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अंतर-ग्रहीय संदूषण: अंतरिक्ष मिशन संबंधी एक बड़ा खतरा

  • 28 Jul 2020
  • 9 min read

प्रीलिम्स के लिये

मंगल ग्रह संबंधी विभिन्न देशों के मिशन, इस संबंध में भारत का मिशन

मेन्स के लिये

अंतर-ग्रहीय संदूषण की अवधारणा और इसका संभावित खतरा

चर्चा में क्यों?

वैश्विक स्तर पर महत्त्वाकांक्षी अंतरिक्ष परियोजनाओं की बढ़ती संख्या के साथ, खगोल जीव वैज्ञानिकों (Astrobiologists) ने संभावित ‘अंतर-ग्रहीय संदूषण’ (Interplanetary Contamination) को लेकर चिंता ज़ाहिर की है।

प्रमुख बिंदु

  • गौरतलब है कि बीते दिनों मंगल ग्रह से संबंधी दो मिशन लॉन्च किये गए, जिसमें पहला चीन का तियानवेन-1 (Tianwen-1) जो कि मंगल ग्रह की सतह पर उतरेगा, वहीं दूसरा संयुक्त अरब अमीरात का ‘होप मिशन’ है, जो कि मंगल ग्रह पर लैंडिंग नहीं करेगा, बल्कि यह मंगल ग्रह के ऑर्बिट में रहकर उसके वातावरण का अध्ययन करेगा। 
  • खगोल जीव वैज्ञानिकों के अनुसार, इस प्रकार का संदूषण मुख्य तौर पर दो प्रकार हो सकता है, इसमें पहला फॉरवर्ड कंटैमिनेशन (Forward Contamination) और दूसरा बैक कंटैमिनेशन (Back Contamination) शामिल है।

फॉरवर्ड कंटैमिनेशन (Forward Contamination)

  • यहाँ फॉरवर्ड कंटैमिनेशन (Forward Contamination) का अर्थ पृथ्वी पर पाए जाने वाले जीवाणुओं (Microbes) का किसी अन्य खगोल-काय (Celestial Bodies) पर पहुँचने से है।
  • इतिहास में कई अंतरिक्ष मिशनों ने धूमकेतु (Comets) और क्षुद्रग्रह (Asteroid) जैसे खगोल-कायों के साथ शारीरिक संपर्क स्थापित किया है।
    • चूँकि इन खगोल-कायों के संबंध में यह सिद्ध है कि यहाँ जीवन संभव नहीं है, इसलिये यहाँ पर फॉरवर्ड कंटैमिनेशन एक चिंतनीय विषय नहीं है।
  • हालाँकि मंगल ग्रह के मामले में स्थितियाँ अलग हैं और मंगल से संबंधी कई अंतरिक्ष मिशनों ने ग्रह पर पहले से ही तरल रूप में जल के भंडार खोज लिये हैं और वहाँ सक्रिय रूप से जीवन की खोज की जा रही है।
  • खगोल जीव वैज्ञानिक (Astrobiologists) मानते हैं कि यदि मंगल पर जीवन की कोई भी संभावना है तो चाहे वह अपने सबसे आदिम रूप में ही क्यों न हो, मानवता पर एक नैतिक दायित्त्व है कि वे यह सुनिश्चित करें कि पृथ्वी पर मौजूद जीवाणु मंगल ग्रह के जैवमंडल (Biosphere) तक न पहुँच सकें ताकि वहाँ जीवन प्राकृतिक रूप से विकसित हो सके।
  • खतरा: इसके अलावा वैज्ञानिक मानते हैं कि पृथ्वी पर मौजूद जीवाणु यदि मंगल ग्रह पर पहुँच जाते हैं, तो ये मंगल ग्रह के जीवाणुओं की प्रमाणिकता (Integrity) को नष्ट कर देंगे अथवा सरल शब्दों में कहें तो पृथ्वी पर मौजूदा जीवाणु मंगल ग्रह के जीवाणुओं में मिलावट कर सकते हैं।
    • यह उन वैज्ञानिकों के लिये काफी चिंताजनक होगा, जो मंगल ग्रह पर जीवन की तलाश करने हेतु मंगल ग्रह का अध्ययन कर रहे हैं।

UP-PCS

बैक कंटैमिनेशन (Back Contamination) 

