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माइक्रोप्लास्टिक पर WHO की रिपोर्ट

  • 23 Aug 2019
  • 5 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization-WHO) ने पेयजल में मौजूद माइक्रोप्लास्टिक (Microplastics) के कारण मानव स्वास्थ्य पर होने वाले प्रभावों के संबंध में एक रिपोर्ट जारी की है।

प्रमुख बिंदु

  • इस रिपोर्ट के अनुसार, पेयजल में माइक्रोप्लास्टिक का वर्तमान स्तर मानव स्वास्थ्य के लिये हानिकारक नहीं है परंतु भविष्य में इसके संभावित खतरों पर और अधिक अनुसंधान (Research) करने की आवश्यकता है।
  • WHO के अनुसार, यदि वर्तमान संदर्भ में बात करें तो पेयजल में माइक्रोप्लास्टिक्स की उपस्थिति के आँकड़े काफी सीमित हैं जिनके आधार पर सटीक विश्लेषण करना मुश्किल है।

माइक्रोप्लास्टिक्स (Microplastics):

  • माइक्रोप्लास्टिक्स पाँच मिलीमीटर से भी छोटे आकर के प्लास्टिक के टुकड़ें होते हैं।
  • जल निकायों में इनका प्रवेश अन्य प्रदूषकों के वाहक के रूप में कार्य करता है। ये खाद्य श्रृंखला में प्रवेश कर कैंसरजन्य रासायनिक यौगिकों के वाहक बनते है।
  • प्रशांत, अटलांटिक और हिंद महासागर में उच्च स्तर के माइक्रोप्लास्टिक्स पाए गए हैं।
  • WHO ने प्लास्टिक प्रदुषण को नियंत्रित करने और माइक्रोप्लास्टिक तक मानव की पहुँच को कम करने पर बल दिया है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, नीति निर्माताओं और जनसामान्य द्वारा प्लास्टिक का बेहतर प्रबंधन करने और इसके उपयोग को कम करने के लिये उपाय किये जाने चाहिये।
  • ऐसी संभावना बहुत कम है कि मानव शरीर 150 माइक्रोमीटर से बड़े आकार के माइक्रोप्लास्टिक को अवशोषित नहीं कर सकें परंतु मानव शरीर सूक्ष्म आकार के प्लास्टिक सहित अति सूक्ष्म प्लास्टिक कणों को अवश्य अवशोषित कर सकता है। हालाँकि इस संदर्भ में भी बहुत सीमित आँकड़े ही उपलब्ध है।
  • स्पष्ट रूप से वर्तमान में प्लास्टिक प्रदूषण में जारी वृद्धि को रोकने पर अधिक ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिये।
  • यदि पर्यावरण में प्लास्टिक प्रसार की वर्तमान दर बनी रहती है तो अगली एक सदी में माइक्रोप्लास्टिक जलीय परितंत्र के लिये संकट उत्पन्न कर सकता है। जिस कारण मानव तक माइक्रोप्लास्टिक की पहुँच की संभावना में वृद्धि होने की संभावना है।
  • रिपोर्ट में अपशिष्ट जल उपचार (Wastewater Treatment) का सुझाव दिया गया है जो निस्पंदन (Filtration) का उपयोग कर पानी मैं मौजूद 90% से अधिक माइक्रोप्लास्टिक्स को हटा सके।
  • इन उपायों से दोहरा फायदा होगा क्योंकि यह डायरिया (Diarrhoeal Diseases) जैसे जल जनित रोगों के लिये उत्तरदायी सूक्ष्म रोगजनकों के साथ-साथ पानी से रसायनों को दूर कर दूषित पेयजल की समस्या का भी समाधान करेगा।

विश्व स्वास्थ्य संगठन

(World Health Organization-WHO)

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) संयुक्त राष्ट्र संघ की एक विशेष एजेंसी है, जिसका उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य (Public Health) को बढ़ावा देना है।
  • इसकी स्थापना 7 अप्रैल, 1948 को हुई थी।
  • इसका मुख्यालय जिनेवा (स्विट्ज़रलैंड) में अवस्थित है।
  • WHO संयुक्त राष्ट्र विकास समूह (United Nations Development Group) का सदस्य है। इसकी पूर्ववर्ती संस्था ‘स्वास्थ्य संगठन’ लीग ऑफ नेशंस की एजेंसी थी।
  • यह एक अंतर-सरकारी संगठन है जो सदस्य देशों के स्वास्थ्य के मंत्रालयों के साथ मिलकर काम करता है।
  • WHO का मुख्य उद्देश्य, वैश्विक स्वास्थ्य मामलों पर नेतृत्व प्रदान करते हुए स्वास्थ्य अनुसंधान एजेंडा को आकार देना, मानदंड और मानक निर्धारण, देशों को तकनीकी सहायता प्रदान करना और स्वास्थ्य रुझानों की निगरानी और मूल्यांकन करना है।
  • भारत 12 जनवरी 1949 को WHO का सदस्य बन गया।
  • दक्षिण पूर्व एशिया के लिये WHO का क्षेत्रीय कार्यालय नई दिल्ली में स्थित है।

स्रोत: द हिंदू

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