हिंदी साहित्य: पेन ड्राइव कोर्स
ध्यान दें:

डेली अपडेट्स

प्रारंभिक परीक्षा

प्रिलिम्स फैक्ट्स: 02 नवंबर, 2020

  • 02 Nov 2020
  • 13 min read

श्री अरबिंदो की 150वीं जयंती

150th birth anniversary of Sri Aurobindo

हाल ही में ‘भारतीय संस्कृति के लिये श्री अरबिंदो फाउंडेशन’ (Sri Aurobindo Foundation for Indian Culture- SAFIC) द्वारा श्री अरबिंदों (अरबिंदो घोष) की 150वीं जयंती मनाने के लिये ‘श्री अरबिंदों- द कवि’ (Sri Aurobindo—The Kavi) नामक एक वेबिनार का आयोजन किया गया। 

Sri-Aurobindo

प्रमुख बिंदु: 

  • गौरतलब है कि 15 अगस्त, 2022 को श्री अरबिंदो के जन्म के 150 वर्ष पूरे हो जाएंगे और उनकी 150वीं जयंती को मनाने के लिये  SAFIC द्वारा दो वर्ष तक चलने वाले समारोह का आयोजन किया जा रहा है।  

श्री अरबिंदों (अरबिंदो घोष): 

  • अरबिंदों घोष का जन्म 15 अगस्त, 1872 को कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता) में हुआ था। 
  • वे एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, कवि और राष्ट्रवादी नेता थे तथा आगे चलकर वे महान आध्यात्मिक सुधारक और दार्शनिक के रूप में भी जाने गए।
  • 7 वर्ष की आयु में उन्हें अपने दो भाइयों के साथ इंग्लैंड भेज दिया गया जहाँ उन्होंने पहले लंदन के सेंट पॉल स्कूल और उसके बाद किंग्स कॉलेज (कैम्ब्रिज) में अपनी पढ़ाई पूरी की।
  • वर्ष 1890 में उन्होंने भारतीय सिविल सेवा की परीक्षा उत्तीर्ण की किंतु वर्ष 1893 में वे भारत वापस आ गए।     
  • श्री अरबिंदो ने वर्ष 1893 से वर्ष 1906 तक बड़ौदा के गायकवाड़ के यहाँ सेवा के रूप में  पहले राजस्व विभाग में, फिर महाराजा के सचिवालय में, इसके बाद अंग्रेज़ी के प्रोफेसर के तौर पर और आखिर में बड़ौदा कॉलेज में वाइस-प्रिंसिपल के रूप में कार्य किया।
  • वर्ष 1906 में उन्होंने बड़ौदा छोड़ दिया और नव-स्थापित बंगाल नेशनल कॉलेज (Bengal National College) के प्रधानाचार्य के रूप में कलकत्ता चले गए।

अलीपुर बम केस:

  • वर्ष 1908 में खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी ने मजिस्ट्रेट किंग्सफोर्ड को मारने का असफल प्रयास किया। इसके मद्देनज़र अरबिंदो को भी हमले की योजना बनाने और अंजाम देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया और अलीपुर जेल भेज दिया गया।
    • अलीपुर बम मामले की सुनवाई एक वर्ष तक चली आखिरकार 6 मई, 1909 को उन्हें बरी कर दिया गया। उनके बचाव पक्ष के वकील चितरंजन दास थे।
    • इस अवधि के दौरान जेल में आध्यात्मिक अनुभव एवं वास्तविकताओं के कारण जीवन के बारे में उनका दृष्टिकोण मौलिक रूप से बदल गया, परिणामतः उनका उद्देश्य देश की सेवा एवं मुक्ति से बहुत आगे निकल गया।

आध्यात्मिक यात्रा:

