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चीन ने पाकिस्तान मूल के आतंकियों को ब्लैकलिस्ट करने का प्रस्ताव रोका

  • 23 Jun 2023
  • 5 min read

संयुक्त राष्ट्र द्वारा पकिस्तान मूल के LeT आतंकियों को वैश्विक आतंकी के रूप में नामित करने या फिर ब्लैकलिस्ट करने के प्रस्ताव पर चीन ने रोक लगा दी है, यह अंतर्राष्ट्रीय समुदायों के लिये गंभीर चिंता का विषय है।

  • सितंबर 2022 में चीन ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा पेश किये गए इस प्रस्ताव को विचाराधीन रखने का फैसला लिया था।

चीन के फैसले से संबंधित चिंताएँ: 

  • भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा पेश किये गए प्रस्ताव का उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 अल कायदा प्रतिबंध समिति के तहत 26/11 मुंबई आतंकवादी हमलों में शामिल होने के मामले में एक वांछित व्यक्ति को ब्लैकलिस्ट करना था।
  • यह पहली बार नहीं है जब चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध समिति के तहत पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों को ब्लैकलिस्ट करने के प्रस्ताव पर रोक लगाई है।
  • चीन ने वर्ष 2009, 2016, 2017 में भी आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त पाकिस्तानी आतंकवादियों को लक्षित करने वाली सूचियों की लगातार अनदेखी की है।
    • चीन द्वारा इस प्रकार की कार्रवाइयाँ, जिसमें ऐसा प्रतीत होता है कि वह अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा सहयोग जैसे महत्त्वपूर्ण मामले में पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों को प्राथमिकता दे रहा है, उन देशों के लिये चिंता का विषय है जो वैश्विक स्तर पर आतंकवाद को खत्म करना चाहते हैं
    • यह आतंकवाद से संबंधित संवेदनशील मुद्दों पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में आम सहमति हासिल करने की चुनौतियों पर भी प्रकाश डालता है।

1267 अल-कायदा प्रतिबंध समिति:  

  • यह समिति संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का हिस्सा है तथा इसका काम आतंकवादियों के विरुद्ध अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों को लागू करना है।
  • सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1267 में अल-कायदा और तालिबान को आतंकवादी सगंठन के रूप में नामित करने के बाद 15 अक्तूबर, 1999 को अल-कायदा प्रतिबंध समिति की स्थापना अल-कायदा और तालिबान प्रतिबंध समिति के रूप में की गई थी।
    • वर्ष 2011 में तालिबान के संबंध में एक अलग समिति बनाई गई थी।
  • समिति शासन के तहत कोई भी संयुक्त राष्ट्र सदस्य देश किसी व्यक्ति या समूह का नाम आतंकवादी के रूप में नामित करने का प्रस्ताव कर सकता है।
    • 1267 प्रतिबंध समिति में सर्वसम्मति से निर्णय लिये जाते हैं जिसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सभी सदस्य शामिल होते हैं।
    • समिति का कोई भी सदस्य ब्लैकलिस्ट करने हेतु लाए गए प्रस्ताव को आपत्ति दर्ज कर या "टेक्निकल होल्ड" के माध्यम से रोक सकता है।
  • आतंकवादी के रूप में सूचीबद्ध किसी व्यक्ति या संस्था की संपत्ति जब्त करने के साथ ही वह यात्रा प्रतिबंध और हथियार प्रतिबंध के अधीन है।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न  

प्रिलिम्स: 

प्रश्न. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 5 स्थायी सदस्य होते हैं और शेष 10 सदस्य महासभा द्वारा कितनी अवधि के लिये चुने जाते हैं? (2009) 

(a) 1 वर्ष
(b) 2 वर्ष
(c) 3 वर्ष
(d) 5 वर्ष

उत्तर: (b) 

स्रोत: द हिंदू 

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