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‘मेटावर्स’ और इसके अनुप्रयोग

  • 28 Jul 2022
  • 12 min read

यह एडिटोरियल 25/07/2022 को ‘लाइवमिंट’ में प्रकाशित “Metaverse has potential to revolutionize e-commerce” लेख पर आधारित है। इसमें ‘मेटावर्स’ और इसके अनुप्रयोगों के बारे में चर्चा की गई है।

संदर्भ

मेटावर्स (Metaverse) हमारी वास्तविक दुनिया का डिजिटल आयाम में विस्तार है जो दुनिया भर में कहीं भी इस तक अभिगम बनाने वाले किसी भी व्यक्ति के लिये एक ‘इमर्सिव’ मल्टी-यूज़र अनुभव प्रदान करता है।

  • इस आभासी दुनिया की अभिगम्यता के लिये इंटरनेट और डिजिटल उपकरणों की आवश्यकता होती है। इसके पीछे की प्रौद्योगिकी को ‘ऑगमेंटेड रियलिटी’ (AR) और ‘वर्चुअल रियलिटी’ (VR) के रूप में जाना जाता है।
  • डिजिटल इंडिया के विकास भारत की बड़ी युवा आबादी ने गति प्रदान की है जो ‘डिजिटल इंटरैक्शन’ और ‘रिक्रिएशन’ से गहनता से परिचित है। जबकि मेटावर्स के लिये प्रौद्योगिकीय, जनसांख्यिकीय और नीतिगत नींव भारत में मौजूद प्रतीत होती है, मेटावर्स के निर्माण की कार्यान्वयन चुनौती बनी हुई है।

मेटावर्स के अनुप्रयोग

  • ई-कॉमर्स: मेटावर्स भौतिक और आभासी दुनिया के बीच की खाई को भर सकता है, इस प्रकार ऑनलाइन और ऑफलाइन वाणिज्य को संयुक्त कर रहा है। इसका अर्थ यह है कि उपयोगकर्ता मेटावर्स के माध्यम से भौतिक दुनिया का अनुभव करने में डिजिटल रूप से सक्षम होंगे, जिससे ऑनलाइन खरीदारी अधिक सुविधाजनक हो जाएगी।
    • मेटावर्स से कंपनियों को बहुत लाभ होगा, क्योंकि यह न केवल उनके उपभोक्ता आधार को बढ़ाता है बल्कि यह नए उत्पादों पर समीक्षा प्राप्त करने की क्षमता भी रखता है; इस प्रकार उन्हें भविष्य के लिये सही दिशा की ओर निर्देशित करता है।
    • विभिन्न ब्रांड भूगर्भीय बाधाओं के बावजूद ई-कॉमर्स व्यवसाय ढाँचे में मेटावर्स के माध्यम से वैश्विक दर्शकों के साथ अंतःक्रिया कर सकते हैं।
  • कौशल वृद्धि: मेटावर्स नए अनुभवात्मक अधिगम (लर्निंग) के परिदृश्य विकसित करने के अपने अवसर के कारण दूरस्थ तरीके से कौशल वृद्धि में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
  • ‘वर्चुअल टूरिज्म’: 360° वर्चुअल टूर के साथ दर्शक न केवल रिकॉर्ड किये गए स्थान देख सकते हैं बल्कि वास्तविक प्रभावों के साथ वांछित स्थान पर डिजिटल रूप से उपस्थित भी हो सकते हैं।
    • उदाहरण के लिये, वर्चुअल रियलिटी हॉलिडे ‘ट्राई बिफोर यू फ्लाई’ (Try before you Fly) संभावित पर्यटकों को उनके वांछित गंतव्यों की यात्रा करने में मदद करता है।
  • शिक्षण और अधिगम: VR ने मेटावर्स के प्रभावों के साथ संयुक्त होकर अधिगम के अनुभव को गुणात्मकता के नए स्तर पर पहुँचा दिया है। छात्र अब अधिक गहन और उच्च गुणवत्तापूर्ण ज्ञान संसाधनों के साथ लाइव प्रयोग देख सकते हैं।
    • मेटावर्स का एक अन्य उदाहरण माइक्रोसॉफ्ट द्वारा बनाया गया ‘मेश’ (Mesh) है जो एक मिश्रित रियलिटी प्लेटफ़ॉर्म है जहाँ संकाय, कर्मचारी और छात्र अपने 3D अवतार का उपयोग कर संवाद कर सकते हैं।
  • स्वास्थ्य देखभाल: उत्तर महामारी समय में ‘टेलीमेडिसिन’ और ‘टेलीहेल्थ’ मेटावर्स से समर्थित अवधारणा है जहाँ मरीज और चिकित्सक वर्चुअल 3D क्लीनिक में संवाद कर सकते हैं।

