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लोकसभा में नए विधेयक

  • 08 Aug 2022
  • 4 min read

दो नए विधेयक- प्रतिस्पर्द्धा (संशोधन) विधेयक, 2022 और नई दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र (संशोधन) विधेयक लोकसभा में पेश किये गए।

प्रतिस्पर्द्धा (संशोधन) विधेयक 2022:

  • परिचय:
    • यह भारतीय प्रतिस्पर्द्धा आयोग (CCI) की संरचना को बदलने का प्रयास करता है।
    • यह वर्तमान बाज़ारों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिये CCI को अनुमति देने का प्रावधान करता है।
    • इसमें CCI के संयोजनों को अधिसूचित करने के मानदंड के रूप में 'लेन-देन का मूल्य' रखने के प्रावधान भी हैं।
  • अन्य प्रस्तावित संशोधन:
    • CCI के समक्ष प्रतिस्पर्द्धा विरोधी समझौतों और प्रमुख स्थिति के दुरुपयोग के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिये तीन वर्ष की सीमा अवधि निश्चित की गई।
    • स्पष्टता प्रदान करने के लिये 'उद्यम', 'प्रासंगिक उत्पाद बाज़ार', 'समूह' और 'नियंत्रण' जैसी कुछ परिभाषाओं में परिवर्तन।
  • विशेषताएँ::
    • प्रतिस्पर्द्धा-विरोधी समझौतों को व्यापक बनाना।
    • विलय और अधिग्रहण (M&A) को त्वरित मंज़ूरी।
    • जाँच के दौरान जानकारी साझा करने के इच्छुक पक्षों के लिये दंड को कम करना।
    • मुकदमेबाज़ी में कमी।

भारतीय प्रतिस्पर्द्धा आयोग:

  • परिचय:
  • उद्देश्य:
    • भारतीय प्रतिस्पर्द्धा आयोग (CCI) एक प्रतिस्पर्द्धा नियामक और छोटे संगठनों के लिये एक प्रहरी है, जिसका उद्देश्य प्रतिस्पर्द्धा पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले अभ्यासों को समाप्त करना, प्रतिस्पर्द्धा को बढ़ावा देना और उसे जारी रखना, उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना तथा भारतीय बाज़ारों में व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना है।
  • गठन:
    • प्रतिस्पर्द्धा अधिनियम के अनुसार, आयोग में एक अध्यक्ष और छह सदस्य होते हैं जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किया जाता है।
    • आयोग एक अर्द्ध-न्यायिक निकाय (Quasi-Judicial Body) है जो सांविधिक प्राधिकरणों को परामर्श देने के साथ-साथ अन्य मामलों को भी संबोधित करता है। इसके अध्यक्ष और अन्य सदस्य पूर्णकलिक होते हैं।

नई दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र (संशोधन) विधेयक:

  • नई दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र (NDIAC) मध्यस्थता और सुलह की कार्यवाही करने के लिये नई दिल्ली में स्थित स्वायत्त संस्थान है।
  • यह वर्ष 2019 में स्थापित किया गया था और संसद के अधिनियम द्वारा राष्ट्रीय महत्त्व के संस्थान के रूप में घोषित किया गया था।
    • कानून मंत्री द्वारा नई दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र (संशोधन) विधेयक का नाम बदलकर इसे भारत अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र करने हेतु पेश किया गया था।

स्रोत: द हिंदू

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