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एमपेम्बा प्रभाव

  • 08 Jan 2026
  • 13 min read

स्रोत: पी.आई.बी.

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अंतर्गत स्वायत्त संस्थान जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र (JNCASR) के वैज्ञानिकों ने पेंबा प्रभाव की व्याख्या के लिये सुपरकंप्यूटर आधारित पहली सिमुलेशन विकसित की है।

  • पेंबा प्रभाव: यह वह परिघटना है जिसमें अधिक उष्ण जल कम उष्ण (शीत) जल की तुलना में तेज़ी से जम जाता है
    • इस प्रभाव का उल्लेख सबसे पहले अरस्तू ने मौसम विज्ञान (Meteorologica) में  किया था और इसे 20वीं सदी में एरास्तो पेंबा ने पुनः खोजा, जिनके नाम पर इसे पेंबा प्रभाव (Mpemba Effect) कहा जाता है।
  • JNCASR अध्ययन के निष्कर्ष: अध्ययन में पता चला कि जल सीधे जमता नहीं है, बल्कि यह क्षणिक मध्यवर्ती आणविक अवस्थाओं (Short-lived Intermediate Molecular States) से होकर गुज़रता है।
    • जल अपने प्रारंभिक तापमान के अनुसार इन मध्यवर्ती अवस्थाओं में विभिन्न अवधियों तक रह सकता है।
    • अधिक उष्ण जल यदा-कदा इस विलंब को पार कर हिमीकरण की प्रक्रिया (Ice Nucleation) तक तेज़ी से पहुँच सकता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि क्यों उष्ण जल कभी-कभी पहले जम जाता है।
    • अध्ययन से पुष्टि होती है कि पेंबा प्रभाव वास्तविक है और यह केवल जल तक सीमित नहीं है, क्योंकि यह अन्य तरल से ठोस अवस्था परिवर्तन (Fluid-to-solid Phase Transitions) में भी देखा जा सकता है।
    • यह अध्ययन असंतुलित अवस्थाओं (Out-of-equilibrium Phenomena) की समझ को गहन करता है, अगली पीढ़ी के इलेक्ट्रॉनिक्स में बेहतर कूलिंग एवं ताप नियंत्रण (Thermal Control) के लिये दृष्टिकोण प्रदान करता है और असंतुलन भौतिकी (Nonequilibrium Physics) में एक महत्त्वपूर्ण सफलता को दर्शाता है, जिससे लंबे समय से चले आ रहे प्रायोगिक और सैद्धांतिक विवादों (Experimental and Theoretical Debates) का समाधान हुआ।

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