मेटावर्स से संबद्ध चुनौतियाँ

  • निजता और सुरक्षा: मेटावर्स में ऑनलाइन जोखिम बढ़ सकते हैं, जहाँ अवांछित संपर्क अधिक हस्तक्षेपकारी और व्यापक हो सकता है।
    • इसमें नागरिकों के डेटा को एकत्र करने और तीसरे पक्ष के एग्रीगेटर्स को उन्हें बेचने की आशंका भी मौजूद है।
    • यदि मेटावर्स कमज़ोर सुरक्षा प्रक्रियाओं से ग्रस्त हो तो यह साइबर हमलों, पहचान की चोरी, धोखाधड़ी और उत्पीड़कों, अपराधियों एवं फ्रिंज समूहों के लिये एक सुरक्षित आश्रय के लिये भी भेद्य हो सकता है।
    • वर्चुअल इंटरैक्शन में वृद्धि और डिजिटल अवतार जैसी अवधारणाओं के विकास से अवैध कंटेंट और साइबर अपराधियों की ट्रैकिंग और इंटरसेप्टिंग अधिक कठिन हो जाएगी।
  • परंपरा बनाम प्रौद्योगिकी: प्रौद्योगिकी अपनी विशाल सकारात्मकता के साथ ही परंपरा के लिये एक वृहत नकारात्मकता की उत्पत्ति भी करती है।
    • सोशल नेटवर्किंग साइट्स के फायदे और नुकसान दोनों हैं। सोशल मीडिया के उदय ने छद्म सामाजिक व्यवहार की शुरुआत की है जिसने सामूहिकता और बंधुत्व के पारंपरिक सामाजिक मूल्यों को कुछ कमज़ोर किया है।
  • मेटावर्स की वैधता: इस असीमित डिजिटल दुनिया में लागू होने वाले कानूनों और अधिकार क्षेत्र का प्रश्न भी चिंता का प्रमुख विषय है जिस पर विधि-निर्माताओं द्वारा विचार करने की आवश्यकता है।
    • बौद्धिक संपदा (IP) और स्वामित्व की सुरक्षा एक अन्य कानूनी मुद्दा है जिसके उभरने की संभावना है।
    • वर्चुअल स्पेस में कॉपीराइट उल्लंघनों को ट्रैक करने में होने वाली कठिनाई को देखते हुए कंटेंट निर्माताओं के बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) की रक्षा करना भी एक चुनौती होगी।
  • अवसंरचना और कनेक्टिविटी की अपर्याप्तता: एक व्यावहारिक, सुदृढ़ और सुलभ मेटा-गवर्नेंस अवसंरचना का निर्माण कई कठिनाइयों से ग्रस्त है।
    • कम से कम इसे एक सुरक्षित और विश्वसनीय अनुभव प्रदान करने के लिये 5G कनेक्शन की आवश्यकता होगी। अधिकांश ग्रामीण समुदाय अभी भी एक अबाधित 4G कनेक्शन प्राप्त करने और बनाए रखने के लिये संघर्षरत हैं।
      • इसके अतिरिक्त, वर्तमान में उपलब्ध ऊर्जा की मात्रा मेटावर्स द्वारा अपेक्षित ऊर्जा के दृष्टिकोण से अपर्याप्त है।
  • ‘डिजिटल डिवाइड’: ITU के विश्व दूरसंचार/ICT संकेतक डेटाबेस 2020 के अनुसार, भारत में महज 43% आबादी ही इंटरनेट का उपयोग करती है।
    • इसने उस जनसांख्यिकी और उन क्षेत्रों के बीच की खाई को चौड़ा किया है जिनकी आधुनिक सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) तक पहुँच है और जिनकी पहुँच नहीं है या सीमित पहुँच है।

