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नोरोवायरस

  • 15 Nov 2021
  • 3 min read

हाल ही में केरल में नोरोवायरस नामक एक अत्यधिक संक्रामक वायरस का पता चला है।

प्रमुख बिंदु

  • परिचय:
    • यह वायरस का एक समूह है जो गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल बीमारी का कारण बनता है।
    • यह गंभीर उल्टी और दस्त के अलावा पेट व आँतों की सूजन का कारण बनता है।
    • नोरोवायरस कई कीटाणुनाशकों के लिये प्रतिरोधी है और 60 डिग्री सेल्सियस तापमान पर भी जीवित रह सकता है। इसलिये केवल भोजन को अधिक ताप पर पकाने या पानी को क्लोरीनेट करने से वायरस नहीं मरता है। यह वायरस आमतौर पर कई हैंड सैनिटाइज़र से भी बच सकता है।
  • संक्रमण:
    • एक व्यक्ति अपने जीवन में कई बार विभिन्न प्रकार के नोरोवायरस से संक्रमित हो सकता है, लेकिन एक ही प्रकार की प्रतिरक्षा विकसित होने से उसे वायरस के अन्य वैरिएंट से सुरक्षा नहीं मिलती है।
    • दूषित सतहों या भोजन के माध्यम से वायरस संक्रमित व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति में स्थानांतरित हो सकता है।
    • वायरस मुख्य रूप से ‘ओरल फैकल’ द्वारा फैल सकता है।
      • रोग का प्रकोप आमतौर पर क्रूज़ जहाज़ों, नर्सिंग होम, डॉर्मिटरी और अन्य बंद स्थानों में होता है।
  • संवेदनशील: 
    • वायरस सभी आयु वर्ग के लोगों को प्रभावित कर सकता है लेकिन बच्चों, बुजुर्गों और सह-विकृतियों से ग्रस्त लोगों में गंभीर लक्षण पैदा करने के लिये जाना जाता है।
  • लक्षण:
    • दस्त, उल्टी, पेट दर्द, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएँ आदि इसके लक्षण हैं।
  • उपचार:
    • इस वायरस हेतु कोई विशिष्ट उपचार उपलब्ध नहीं है, डायरिया और उल्टी के लिये जेनेरिक दवाएँ इस बीमारी को ठीक करने में मदद कर सकती हैं।
  • स्थिति:
    • इसके वार्षिक रूप से 685 मिलियन मामले आते हैं, जिनमें से 200 मिलियन मामले पाँच साल से कम उम्र के बच्चों में पाए जाते हैं।
    • इस वायरस के कारण होने वाले डायरिया से हर साल लगभग 50,000 बच्चों की मौत हो जाती है।
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