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FCRA कानून एवं विदेशी अंशदान पर नियंत्रण

  • 14 Sep 2020
  • 8 min read

प्रिलिम्स के लिये

विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA), 2010 

मेन्स के लिये

विदेशी अंशदान प्राप्त करने पर प्रतिबंध, विदेशी अंशदान प्राप्त करने के अन्य विकल्प

चर्चा में क्यों?

इस वर्ष 13 गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) के लाइसेंस को विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA), 2010 के तहत निलंबित कर दिया गया है। गृह मंत्रालय को आदिवासी क्षेत्रों में FCRA के दायरे में आने वाले कई NGOS के कामकाज के बारे में ‘गंभीर प्रतिकूल इनपुट’ प्राप्त हुए थे। झारखंड में काम करने वाले कम से कम दो NGOs के लाइसेंस निलंबित कर दिये गए हैं।

प्रमुख बिंदु:

क्या है FCRA?

  • FCRA विदेशी अंशदान को नियंत्रित कर यह सुनिश्चित करता है कि ऐसे अंशदान आंतरिक सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव न डालें।
  • वर्ष 1976 में FCRA को पहली बार अधिनियमित किया गया था। वर्ष 2010 में विदेशी अंशदान को विनियमित करने के लिये नए उपायों को अपनाने के पश्चात् इसे संशोधित किया गया।
  • FCRA विदेशी अंशदान प्राप्त करने वाले सभी संघों (Associations), समूहों (Groups) और NGOs पर लागू होता है। ऐसे सभी NGOs के लिये FCRA के तहत स्वयं को पंज़ीकृत करवाना अनिवार्य है।
  • प्रारंभ में पंज़ीकरण पाँच वर्ष के लिये वैध होता है, लेकिन सभी मानदंडों का पालन करने पर तत्पश्चात् इसे नवीनीकृत किया जा सकता है। 
  • पंज़ीकृत संघ/संगठन सामाजिक, शैक्षिक, धार्मिक, आर्थिक और सांस्कृतिक उद्देश्यों के लिये  विदेशी योगदान प्राप्त कर सकते हैं। 
  • वर्ष 2015 में गृह मंत्रालय द्वारा अधिसूचित नियमों के अनुसार, NGOs को एक शपथ-पत्र प्रस्तुत करने का प्रावधान किया गया, जिसमें यह उल्लेख किया जाना आवश्यक है कि विदेशी धन की स्वीकृति से भारत की संप्रभुता और अखंडता, किसी विदेशी राज्य के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध एवं सांप्रदायिक सद्भाव को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करने की संभावना नहीं है। 
  • विदेशी अंशदान प्राप्त करने वाले सभी NGOs को ऐसे राष्ट्रीयकृत या निजी बैंकों में खातों का संचालन करना होगा, जिनके पास वास्तविक समय के आधार पर सुरक्षा एजेंसियों तक पहुँच उपलब्ध कराने के लिये कोर बैंकिंग सुविधाएँ हों।

विदेशी अंशदान प्राप्त करने पर प्रतिबंध

  • विधायिका और राजनीतिक दलों के सदस्य, सरकारी अधिकारी, न्यायाधीश और मीडियाकर्मी आदि को किसी भी प्रकार के विदेशी अंशदान को प्राप्त करने से प्रतिबंधित किया गया है।
  • हालाँकि वर्ष 2017 में  वित्त विधेयक के माध्यम से गृह मंत्रालय ने वर्ष 1976 के FCRA कानून में संशोधन किया, जिससे राजनीतिक दलों को एक विदेशी कंपनी की भारतीय सहायक कंपनी या 50% अथवा उससे अधिक भारतीय शेयरों वाली विदेशी कंपनी से धन प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त हुआ।
  • एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR), एक सार्वजनिक वकालत समूह, ने वर्ष 2013 में दिल्ली उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की थी जिसमें भारतीय जनता पार्टी और कॉन्ग्रेस पर विदेशी धन स्वीकार करके FCRA मानदंडों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया।
  • दोनों पक्षों ने वर्ष 2014 में दान को अवैध करार देने वाले उच्च न्यायालय के निर्णय को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी। बाद में FCRA में भूतलक्षी संशोधन के पश्चात् याचिका वापस ले ली गई।