आगे की राह

  • डिजिटल अंतराल को कम करना: आभासी दुनिया के शासन तंत्र को डिजिटल साक्षरता, सुरक्षा और भलाई को बढ़ावा देने वाले सशक्तीकारी और प्रवर्धनकारी प्रयासों के समर्थन की आवश्यकता होगी ताकि प्रतिभागी हानिकारक कंटेंट एवं व्यवहारों से सतर्क रूप से गुज़रते हुए ऑनलाइन समुदायों में सार्थक रूप से संलग्न हो सकें।
  • नीति समर्थन: सरकार के लिये यह सही समय है कि वह इसके क्रियान्वयन और सार्वजनिक सेवाओं के लिये मेटावर्स का लाभ उठाने के लिये उपयुक्त नीतिगत पृष्ठभूमि का सृजन करे।
    • सरकार को सूचना अभिगम्यता (Information Accessibility), सूचना उपयोग (Information Utilization) और सूचना ग्रहणशीलता (Information Receptiveness) पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
  • सुरक्षित और सुदृढ़ मेटावर्स पारितंत्र: इस प्रौद्योगिकी के डीएनए के भीतर सुरक्षा, गोपनीयता और दृढ़ता के विशिष्ट तत्वों को संबोधित करने के लिये प्रभावी पारितंत्र को विकसित और विनियमित करने की प्रबल आवश्यकता है।
    • नागरिकों के अनुकूल मेटा-गवर्नेंस अवसंरचना के निर्माण के लिये किसी भी संभावित कानूनी बाधाओं को कम करने हेतु डिज़ाइनरों, बिजनेस मॉडल विशेषज्ञों और अधिवक्ताओं सहित विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों के सहयोग की आवश्यकता होगी। इसमें निजी क्षेत्र के हस्तक्षेप की भी आवश्यकता हो सकती है।
  • मेटा हेल्प डेस्क: ई-गवर्नेंस में ICT के माध्यम से लक्षित दर्शकों के लिये आवश्यक सूचनाएँ जारी की जाती हैं। किसी मंत्रालय/अन्य सरकारी एजेंसी विशेष में स्थापित मेटा-हेल्प डेस्क या मेटा-डिवीजन आवश्यक महत्त्वपूर्ण डेटा प्रदान करने में मदद कर सकते हैं।
  • पारदर्शी और सहमति-आधारित अनुप्रयोग: प्रौद्योगिकी कंपनियों को अपने डेटा प्रोसेसिंग और सुरक्षा अभ्यासों में अधिक ज़िम्मेदार और पारदर्शी होने की आवश्यकता होगी।
    • व्यक्तिगत डेटा एकत्र करते समय एक सूचित सहमति-आधारित मॉडल को बढ़ावा देना और डेटा न्यूनीकरण एवं उद्देश्य सीमा के सिद्धांतों (Principles of data Minimization and Purpose Limitation) का पालन करना अनियंत्रित डेटा प्रोसेसिंग और व्यावसायिक लाभ के लिये संग्रहण पर रोक लगाने के लिये महत्त्वपूर्ण होगा।
  • वैश्विक सहयोग: मेटावर्स के लगातार विकास के साथ हम डिजिटल रूप से एक अधिक उन्नत सीमा-रहित विश्व की एक झलक देख रहे हैं जो संभावनाओं से परिपूर्ण है।
    • जबकि इस नई दुनिया का विस्तार जारी है, हमें हर नए विकास के साथ उभरने वाली चुनौतियों के बारे में भी जागरूक रहना होगा और दुनिया भर में सार्वभौमिक विनियमों की ओर आगे बढ़ना होगा।

अभ्यास प्रश्न: ‘‘जबकि मेटावर्स के लिये प्रौद्योगिकीय, जनसांख्यिकीय और नीतिगत नींव भारत में मौजूद प्रतीत होती है, मेटावर्स के निर्माण की कार्यान्वयन चुनौती बनी हुई है।’’ व्याख्या करें।

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