  • वर्ष 1910 में जब कर्मयोगिन (Karmayogin) में प्रकाशित ‘टू माई कंट्रीमेन’ (To My Countrymen) शीर्षक वाले हस्ताक्षरित लेख के आधार पर अंग्रेज़ सरकार उन पर देशद्रोह का मुकदमा चलाने की कोशिश कर रही थी तब अरबिंदो ने सभी राजनीतिक गतिविधियों से खुद को अलग कर लिया और  छिपकर चंदन नगर (पश्चिम बंगाल) में मोतीलाल रॉय के घर रहने लगे। 
  • वर्ष 1910 में अरबिंदो बंगाल छोड़कर पुद्दुचेरी चले गए जहाँ उन्होंने आध्यात्मिक और दार्शनिक गतिविधियों के लिये खुद को समर्पित कर दिया। वर्ष 1914 में चार वर्ष की एकांत योग प्रक्रिया के बाद उन्होंने ‘आर्य’ (Arya) नामक एक मासिक दार्शनिक पत्रिका शुरू की।
  • पांडिचेरी में उनके अनुयायियों की संख्या बढ़ने के कारण 1926 में श्री अरबिंदो आश्रम (Sri Aurobindo Ashram) का निर्माण हुआ।
  • उनकी सबसे बड़ी साहित्यिक उपलब्धि ‘सावित्री’ (Savitri) थी जो लगभग 24,000 पंक्तियों की एक आध्यात्मिक कविता थी।
  •  15 अगस्त, 1947 को श्री अरबिंदो ने भारत के विभाजन का कड़ा विरोध किया था।
  • 5 दिसंबर, 1950 को श्री अरबिंदो की मृत्यु हो गई। तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने योग दर्शन और स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान के लिये उनकी प्रशंसा की।

दर्शन एवं अध्यात्मिक दृष्टिकोण:

  • श्री अरबिंदो की एकीकृत योग प्रणाली की अवधारणा उनकी किताबों ‘द सिंथेसिस ऑफ योगा’ (The Synthesis of Yoga) और ‘द लाइफ डिवाइन’ (The Life Divine) में वर्णित है। 
    • उनकी ‘द लाइफ डिवाइन’ पुस्तक आर्य (Arya) पत्रिका में क्रमिक रूप से प्रकाशित निबंधों का संकलन है।
  • अरबिंदो का तर्क है कि ‘’जैसे मानव प्रजाति जानवरों की प्रजातियों के बाद विकसित हुई है, उसी प्रकार मानव प्रजातियों से आगे बढ़कर दुनिया विकसित हो सकती है और नई प्रजातियों के साथ एक नई दुनिया का निर्माण हो सकता है।’’
  • श्री अरबिंदो का मानना था कि ‘’डार्विनवाद (Darwinism) केवल जीवन में पदार्थ के क्रमिक विकास की एक घटना का वर्णन करता है किंतु इसके पीछे का कारण नहीं बताता है, जबकि वह जीवन को पहले से ही पदार्थ में मौजूद पाता है क्योंकि सभी अस्तित्व ब्रह्म की अभिव्यक्ति है।’’

काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिज़र्व

Kaziranga National Park and Tiger Reserve

COVID-19 महामारी के मद्देनज़र हाल ही में काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिज़र्व (Kaziranga National Park and Tiger Reserve- KNPTR) में हाथी सफारी (Elephant Safari) की पुनः शुरुआत होने पर भी घरेलू एवं विदेशी पर्यटकों की मौजूदगी में कमी देखी गई।

Kaziranga

काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिज़र्व:

  • काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्यान असम राज्य में स्थित है।
  • इस उद्यान में लगभग 250 से अधिक मौसमी जल निकाय (Water Bodies) हैं, इसके अलावा डिपहोलू नदी (Dipholu River) इसके मध्य से बहती है।
  • विश्व के दो-तिहाई एक सींग वाले गैंडे काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाते हैं।
  • काज़ीरंगा में संरक्षण प्रयासों का अधिकांश ध्यान 'बड़ी चार' प्रजातियों- राइनो (Rhino), हाथी (Elephant), रॉयल बंगाल टाइगर (Royal Bengal Tiger) और एशियाई जल भैंस (Asiatic Water Buffalo) पर केंद्रित है।
  • काज़ीरंगा नेशनल पार्क को वर्ष 1985 में यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थल में शामिल में किया गया था।
  • उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान और कर्नाटक में बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान के बाद भारत में धारीदार बिल्लियों की तीसरी सबसे ज़्यादा संख्या काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में पाई जाती है।

राष्ट्रीय उद्यान (National पार्क):

  • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 राज्यों को किसी समृद्ध जैव विविधता वाले प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को राष्ट्रीय उद्यान घोषित करने की शक्ति देता है।
  • जो क्षेत्र पारिस्थितिकी जीव-जंतुओं, वनस्पतियों, भू-आकृतिक एवं जलीय महत्त्व के हैं और जिनका संरक्षण किया जाना अत्यंत आवश्यक है, उन्हें राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया जा सकता है।
    • राष्ट्रीय उद्यान घोषित क्षेत्र में जंतुओं का शिकार प्रतिबंधित होता है।
    • राष्ट्रीय उद्यान घोषित क्षेत्र में वन्य जीवों के अलावा अन्य जीवों के चारण पर प्रतिबंध होता है।
    • किसी भी वन्य जीव-जंतु के आवास के अतिक्रमण पर रोक होती है।
    • कोई भी संरक्षित क्षेत्रों का अतिक्रमण नहीं कर सकता है।
    • पौधों को संगृहीत करने और उनको हानि पहुँचाने पर प्रतिबंध है। 
    • हथियारों का प्रयोग इन क्षेत्रों में वर्जित है।

टाइफून गोनी

Typhoon Goni

1 नवंबर, 2020 को टाइफून रोली (Rolly) या गोनी (Goni), पूर्वी फिलीपींस के तट से टकराया। इस वर्ष  फिलीपींस के तट से टकराने वाला यह 18वाँ टाइफून है।

Typhoon-Goni

प्रमुख बिंदु: 

  • इस सुपर टाइफून की गति 215-295 किमी. प्रति घंटा थी। हवा की गति के आधार पर उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की पाँच श्रेणियाँ हैं। 
    • जब घूर्णन प्रणालियों में हवाएँ 39 मील प्रति घंटे तक पहुँचती हैं तो तूफान को उष्णकटिबंधीय तूफान (Tropical Storm) कहा जाता है और जब वे 74 मील प्रति घंटे तक पहुँचती हैं तो उष्णकटिबंधीय तूफान को उष्णकटिबंधीय चक्रवात (Tropical Cyclone) या हरिकेन (Hurricane) के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है और इसे एक नाम भी दिया जाता है।
  • प्रशांत महासागर में स्थित फिलीपींस ऐसा पहला बड़ा भू-क्षेत्र है जो प्रशांत महासागरीय चक्रवात बेल्ट (Pacific Cyclone Belt) से उठने वाले चक्रवातों का सामना करता है।

टाइफून के बारे में

  • ऊष्णकटिबंधीय चक्रवातों को चीन सागर क्षेत्र में टाइफून कहते हैं।
  • ज़्यादातर टाइफून जून से नवंबर के बीच आते हैं जो जापान, फिलीपींस और चीन आदि देशों को प्रभावित करते हैं। दिसंबर से मई के बीच आने वाले टाइफूनों की संख्या कम होती है।
  • उत्तरी अटलांटिक और पूर्वी प्रशांत क्षेत्र में चक्रवातों को 'हरिकेन', दक्षिण-पूर्व एशिया और चीन में 'टाइफून' तथा दक्षिण-पश्चिम प्रशांत और हिंद महासागर क्षेत्र में 'उष्णकटिबंधीय चक्रवात' कहा जाता है। 

हरिकेन और टाइफून में क्या अंतर है?

  • इसमें कोई अंतर नही है। 
  • जहाँ इनकी उत्पत्ति होती हैं उसके आधार पर हरिकेन को टाइफून या चक्रवात कहा जा सकता है।
  • नासा के अनुसार, इन सभी प्रकार के तूफानों का वैज्ञानिक नाम उष्णकटिबंधीय चक्रवात है।
  • अटलांटिक महासागर या पूर्वी प्रशांत महासागर के ऊपर बनने वाले उष्णकटिबंधीय चक्रवातों को हरिकेन कहा जाता है और जो उत्तर पश्चिमी प्रशांत में बनता है, उसे टाइफून कहा जाता है।
एसएमएस अलर्ट
 

नोट्स देखने या बनाने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

नोट्स देखने या बनाने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

close

प्रोग्रेस सूची देखने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

close

आर्टिकल्स को बुकमार्क करने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

close