विदेशी अंशदान प्राप्त करने के अन्य विकल्प

  • विदेशी योगदान प्राप्त करने का दूसरा तरीका 'पूर्व अनुमति' के लिये आवेदन करना है।  यह आवेदन विशिष्ट गतिविधियों या परियोजनाओं को पूरा करने के लिये एक विशिष्ट अंशदानकर्ता से एक विशिष्ट राशि की प्राप्ति के लिये दिया जाता है।  
  • इसके लिये संघ/संगठन को सोसायटी पंज़ीकरण अधिनियम, 1860, भारतीय ट्रस्ट अधिनियम, 1882 या कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा-25 के तहत पंज़ीकृत होना चाहिये। राशि और उद्देश्य को निर्दिष्ट करने वाले विदेशी अंशदानकर्ता से प्रतिबद्धता का एक प्रमाण-पत्र भी आवश्यक है।
  • वर्ष 2017 में गृह मंत्रालय ने तंबाकू नियंत्रण गतिविधियों पर सांसदों के साथ लॉबी करने के लिये 'विदेशी निधियों' का उपयोग करने के आधार पर 'पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया' (PHFI) को FCRA के तहत निलंबित कर दिया। PHFI द्वारा सरकार को कई अभ्यावेदन प्रस्तुत करने के पश्चात् इसे 'पूर्व अनुमति' श्रेणी में रखा गया था।

पंजीकरण का निलंबन/रद्द किया जाना

  • गृह मंत्रालय द्वारा खातों के निरीक्षण के दौरान या एक संघ/संगठन के कामकाज के खिलाफ कोई प्रतिकूल इनपुट प्राप्त होने पर प्रारंभ में 180 दिनों के लिये FCRA पंज़ीकरण को निलंबित किया जा सकता है।  
  • जब तक कोई निर्णय नहीं ले लिया जाता, तब तक संघ/संगठन कोई भी नया अंशदान प्राप्त नहीं कर सकता है। साथ ही वह गृह मंत्रालय की अनुमति के बिना नामित बैंक खाते में उपलब्ध राशि के 25% से अधिक का उपयोग नहीं कर सकता है। 
  • गृह मंत्रालय ऐसे संगठन के पंज़ीकरण को रद्द कर सकता है। पंज़ीकरण रद्द करने की तारीख से तीन वर्ष तक पंज़ीकरण या 'पूर्व अनुमति’ देने के लिये पात्र नहीं होगा।

पूर्व में निलंबन

  • गृह मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, उल्लंघन, जैसे- विदेशी अंशदान का दुरुपयोग, अनिवार्य वार्षिक रिटर्न न जमा करना और अन्य उद्देश्यों के लिये विदेशी फंड काआदि कारणों से,  वर्ष 2011 के पश्चात् से 20,664 संघों का पंज़ीकरण रद्द कर दिया गया।  
  • 11 सितंबर, 2020 तक 49,843 FCRA-पंज़ीकृत संघ हैं। 

अंतर्राष्ट्रीय अंशदानकर्ता

  • सरकार ने विदेशी अंशदान कर्त्ताओं, जैसे- अमेरिका स्थित कम्पैशन इंटरनेशनल, फोर्ड फाउंडेशन, वर्ल्ड मूवमेंट फॉर डेमोक्रेसी, ओपन सोसाइटी फाउंडेशन और नेशनल एंडोमेंट फॉर डेमोक्रेसी पर भी शिकंज़ा कसा है। 
  • अंशदानकर्ताओं को गृह मंत्रालय की मंज़ूरी के बिना संघों/संगठनों को धन भेजने से रोकने के लिये 'वॉच लिस्ट या ' पूर्व अनुमति’ श्रेणी में रखा गया है।

स्रोत: द हिंदू

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