  • बैक कंटैमिनेशन (Back Contamination) का अर्थ अंतरिक्ष में विभिन्न खगोल-कायों पर मौजूद ऐसे जीवाणुओं के पृथ्वी पर आने से है, जो अभी तक पृथ्वी के जैवमंडल (Biosphere) में मौजूद नहीं थे।
  • नासा (NASA) मंगल ग्रह के नमूनों जैसे वहाँ की मिट्टी और चट्टान आदि को पृथ्वी पर वापस लाने से संबंधी एक मिशन की योजना बना रहा है। अनुमान के अनुसार, इस मिशन के तहत संभवतः वर्ष 2031 तक मंगल ग्रह के नमूनों को पृथ्वी पर लाया जाएगा।

ग्रहों की सुरक्षा

  • संयुक्त राष्ट्र की बाहरी अंतरिक्ष संधि-1967, अंतरिक्ष के सैन्यीकरण (Militarisation) के विरुद्ध एक बाधक के रूप में कार्य करने के साथ-साथ, इसमें शामिल सभी राष्ट्रों को अंतरिक्ष के संदूषण जोखिमों के बारे में चिंता करना और विचार करना अनिवार्य बनाती है।
    • अंतरिक्ष में हथियारों की तैनाती को लेकर बाहरी अंतरिक्ष संधि, 1967 में हुई थी, जिसमें भारत शुरू से ही शामिल रहा है। यह संधि अंतरिक्ष में ऐसे हथियार तैनात करने पर पाबंदी लगाती है, जो जनसंहारक हों। 
  • इस संधि का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिये अंतरिक्ष अनुसंधान समिति (Committee on Space Research) ने एक ’ग्रह सुरक्षा नीति’ (Planetary Protection Policy) का निर्माण किया है जिसका उद्देश्य अन्य ग्रहों पर भेजे गए जीवाणुओं की संख्या को सीमित करना है। 
  • नासा के अनुसार, ’ग्रह सुरक्षा नीति’ में दिये गए दिशा-निर्देशों का मानव अंतरिक्ष यान के डिज़ाइन, उसकी परिचालन प्रक्रियाओं और समग्र मिशन संरचना पर काफी दूरगामी प्रभाव पड़ा है। 

ग्रह सुरक्षा नीति

  • पृथ्वी की सीमा से परे और उसमें मौजूद विभिन्न तत्वों को जानने के लिये विभिन्न देशों द्वारा अब लगातार नए-नए अंतरिक्ष मिशन चलाए जा रहे हैं, किंतु यह मानवता का नैतिक दायित्त्व है कि हम यह सुनिश्चित करें कि इस दौरान हम बाह्य अंतरिक्ष में उपस्थित किसी खतरनाक पदार्थ को पृथ्वी पर न ले आएँ, साथ ही हमें यह भी सुनिश्चित करना है कि हम पृथ्वी के किसी जीवाणु को बाह्य अंतरिक्ष में न जाने दें। 
  • इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिये अंतरिक्ष अनुसंधान समिति (COSPAR) ने एक ग्रह सुरक्षा नीति तैयार की है। 

आगे की राह

  • फॉरवर्ड कंटैमिनेशन से बचाव के लिये अंतरिक्ष संबंधी सभी मिशनों में यह ध्यान रखा जाता है कि अंतरिक्ष यान पूरी तरह से जीवाणुरहित (Sterilised) हो।  
    • नासा के अनुसार, मंगल ग्रह से संबंधी बीते लगभग सभी मिशनों में अंतरिक्ष यान को पूरी तरह से जीवाणुरहित करने के बाद ही अंतरिक्ष में भेजा गया था। 
    • गौरतलब है कि बीते सप्ताह नासा के ही एक मिशन को संभावित संदूषण की समस्या को हल करने के लिये दूसरी बार स्थगित किया गया था।
  • हालाँकि बैक कंटैमिनेशन के मामले में अंतरिक्ष यान को कीटाणुरहित करना एक विकल्प के रूप में नहीं देखा जा सकता है, क्योंकि इससे मंगल ग्रह अथवा किसी अन्य खगोल-काय से प्राप्त नमूने की मूल प्रकृति नष्ट हो जाएगी।
  • इस प्रकार पृथ्वी पर अंतरिक्ष के किसी अन्य खगोल निकाय के जीवाणुओं को आने से रोकने के लिये अथवा बैक कंटैमिनेशन को रोकने के लिये आवश्यक एहतियात बरतना ही एकमात्र विकल्प हो सकता है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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