रैपिड फायर
भारत की शास्त्रीय भाषाएँ और तिरुक्कुरल की स्थायी विरासत
- 31 Jan 2026
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हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने शास्त्रीय भाषाओं के केंद्रों द्वारा तैयार की गई 55 साहित्यिक कृतियों का विमोचन किया, साथ ही 'तिरुक्कुरल' का एक सांकेतिक भाषा संस्करण भी जारी किया।
- हाल ही में, केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने क्लासिकल भाषाओं के केंद्रों द्वारा तैयार की गई 55 साहित्यिक रचनाओं के साथ-साथ तिरुक्कुरल का साइन-लैंग्वेज वर्जन भी जारी किया।
- यह पहल समावेशी और बहुभाषी भारत की परिकल्पना के अनुरूप भारत की भाषायी विरासत को शिक्षा, अनुसंधान और सांस्कृतिक गौरव के केंद्र में स्थापित करने का लक्ष्य रखती है।
शास्त्रीय भाषाएँ
- परिचय: वर्ष 2004 में भारत सरकार ने प्राचीन साहित्यिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत विरासत के संरक्षण के उद्देश्य से कुछ भाषाओं को शास्त्रीय भाषाओं के रूप में मान्यता देना शुरू किया।
- वर्तमान में भारत में 11 शास्त्रीय भाषाओं को मान्यता प्राप्त है— तमिल (2004), संस्कृत (2005), कन्नड़ (2008), तेलुगु (2008), मलयालम (2013), ओडिया (2014) तथा वर्ष 2024 में मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली।
- प्रारंभ में गृह मंत्रालय ने तमिल और संस्कृत को यह दर्जा प्रदान किया गया था, इसके बाद आगे के क्रियान्वयन तथा भविष्य की मान्यताओं की ज़िम्मेदारी संस्कृति मंत्रालय को सौंप दी गई।
- वर्तमान में भारत में 11 शास्त्रीय भाषाओं को मान्यता प्राप्त है— तमिल (2004), संस्कृत (2005), कन्नड़ (2008), तेलुगु (2008), मलयालम (2013), ओडिया (2014) तथा वर्ष 2024 में मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली।
- शास्त्रीय भाषा का दर्जा प्राप्त करने हेतु अनिवार्य मानदंड: शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने के मानदंडों में साहित्य अकादमी के अंतर्गत गठित भाषावैज्ञानिक विशेषज्ञ समितियों (LEC) की सिफारिशों के आधार पर वर्ष 2005 तथा पुनः 2024 में संशोधन किया गया।
- 2024 में प्रस्तुत किये गए संशोधित मानदंड इस प्रकार हैं:
- इसके प्रारंभिक ग्रंथों/दर्ज इतिहास की प्राचीनता कम-से-कम 1500–2000 वर्षों की हो।
- प्राचीन साहित्य/ग्रंथों का ऐसा भंडार हो, जिसे वक्ताओं की पीढ़ियों द्वारा विरासत के रूप में माना गया हो।
- ज्ञानवर्द्धक ग्रंथ, विशेष रूप से काव्य के साथ-साथ गद्य ग्रंथ तथा पुरालेखीय और शिलालेखीय साक्ष्य।
- शास्त्रीय भाषा और उसका साहित्य अपने वर्तमान रूप से भिन्न हो सकता है या उसकी बाद की विकसित शाखाओं से असतत (भिन्न) भी हो सकता है।
- 2024 में प्रस्तुत किये गए संशोधित मानदंड इस प्रकार हैं:
- शास्त्रीय भाषा के दर्जे के लाभ: शास्त्रीय भाषाओं को राष्ट्रीय पुरस्कारों, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा वित्त पोषित अकादमिक पीठों और अनुसंधान एवं संरक्षण के लिये भारतीय भाषा संस्थान (CIIL), मैसूर में 'उत्कृष्टता केंद्रों' के माध्यम से सरकारी सहायता प्राप्त होती है।
तिरुक्कुरल
- तिरुक्कुरल, जिसे लगभग दो हज़ार वर्ष पूर्व तिरुवल्लुवर ने रचा था, तमिल साहित्य की एक कालजयी कृति है, जो 1,330 संक्षिप्त दोहों के माध्यम से नैतिकता, शासन, अर्थव्यवस्था और मानवीय संबंधों पर सार्वभौमिक जानकारी प्रदान करती है।
- यह अरम (सद्गुण), पोरुल (धन/अर्थ) और इनबम (प्रेम/सुख) के आधार पर संरचित है तथा धर्मपूर्वक जीवन जीने एवं सामाजिक सामंजस्य के लिये एक समग्र मार्गदर्शिका प्रस्तुत करती है।