का मिश्र धातु होता है।

  • कुछ मामलों में जस्ता के बजाय टिन या सीसा का उपयोग भी किया जाता है।
  • यह एक प्राचीन शिल्प है जो अपनी सुंदरता और उससे जुड़ी परंपरा की भावना के कारण विकसित हुआ।
  • यह दक्षिण भारत का विशिष्ट कला रूप है एवं अक्सर तस्करी के कारण खबरों में रहती है।
  • पंचलोहा में धातुओं के संयोजन एवं बनावट की व्याख्या शिल्प शास्त्र में वर्णित है।
  • ज्ञातव्य है कि शिल्प शास्त्र प्राचीन ग्रंथों का एक संग्रह है, जिसमें कला, शिल्प और उनके डिज़ाइन, नियमों, सिद्धांतों और मानकों का वर्णन है।
  • तंजावुर ज़िले का स्वामीमलाई कांस्य और पंचलोहा उत्पादों का केंद्र है।
  • भारत सरकार ने स्वामीमलाई के इस कला रूप को पेटेंट प्रदान किया है।

पोल्ट्री फार्मिंग के लिये मसौदा नियम

उच्च न्यायालय द्वारा पोल्ट्री फार्मों में क्रूरता के संबंध में दिये गए एक निर्देश के पश्चात् पशुओं के प्रति क्रूरता का रोकथाम नियम, 2019 के तहत मसौदा नियमों को रखा गया है

  • इस मसौदा नियम के अंतर्गत निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं-

♦ देश में पोल्ट्री फार्मों का न्यूनतम स्थान 550 वर्ग सेमी. से कम नहीं होना चाहिये।

♦ 6-8 अधिक-से-अधिक पक्षियों को एक पिंजरे में रखा जा सकता है।

♦ एंटीबायोटिक्स का उपयोग केवल चिकित्सीय उद्देश्यों की पूर्ति के लिये किया जाना चाहिये और वह भी पशुचिकित्सक के देखरेख में।


पिंगुली चित्रकथा

    • कला का यह रूप 17वीं शताब्दी में महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग ज़िले में स्थित पिंगुली गाँव में प्रसिद्ध हुआ।
    • यह आदिवासी कला है, जिसका अभ्यास महाराष्ट्र के ठाकर जनजाति द्वारा किया जाता है।
  • ठाकर समुदाय एक अनुसूचित जनजाति है जिसकी आबादी 2000 है।
  • माना जाता है कि इसकी पुन: छत्तीस उप-जातियाँ है।
  • उप-जाति को जमात के रूप में भी जाना जाता है।
  • इस चित्रकथा के चार रूप हैं:

♦ चमड़े की छाया कठपुतलियाँ

♦ लकड़ी की कठपुतलियाँ (कालसूत्री)

♦ चित्रकथाएँ (चित्रकथा)

♦ बुलॉक आर्ट शो


शेवेलियर डी एल ऑर्डर नेशनल डी ला लीजेंड ऑनर

हाल ही में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व चेयरमैन ए. एस. किरण कुमार को फ्राँस ने अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'शेवेलियर डी एल ऑर्डर नेशनल डी ला लीजेंड ऑनर' (Chevalier de l'Ordre national de la Légion d'Honneur) से सम्मानित किया है।

    • किरण कुमार को यह सम्मान भारत-फ्राँस अंतरिक्ष सहयोग के विकास में उनके द्वारा निभाई गई भूमिका के लिये दिया गया है।
    • गौरतलब है कि 'शेवेलियर डी एल ऑर्डर नेशनल डी ला लीजेंड ऑनर' 1802 में नेपोलियन बोनापार्ट ने शुरू किया था।
  • ए. एस. किरण कुमार भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक हैं।
  • वे वर्ष 2015 से वर्ष 2018 तक इसरो के चेयरमैन रहे और इससे पूर्व वे अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र, अहमदाबाद के निदेशक थे।
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