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जीव विज्ञान और पर्यावरण

यमुना नदी में अमोनिया का उच्च स्तर

  • 31 Dec 2020
  • 6 min read

चर्चा में क्यों? 

हाल ही में यमुना नदी के जल में अमोनिया की उच्च मात्रा पाई गई है जिसके परिणामस्वरूप दिल्ली में जल आपूर्ति लगातार बाधित हो रही है।

प्रमुख बिंदु: 

  • अमोनिया का स्तर कुछ स्थानों पर 7.3 पार्ट्स प्रति मिलियन (Parts Per Million-ppm) तक बढ़ गया है।
    • जब जल में अमोनिया की सांद्रता दिल्ली जल बोर्ड (Delhi Jal Board’s -DJB’s) की उपचार क्षमता (0.9 ppm) से अधिक हो जाती है तो जल उपचार संयंत्रों का जल के उत्पादन को या तो बंद करना होता है या फिर इसे कम किया जाता है।
    • भारतीय मानक ब्यूरो (Bureau of Indian Standards-BIS) के अनुसार, पीने के पानी में अमोनिया की स्वीकार्य अधिकतम सीमा 0.5 ppm है।

यमुना में प्रदूषण के कारण:

  • औद्योगिक प्रदूषण:
    • यमुना नदी हरियाणा से होते दिल्ली में प्रवेश करती है तथा हरियाणा में यमुना के किनारे अवस्थित सोनीपत ज़िले में कई औद्योगिक इकाइयाँ विद्यमान हैं जो यमुना के जल को प्रदूषित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उर्वरकों, प्लास्टिक और रंजक के उत्पादन में अमोनिया का उपयोग एक औद्योगिक रसायन के रूप में किया जाता है।
  • नालों का मिलना: 
    • पीने के पानी और सीवेज या औद्योगिक कचरे को प्रवाहित करने वाले दो नाले जो कि सोनीपत में है, अक्सर ओवरफ्लो के कारण या फिर वह दीवार जो इन दोनों नालों को अलग करती है उसमे क्षति के कारण आपस में मिल जाते हैं।

अमोनिया के उच्च स्तर का प्रभाव:

  • अमोनिया जल में ऑक्सीजन की मात्रा को कम कर देती है।
  • यह नाइट्रोजन के ऑक्सीकरण रूप को परिवर्तित कर देती है जिससे जल में ‘जैव रासायनिक ऑक्सीजन मांग’ ( Biochemical Oxygen Demand- BOD) बढ़ जाती है।
  • यदि जल में अमोनिया की मात्रा 1 ppm से अधिक हो तो यह जल मछलियों के लिये विषाक्त होता है।
  • मनुष्यों द्वारा 1 ppm या उससे ऊपर के अमोनिया स्तर वाले जल के दीर्घकालिक अंतर्ग्रहण से आंतरिक अंगों को नुकसान हो सकता है।

समाधान: 

  • जल में 4 ppm तक अमोनिया के स्तर को उपचारित करने हेतु जल उपचार संयंत्रों में ओज़ोन-आधारित इकाइयांँ स्थापित की जानी चाहिये।
  • पीने योग्य पानी और सीवेज के पानी के लिये अलग-अलग पाइपलाइन बिछाई जानी चाहिये।।
    • राष्ट्रीय हरित अधिकरण (National Green Tribunal) द्वारा गठित यमुना निगरानी समिति के अनुसार, नाली/पाइपलाइन बनाने के लिये फास्ट ट्रैक स्वीकृति प्रदान की जानी चाहिये।
    • वर्ष 2020 की शुरुआत में समिति ने जल मंत्रालय से यमुना नदी में अधिक स्वच्छ जल (Fresh Water) उपलब्ध कराकर इसे पुनर्जीवित करने हेतु उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और यूपी के मध्य हुए वर्ष 1994 के जल बँटवारे संबंधी समझौते पर पुनः कार्य करने की सिफारिश की थी।

अमोनिया:

  • इसका रासायनिक सूत्र NH3 है।
  • यह एक रंगहीन गैस है और इसका उपयोग उर्वरक, प्लास्टिक, सिंथेटिक फाइबर, रंजक तथा अन्य उत्पादों के निर्माण में एक औद्योगिक रसायन के रूप में किया जाता है।
  • इसकी उत्पत्ति पर्यावरण में जैविक अपशिष्ट पदार्थ के स्वाभाविक विघटन के परिणामस्वरूप होती है तथा भूमिगत एवं सतही जल स्रोतों में यह औद्योगिक अपशिष्टों, सीवेज द्वारा संदूषण या कृषि अपवाह के माध्यम से रिसकर यह अपना मार्ग स्वयं बना लेता है।

यमुना:

  • यह गंगा नदी की एक प्रमुख सहायक नदी है जो उत्तराखंड के उत्तरकाशी ज़िले में निम्न हिमालय के मसूरी रेंज में बंदरपूँछ चोटी के पास यमुनोत्री ग्लेशियर से निकलती है।
  • यह उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली में बहती हुई उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (संगम) में गंगा नदी में मिल जाती है।
  • लंबाई: युमना नदी की कुल लंबाई 1376 किमी. है।
  • महत्त्वपूर्ण बांँध: लखवार-व्यासी बांँध (उत्तराखंड), ताजेवाला बैराज बांध (हरियाणा) आदि।
  • सहायक नदियाँ: युमना नदी की महत्त्वपूर्ण सहायक नदियाँ चंबल, सिंध, बेतवा और केन हैं।

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स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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